बक्सर: 9 साल बाद पुलिस को मिली कामयाबी, हरेंद्र सिंह हत्याकांड का मास्टरमाइंड गिरफ्तार

Harendra Singh Murder Case Master Mind Vikash Verma arrested
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Harendra Singh Murder Case: बक्सर के बहुचर्चित हरेंद्र सिंह हत्याकांड में पुलिस को आखिरकार 9 साल बाद वह कामयाबी मिल गई, जिसका इंतजार लंबे समय से था। कोर्ट से उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के कुछ ही दिनों बाद इस हत्याकांड के मुख्य साजिशकर्ता को पुलिस ने धर दबोचा है। आरोपी सालों से पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहा था, लेकिन एक गुप्त सूचना ने पूरा खेल पलट दिया।

क्या है पूरा मामला?

यह सनसनीखेज मामला बक्सर नगर थाना क्षेत्र के नया बस स्टैंड के समीप का है, जहां करीब 9 साल पहले 22 अगस्त 2016 की रात हरेंद्र सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हरेंद्र सिंह बस स्टैंड से अपने घर सोहनीपट्टी लौट रहे थे, तभी पोखरा के पास बदमाशों ने उन्हें निशाना बनाया।

हालाकी उस वक्त पुलिस ने तेजी से कार्रवाई शुरू की थी, लेकिन इस हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता विकास वर्मा पुलिस की पकड़ से बाहर था। यह मामला नगर थाना कांड संख्या 382/2016 और सेशन ट्रायल संख्या 354/2017 से जुड़ा हुआ है।

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क्या थी हत्या के पीछे की असली वजह?

हरेंद्र सिंह हत्याकांड की जड़ में जमीन को लेकर हुआ विवाद सामने आया है। जांच के दौरान अपर लोक अभियोजक रामनाथ ठाकुर ने बताया कि आरोपी विकास वर्मा ने हरेंद्र सिंह से जमीन दिलाने के नाम पर करीब बारह लाख रुपये लिए थे। जब रकम लौटाने का दबाव बढ़ा, तो पैसे से बचने की नीयत से हत्या की खौफनाक साजिश रची गई।

Harendra Singh Murder Case Accused Vikash arrested

बताया जा रहा है की इस साजिश को विकास वर्मा ने अकेले नहीं, बल्कि अपने साथियों के साथ मिलकर अंजाम दिया, जिससे यह मामला और भी गंभीर हो गया।

10 गवाहों के आधार पर चार दोषियों को उम्रकैद

बक्सर के बहुचर्चित हरेंद्र सिंह हत्याकांड में हाल ही में अदालत ने सख्त फैसला सुनाते हुए चार आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत ने उपलब्ध सबूतों और दस अहम गवाहों की मजबूत गवाही के आधार पर जिला पार्षद सदस्य के पति सह प्रतिनिधि रिंकू यादव, रामाशीष उर्फ चतुरी, अजय कुमार पांडे और जयराम पासवान को हत्या का दोषी माना।

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कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत सभी को आजीवन कारावास, धारा 326 के तहत दस वर्ष का कठोर कारावास और शस्त्र अधिनियम की धारा 27 के तहत चार वर्ष की सजा सुनाई। खास बात है कि अदालत ने पीड़िता इंदू सिंह को दो लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया है, जिससे साफ है कि न्यायालय ने इस मामले में बेहद सख्त और संवेदनशील रुख अपनाया।

क्या कहते हैं नगर थानाध्यक्ष

नगर थानाध्यक्ष मनोज सिंह ने बताया कि,

विकास वर्मा लंबे समय से फरार चल रहा था और लगातार पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहा था। लेकिन शुक्रवार देर रात गुप्त सूचना मिली कि आरोपी वीर कुंवर सिंह कॉलोनी के आसपास छिपा हुआ है। सूचना मिलते ही एक विशेष टीम का गठन किया गया और इलाके की घेराबंदी कर विकास वर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया।

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फिलहाल आरोपी से गहन पूछताछ जारी है और पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि इतने सालों तक वह कहां और किसकी मदद से छिपा हुआ था। पुलिस सूत्रों की मानें तो पूछताछ के दौरान कई अहम खुलासे हो सकते हैं। यह भी जांच की जा रही है कि फरारी के दौरान आरोपी को किन लोगों ने पनाह दी और क्या इस मामले में कोई और भी शामिल था।

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Veer Rai

Founder & Editor, जय जगदम्बा न्यूज

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