3000 KM रेंज और 30+ घंटे की उड़ान… दुश्मनों के लिए काल बनेगा भारत का AI विमान ‘काल भैरव’

A futuristic AI combat Kaal Bhairav Aircraft
1 min read

Kaal Bhairav Aircraft: भारत के रक्षा क्षेत्र में एक नई तकनीकी क्रांति की शुरुआत हो गई है। देश का पहला AI आधारित कॉम्बैट विमान ‘काल भैरव’ अब दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। 3000 किलोमीटर की लंबी रेंज और 30 घंटे से ज्यादा उड़ान क्षमता वाला यह विमान भविष्य की युद्ध तकनीक को पूरी तरह बदल सकता है। इसका निर्माण अब अंतरराष्ट्रीय सहयोग के साथ पुर्तगाल में किया जाएगा, जिससे भारत की डिफेंस टेक्नोलॉजी को वैश्विक पहचान मिल सकती है।

भारत-यूरोप साझेदारी से तेज हुआ Kaal Bhairav Aircraft प्रोजेक्ट

भारत की AI रक्षा कंपनी FWDA और यूरोप की SKETCHPIXEL कंपनी ने मिलकर ‘काल भैरव’ प्रोजेक्ट को नई रफ्तार दे दी है। बता दें कि SKETCHPIXEL पहले भी F-16 जैसे आधुनिक फाइटर जेट्स के लिए सिमुलेशन सिस्टम बनाने के लिए जानी जाती है।

इस साझेदारी के तहत वह इस प्रोजेक्ट में एडवांस सिमुलेशन तकनीक, AI सिस्टम, मजबूत कम्युनिकेशन नेटवर्क और बेहतर इंटरऑपरेबिलिटी तकनीक उपलब्ध कराएगी। वहीं FWDA इस पूरे सिस्टम की मुख्य ऑटोनॉमस तकनीक और एयरक्राफ्ट डिजाइन के सभी अधिकार अपने पास रखेगी।

गौरतलब है कि यह सहयोग सिर्फ एक विमान बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद भविष्य की AI आधारित रक्षा तकनीक का एक मजबूत और आधुनिक इकोसिस्टम तैयार करना भी है।

ये भी पढ़ें: अब हेयरस्टाइल चुनना हो गया और भी आसान, ChatGPT बताएगा आपका परफेक्ट लुक

‘काल भैरव’ की सबसे बड़ी ताकत क्या है?

‘काल भैरव’ एक ऐसा ऑटोनॉमस कॉम्बैट विमान है जिसे मीडियम ऊंचाई पर लंबे समय तक उड़ान भरने के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बिना रुके लंबी दूरी तय कर सकता है और लगातार मिशन पर बना रह सकता है। Kaal Bhairav Aircraft करीब 3000 किलोमीटर तक उड़ान भरने में सक्षम है और 30 घंटे से ज्यादा समय तक हवा में रह सकता है, जो इसे बेहद खास बनाता है।

इसमें एडवांस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित टारगेट पहचान सिस्टम दिया गया है, जिससे यह मुश्किल और चुनौतीपूर्ण सैन्य हालात में भी सटीक काम कर सकता है। इसके साथ ही इसमें स्वार्म कोऑर्डिनेशन तकनीक भी है, जिसकी मदद से कई ड्रोन या विमान एक साथ मिलकर एक टीम की तरह काम कर सकते हैं।

सुरक्षा के लिए इसमें एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन सिस्टम लगाया गया है, जिससे डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहता है। हालांकि पारंपरिक विमान महंगे और सीमित क्षमता वाले होते हैं, लेकिन FWDA का ध्यान पूरी तरह ऑटोनॉमस एयर पावर और भविष्य की AI आधारित डिफेंस टेक्नोलॉजी को मजबूत करने पर है।

भारत की रक्षा क्षमता और वैश्विक भूमिका पर असर

FWDA के CEO सुहास तेजस्कंदा ने इस साझेदारी को भारत के लिए एक बड़ा अवसर बताया है। उनके अनुसार यह सहयोग भारतीय तकनीक को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

ये भी पढ़ें: अब भारतीय राइफल से लैस होगी ब्रिटिश आर्मी, ब्रिटेन के 2 लाख राइफलों की डील में भारत लेगा हिस्सा

उन्होंने कहा कि,

पुर्तगाल की रणनीतिक स्थिति और NATO नेटवर्क तक पहुंच इस प्रोजेक्ट को यूरोप और अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजार में नई संभावनाएं देगी। इस तरह की तकनीक भारत को दुनिया के शीर्ष रक्षा निर्यातकों की सूची में लाने में मदद कर सकती है।

वहीं SKETCHPIXEL के CEO मिगुएल अब्रू ने इस सहयोग को तकनीकी मजबूती का उदाहरण बताया है। उन्होंने कहा कि,

इस प्रोजेक्ट में डिजाइन से लेकर फर्मवेयर, कम्युनिकेशन और कंट्रोल सिस्टम तक सभी चीजें उच्च स्तर की सुरक्षा और तकनीकी मानकों के साथ विकसित की जाएंगी।

गौरतलब है कि दोनों देशों की टीमें लगातार मिलकर काम करेंगी और तकनीक का आदान-प्रदान किया जाएगा। इससे न केवल प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ेगा, बल्कि भविष्य में AI आधारित रक्षा प्रणालियों के लिए नए रास्ते भी खुलेंगे।

Jai Jagdamba News Whatsapp