करवा चौथ पर भद्रा का कितना असर? पूजा से पहले जान लें शुभ मुहूर्त और व्रत के जरूरी नियम

सुहागिनों के लिए साल का सबसे खास त्योहार आ चुका है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए भूखी-प्यासी रहकर व्रत रखती हैं। लेकिन इस बार व्रत रखने वाली महिलाओं के मन में पूजा के समय और भद्रा को लेकर कई तरह के असमंजस चल रहे हैं। आइए जानते हैं कि इस साल करवा चौथ पर भद्रा का समय क्या है और पूजा कब की जाएगी।
भद्रा काल का समय
सनातन पंचांग के हिसाब से इस बार भद्रा 28 अक्टूबर की सुबह पांच बजकर इकतीस मिनट पर शुरू हो जाएगी। यह अशुभ समय अगले दिन यानी 29 अक्टूबर की सुबह चार बजकर सत्ताईस मिनट पर खत्म होगा। इसका मतलब यह है कि त्योहार के दिन सूरज निकलने से पहले ही भद्रा का साया पूरी तरह से हट जाएगा। धार्मिक नियमों के अनुसार इस काल में कोई भी शुभ काम करना वर्जित माना जाता है, लेकिन समय रहते इसके समाप्त होने से राहत मिल गई है।
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करवा चौथ 2026: शुभ मुहूर्त और महत्वपूर्ण समय (Karwa Chauth 2026 Muhurat)
| गतिविधि | निर्धारित समय | जरूरी जानकारी |
|---|---|---|
| कार्तिक कृष्ण चतुर्थी तिथि | 29 अक्टूबर, रात 1:06 बजे से रात 10:09 बजे तक | व्रत और पूजा के लिए तिथि का समय पंचांग से जांचें। |
| भद्रा काल | सुबह 6:25 बजे से 6:46 बजे तक, कुल 21 मिनट | भद्रा से जुड़े धार्मिक नियमों के लिए स्थानीय पंचांग और पारिवारिक परंपरा देखें। |
| सरगी खाने का समय | सुबह 3:30 बजे से 5:30 बजे तक | सरगी आमतौर पर सूर्योदय से पहले ग्रहण की जाती है। |
| शाम की पूजा का शुभ मुहूर्त | शाम 5:38 बजे से 6:56 बजे तक, कुल 1 घंटा 18 मिनट | पूजा से पहले स्थानीय पंचांग से मुहूर्त की पुष्टि करें। |
| चंद्रोदय का संभावित समय | रात 8:15 बजे से 8:17 बजे के आसपास | चांद निकलने का समय शहर के अनुसार अलग हो सकता है। चंद्र दर्शन और अर्घ्य के बाद परंपरा के अनुसार व्रत खोलें। |
शाम की पूजा
करवा चौथ पर मुख्य रूप से शाम के वक्त ही माता की आराधना की जाती है। इस बार सुहागिनें शाम को पांच बजकर अड़तीस मिनट से लेकर छह बजकर छप्पन मिनट के बीच पूजा कर सकेंगी। चूंकि भद्रा सुबह ही समाप्त हो चुकी होगी, इसलिए शाम की पूजा पर इसका कोई भी असर नहीं पड़ेगा। महिलाएं आराम से विधि-विधान के साथ गणेश जी और करवा माता की पूजा संपन्न कर सकती हैं।
सरगी और व्रत
व्रत की शुरुआत सुबह सूरज निकलने से पहले सरगी खाकर की जाती है, जो कि सास द्वारा दी जाती है। चूंकि भद्रा का समय सुबह चार बजकर सत्ताईस मिनट पर ही खत्म हो जाएगा, इसलिए सरगी खाने के समय पर कोई रोक या बाधा नहीं आएगी। महिलाएं अपनी परंपरा के अनुसार सुबह उठकर सरगी खा सकती हैं और पूरे दिन का निर्जला व्रत बिना किसी परेशानी के शुरू कर सकती हैं।
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करवा चौथ व्रत से जुड़ी जरूरी बातें और नियम
सरगी का नियम: सरगी हमेशा सास द्वारा अपनी बहू को दी जाती है। इसे सूर्योदय से पहले खाकर व्रत का संकल्प लिया जाता है। सरगी की थाली में फल, मेवे, मिठाई और सात्विक भोजन शामिल होना चाहिए ताकि दिनभर ऊर्जा बनी रहे।
निर्जला उपवास: यह व्रत पूरी तरह से निर्जला (बिना अन्न और जल के) रखा जाता है। रात को चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य के बाद ही जल ग्रहण किया जाता है।
पूजा की दिशा: शाम को करवा माता, भगवान गणेश, भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते समय दीवार पर बने करवा चित्र या मूर्ति का मुख पश्चिम की तरफ होना चाहिए और पूजा करने वाली महिला का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए।
सुहाग सामग्री का दान: पूजा के बाद अपनी सास या घर की किसी बड़ी सुहागिन महिला के पैर छूकर आशीर्वाद लें और उन्हें सुहाग की थाली (बाया) भेंट करें।
सावधानी: भद्रा काल (सुबह 06:25 से 06:46) के दौरान सुहाग का नया सामान जैसे चूड़ी, बिंदी या सिंदूर पहली बार धारण न करें। इस समय को छोड़कर बाकी पूरे दिन कभी भी श्रृंगार किया जा सकता है।

