सिलेंडर बार-बार हो रहा है खाली? रसोई की ये गलतियां बढ़ा सकती हैं गैस की खपत

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LPG Gas Saving Tips: रसोई गैस का सिलेंडर आज हर घर के बजट का अहम हिस्सा है। अगर सिलेंडर सामान्य समय से पहले खत्म हो रहा है, तो इसकी वजह सिर्फ ज्यादा खाना बनाना नहीं हो सकती। कुछ छोटी गलतियां रोजाना गैस की खपत बढ़ा सकती हैं।

बर्नर की सफाई से लेकर बर्तन के आकार और खाना पकाने की आंच तक, कई चीजें एलपीजी की खपत पर असर डालती हैं। सही तरीके अपनाकर गैस की बर्बादी कम की जा सकती है और सिलेंडर को ज्यादा दिनों तक चलाया जा सकता है।

ये हैं रसोई में LPG बचाने के आसान तरीके

रसोई गैस की खपत कम करने के लिए हमेशा बड़े बदलाव करने की जरूरत नहीं होती। खाना पकाने के तरीके, बर्नर की सफाई, बर्तन का सही इस्तेमाल और आंच को नियंत्रित रखने जैसी छोटी आदतें भी काफी फर्क डाल सकती हैं।

बर्नर की पीली लौ को न करें नजरअंदाज

गैस चूल्हे के बर्नर पर खाना बनाते समय तेल, मसाले और खाने के छोटे कण जमा होते रहते हैं। लंबे समय तक सफाई न होने पर ये बर्नर के छोटे छेदों को बंद कर सकते हैं। इससे गैस और हवा का सही मिश्रण नहीं बन पाता और नीली लौ की जगह पीली या नारंगी लौ दिखाई देने लगती है।

नीली लौ आमतौर पर गैस के बेहतर तरीके से जलने का संकेत देती है। वहीं, पीली लौ यह बता सकती है कि बर्नर ठीक तरह से काम नहीं कर रहा है। इससे बर्तन का निचला हिस्सा काला पड़ सकता है और गैस की खपत भी बढ़ सकती है।

इसलिए बर्नर को समय-समय पर साफ करना जरूरी है। बर्नर ठंडा होने के बाद इसे गुनगुने पानी और बेकिंग सोडा या सिरके के घोल से साफ किया जा सकता है। सफाई के बाद यह भी सुनिश्चित करें कि बर्नर के सभी छेद खुले हों।

बर्तन के हिसाब से चुनें बर्नर और आंच

कई बार छोटे बर्तन को बड़े बर्नर पर रखकर तेज आंच कर दी जाती है। ऐसी स्थिति में लौ बर्तन के किनारों से बाहर निकलने लगती है। इससे गैस तो जलती रहती है, लेकिन उसकी गर्मी का पूरा इस्तेमाल खाना पकाने में नहीं हो पाता।

इसलिए हमेशा बर्तन के आकार के अनुसार बर्नर और आंच का चुनाव करें। कोशिश करें कि लौ बर्तन के निचले हिस्से तक ही रहे और किनारों से बाहर न निकले। चौड़े और सपाट तले वाले बर्तन गर्मी को बेहतर तरीके से ग्रहण करते हैं। गोल या मुड़े हुए तले वाले बर्तनों की तुलना में इनमें खाना जल्दी पकने में मदद मिल सकती है।

हर खाना तेज आंच पर पकाना जरूरी नहीं

यह मानना सही नहीं है कि तेज आंच पर खाना पकाने से हमेशा गैस और समय दोनों बचेंगे। पानी या ग्रेवी में उबाल आने के बाद आंच बढ़ाने से उसका तापमान उसी अनुपात में नहीं बढ़ता। इसके बजाय पानी तेजी से भाप बनने लगता है।

इसलिए दाल, सब्जी या ग्रेवी में एक बार उबाल आने के बाद आंच को धीमा या मध्यम कर देना बेहतर है। बर्तन को ढककर धीमी आंच पर पकाने से गर्मी और भाप अंदर बनी रहती है और भोजन को पकने में मदद मिलती है।

प्रेशर कुकर का करें सही इस्तेमाल

दाल, राजमा, छोले, चावल और आलू जैसी चीजों को खुले बर्तन में पकाने में ज्यादा समय लग सकता है। ऐसे खाद्य पदार्थों के लिए प्रेशर कुकर का इस्तेमाल समय और गैस दोनों बचाने में मदद कर सकता है। दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रेशर कुकर का सही इस्तेमाल रसोई गैस की खपत में 50 से 70 प्रतिशत तक बचत कर सकता है।

दाल या अनाज को पकाने से करीब आधे घंटे पहले पानी में भिगोकर रखने से भी उन्हें जल्दी पकाने में मदद मिल सकती है। इससे खाना पकाने में लगने वाला समय कम हो सकता है।

चूल्हा जलाने से पहले पूरी तैयारी कर लें

खाना बनाना शुरू करने से पहले सभी जरूरी चीजें तैयार रखना भी गैस बचाने का आसान तरीका है। सब्जियां काट लें, मसाले निकालकर रखें और दाल-चावल धोकर तैयार कर लें। इससे चूल्हा जलाने के बाद सामान ढूंढने में गैस बेवजह जलती नहीं रहेगी।

खाना पकाते समय बर्तन पर ढक्कन लगाने से भी गर्मी और भाप अंदर बनी रहती है। इससे भोजन को पकाने में मदद मिलती है और लंबे समय तक चूल्हा चलाने की जरूरत कम हो सकती है।

फ्रिज से निकली सामग्री को तुरंत गैस पर न रखें

फ्रिज में रखी सब्जी, दूध, आटा या पहले से बनी ग्रेवी काफी ठंडी होती है। इन्हें फ्रिज से निकालते ही गैस पर रखने पर पहले इन्हें सामान्य तापमान तक लाने में गर्मी खर्च होती है।

इसलिए ऐसी सामग्री को इस्तेमाल करने से करीब 20 से 30 मिनट पहले फ्रिज से बाहर निकालकर रखना बेहतर है। कमरे के सामान्य तापमान पर आने के बाद इसे गैस पर रखने से खाना पकाने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकती है।

गैस बचाने के साथ सुरक्षा का भी रखें ध्यान

रसोई गैस की खपत कम करने के साथ उसकी सुरक्षा पर ध्यान देना भी जरूरी है। अगर सभी सावधानियां अपनाने के बावजूद सिलेंडर सामान्य समय से काफी पहले खत्म हो रहा है, तो रेगुलेटर, गैस पाइप और बर्नर की जांच जरूर कराएं। पाइप या रेगुलेटर में छोटी सी लीकेज होने पर भी गैस लगातार बाहर निकल सकती है। इससे गैस की बर्बादी के साथ घर में सुरक्षा का खतरा भी बढ़ सकता है।

गैस पाइप में लीकेज की जांच के लिए उस पर साबुन के पानी का झाग लगाया जा सकता है। अगर कहीं से लगातार बुलबुले बनते दिखाई दें, तो वहां लीकेज हो सकती है। गैस की गंध महसूस होने पर तुरंत रेगुलेटर बंद कर दें और किसी अधिकृत गैस एजेंसी के तकनीशियन से इसकी जांच कराएं। रसोई में गैस बचाने वाली आदतों के साथ इन छोटी-छोटी सुरक्षा सावधानियों का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है।

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Founder & Editor, जय जगदम्बा न्यूज
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