पितृ दोष से हैं परेशान? इस सर्वपितृ अमावस्या करें ये आसान उपाय, मिल सकती है राहत

Sarvapitru Amavasya Pitru Dosh Upay
1 min read

Sarvapitru Amavasya Pitru Dosh Upay: सर्वपितृ अमावस्या को पितृ पक्ष का बेहद महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पूर्वजों को याद कर तर्पण, श्राद्ध, दान और सेवा करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष बताया जाता है, वे इस दिन कुछ विशेष उपाय कर सकते हैं। मान्यता है कि इन उपायों से पितृ दोष के प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है।

पितृ दोष क्या होता है?

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को पिता, आत्मा और पूर्वजों से जुड़ा ग्रह माना गया है। जब कुंडली में सूर्य पर राहु या केतु का प्रभाव हो, नवम भाव कमजोर हो या संबंधित ग्रह कमजोर स्थिति में हो, तो इसे पितृ दोष से जोड़ा जाता है। मान्यताओं के अनुसार पितृदोष के कारण व्यक्ति के जीवन में कई तरह की परेशानियां आ सकती हैं।

परिवार में विवाद बने रहना, करियर में रुकावट, विवाह या संतान से जुड़ी परेशानी और आर्थिक मामलों में अड़चन जैसी स्थितियों को इससे जोड़ा जाता है। सर्वपितृ अमावस्या को पितरों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष अवसर माना जाता है। इसलिए इस दिन तर्पण और अन्य धार्मिक उपाय किए जाते हैं।

सर्वपितृ अमावस्या पर पितरों की शांति के लिए करें ये उपाय

सर्वपितृ अमावस्या पर पितरों का तर्पण करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन तर्पण, दीपक, दान और सेवा जैसे कार्य करने से पितरों की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है। पितृ दोष से जुड़े लोग भी इस दिन अपनी श्रद्धा के अनुसार कुछ विशेष उपाय कर सकते हैं।

चांदी के पात्र से करें तर्पण

सर्वपितृ अमावस्या के दिन चांदी के पात्र में जल, काले तिल और थोड़ा गंगाजल लेकर पितरों का स्मरण करते हुए तर्पण किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे पितरों को शांति मिलती है और पितृ दोष के प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है।

दक्षिण दिशा में जलाएं सरसों के तेल का दीपक

धार्मिक मान्यता में दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना गया है। ऐसे में सर्वपितृ अमावस्या पर दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का दीपक जलाकर पितरों की शांति और उनके मार्ग की प्रार्थना की जा सकती है।

पीपल के पेड़ के नीचे जलाएं दीपक

सर्वपितृ अमावस्या की शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने की भी परंपरा है। हालांकि, दीपक जलाते समय पेड़ को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे, इसका ध्यान रखना चाहिए। साथ ही पेड़ के आसपास गंदगी नहीं फैलानी चाहिए।

सूर्य को दें काले तिल का अर्घ्य

सर्वपितृ अमावस्या की सुबह स्नान करने के बाद तांबे के पात्र में जल और काले तिल लेकर सूर्य को अर्घ्य देने की मान्यता है। इस दौरान आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ भी किया जा सकता है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को पिता और पितृ तत्व से संबंधित माना जाता है।

कौवे को खिलाएं सात्विक भोजन

पितृपक्ष में कौवे को पितरों का प्रतीक माना जाता है। इसलिए सर्वपितृ अमावस्या पर घर में बने सात्विक भोजन का एक हिस्सा कौवे के लिए निकालने की परंपरा है। इसे पितरों के प्रति सम्मान और श्रद्धा से जोड़कर देखा जाता है।

गुड़ और काले तिल का करें दान

सर्वपितृ अमावस्या पर गुड़ और काले तिल का दान भी किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इन चीजों का संबंध सूर्य से माना जाता है। कोशिश करें कि दान किसी जरूरतमंद व्यक्ति को किया जाए। इसके अलावा अनाज और भोजन का दान भी किया जा सकता है।

पूर्वजों के नाम से लें अच्छे काम का संकल्प

इस दिन पूर्वजों के नाम से किसी अच्छे काम की शुरुआत करने का संकल्प भी लिया जा सकता है। जैसे किसी गरीब बच्चे की पढ़ाई में मदद करना, जरूरतमंद व्यक्ति को आवश्यक वस्तु देना या पेड़ लगवाना। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सेवा और अच्छे कर्मों को भी पितरों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का माध्यम माना जाता है।

पितरों की शांति के लिए पूजा ही नहीं, सेवा भी जरूरी

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितरों को सम्मान देने के लिए केवल पूजा-पाठ ही जरूरी नहीं माना जाता। दान, सेवा, परिवार के बुजुर्गों का सम्मान और अच्छे कर्म भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। पितृदोष से जुड़ी अलग-अलग पूजा और अनुष्ठानों का विधान बताया गया है, लेकिन हर व्यक्ति के लिए बड़े और महंगे अनुष्ठान करना संभव नहीं होता।

ऐसे में अपनी क्षमता के अनुसार तर्पण, भोजन दान और जरूरतमंदों की सेवा की जा सकती है। सर्वपितृ अमावस्या को मुख्य रूप से पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर माना जाता है। छोटे-छोटे धार्मिक और सेवा कार्य भी इस दिन किए जा सकते हैं।

हालांकि, ये उपाय पितृ दोष को पूरी तरह समाप्त करने का दावा नहीं करते, बल्कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसके प्रभाव को कम करने और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने में सहायक माने जाते हैं।

Jai Jagdamba News Whatsapp

About the Author

Bhavna Kalyani

Founder & Editor, जय जगदम्बा न्यूज
View all articles by Bhavna Kalyani →