क्या आप जानते हैं मां दुर्गा के शेर का नाम? जानें कैसे बना शेर मां का वाहन और महिषासुर वध में उसकी भूमिका

Maa Durga Lion Story, Myth and Significance
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Maa Durga Lion Story: नवरात्रि के पावन पर्व पर मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। मां दुर्गा शक्ति, साहस, सुरक्षा और ममता का प्रतीक हैं। हिंदू धर्म में, हर देवी-देवता का एक वाहन यानी सवारी होती है, जैसे भगवान विष्णु गरुड़ पर, भगवान शिव नंदी पर और भगवान गणेश मूषक पर सवार होते हैं। वहीं, मां दुर्गा एक शक्तिशाली शेर की सवारी करती हैं, जो उनकी ताकत और निडरता का प्रतीक है।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मां दुर्गा के शेर का क्या नाम है? आखिर कैसे बना वह मां का वाहन? चलिए, आज हम आपको इसी रोचक सवाल का जवाब और इससे जुड़ी एक अनसुनी लोककथा के बारे में बताते हैं।

मां दुर्गा के शेर का क्या है नाम? (Maa Durga Lion Name)

बता दें कि मां दुर्गा के शेर का नाम सोमनंदी या डावन माना जाता है। मां दुर्गा और महिषासुर के युद्ध वाली प्रसिद्ध तस्वीर में, मां एक पैर महिषासुर के सिर पर और दूसरा पैर अपने शेर पर रखे हुए दिखाई देती हैं। इसी शेर का नाम सोमनंदी है। गौरतलब है कि कालिका पुराण के अनुसार, कुछ मान्यताओं में सोमनंदी को भगवान विष्णु का ही एक रूप भी माना जाता है।

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कैसे बना शेर मां दुर्गा का वाहन? (Myth behind Maa Durga Lion)

इस सवाल के जवाब में एक खास और कम ज्ञात लोककथा बहुत प्रचलित है। कहानी कुछ यूं है कि एक बार मां पार्वती गहरी तपस्या और आत्मज्ञान की खोज में एक घने जंगल में पहुंचीं। वहां एक शक्तिशाली शेर ने उन्हें देखा और भूख से बेकाबू होकर उन पर झपट्टा मारने की कोशिश की। हालांकि, मां की तपस्या के प्रभाव से एक अदृश्य ढाल ने उनकी रक्षा की और शेर उन तक पहुंच नहीं पाया।

खास बात यह है कि शेर ने हार नहीं मानी और मां के ध्यान से उठने का इंतजार करने लगा। इस बीच, भगवान शिव वहां पहुंच गए। जब मां पार्वती ने अपनी तपस्या पूरी की और आंखें खोलीं, तो उन्होंने शेर की दशा देखी। उसकी भूख और प्रतीक्षा से प्रभावित होकर, मां ने उसे माफ कर दिया और उस पर क्रोध करने की बजाय उसे अपने साथ ले लिया। कहा जाता है कि तभी से वह शेर मां का सबसे वफादार साथी और वाहन बन गया। यह कहानी मां की करुणा और क्षमा की शक्ति को दर्शाती है।

महिषासुर वध में शेर की अहम भूमिका

एक दूसरी मान्यता के अनुसार, जब महिषासुर के अत्याचार बढ़े और कोई भी देवता उसे पराजित नहीं कर पाया, तब सभी देवताओं की शक्तियों के मेल से मां दुर्गा का प्राकट्य हुआ। भगवान ब्रह्मा, विष्णु और शिव सहित सभी देवताओं ने मां को अपने-अपने अस्त्र-शस्त्र दिए और एक शक्तिशाली शेर उनका वाहन बना। इस शेर ने मां दुर्गा के साथ मिलकर महिषासुर की सेना का सामना किया और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक बना।

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मां दुर्गा की सवारी का आध्यात्मिक महत्व (Significance of Mata Ki Sawari)

मां दुर्गा का शेर पर सवार होना सिर्फ एक चित्रण नहीं है, बल्कि इसका गहरा आध्यात्मिक महत्व है। शेर शक्ति, साहस और निडरता का प्रतीक माना जाता है। मां का उस पर सवार होना यह दर्शाता है कि दैवीय शक्ति ने प्रकृति की इस raw energy और ताकत को नियंत्रित किया हुआ है। यह संदेश देता है कि सच्ची शक्ति वह है जो हिंसक प्रवृत्तियों पर नियंत्रण रखते हुए धर्म की रक्षा के लिए उपयोग में लाई जाए।

हालांकि, मां और उनके वाहन शेर की यह जोड़ी हमें यह सीख भी देती है कि डर का सामना करो और विश्वास रखो कि अंत में सत्य की ही जीत होती है। नवरात्रि में मां दुर्गा के इन्हीं गुणों की पूजा की जाती है ताकि हमारे अंदर भी साहस और धैर्य का संचार हो।

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