सरकारी हथियार फैक्ट्रियों पर बड़ा संकट, सेना से सिर्फ 10% मांग; 600 करोड़ से ज्यादा के नुकसान ने बढ़ाई चिंता

Small Arms Factories Crisis: सेना से सिर्फ 10% मांग, ₹641 करोड़ के स्टॉक से सरकारी हथियार फैक्ट्रियों पर बढ़ी चिंता
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Small Arms Factories Crisis: भारत की छोटी हथियार बनाने वाली सरकारी फैक्ट्रियों की स्थिति को लेकर संसद की रक्षा समिति ने गंभीर चिंता जताई है। कम ऑर्डर, बढ़ती उत्पादन लागत, हथियारों की गुणवत्ता संबंधी खामियां और बड़ी मात्रा में जमा स्टॉक इन फैक्ट्रियों के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 2015-16 से 2019-20 के बीच इन फैक्ट्रियों के हथियारों की कुल सप्लाई में सेना की हिस्सेदारी सिर्फ 10 प्रतिशत रही।

इसी अवधि में तीन फैक्ट्रियों में 12 चुने गए छोटे हथियारों पर कुल 366 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया था। हालांकि, हालिया रिकॉर्ड में AWEIL की वित्तीय स्थिति अलग तस्वीर दिखाती है। कंपनी ने 2023-24 में 20.24 करोड़ रुपये और 2024-25 में 82.74 करोड़ रुपये का PAT यानी कर के बाद मुनाफा दर्ज किया।

सेना से कम मांग ने बढ़ाई फैक्ट्रियों की परेशानी

संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट के अनुसार, 2015-16 से 2019-20 के बीच छोटी हथियार फैक्ट्रियों को अपने प्रमुख उत्पादों के लिए सेना से बहुत कम मांग मिली। इस अवधि में कुल हथियार सप्लाई में सेना की हिस्सेदारी केवल 10 प्रतिशत थी। मांग कम होने का सीधा असर फैक्ट्रियों की उत्पादन क्षमता पर पड़ा। तीनों फैक्ट्रियां बड़ी मात्रा में गृह मंत्रालय से मिलने वाले ऑर्डर पर निर्भर रहीं। लेकिन इन ऑर्डरों से भी तीनों फैक्ट्रियों की पूरी उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो पाया।

इसी समस्या को देखते हुए समिति ने रक्षा मंत्रालय से लंबी अवधि की मांग योजना बनाने की सिफारिश की है। इसमें सेना, गृह मंत्रालय, राज्य पुलिस बलों और AWEIL (Advanced Weapons and Equipment India Limited) को शामिल करने की बात कही गई है।

समिति का मानना है कि अगर आने वाले वर्षों की हथियार जरूरत का पहले से अनुमान लगाया जाए, तो ऑर्डर में अचानक कमी आने पर फैक्ट्रियों को लंबे समय तक खाली रहने से बचाया जा सकता है। साथ ही, उत्पादन क्षमता को वास्तविक मांग के हिसाब से तय करने पर भी विचार किया जाना चाहिए।

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बढ़ी उत्पादन लागत, पुराने आंकड़ों में 366 करोड़ का नुकसान

इन सरकारी फैक्ट्रियों के सामने उत्पादन लागत भी एक बड़ी समस्या रही है। रिपोर्ट के अनुसार,

ज्यादा ओवरहेड खर्च के कारण हथियारों की उत्पादन लागत बढ़ गई, जबकि उनकी सप्लाई कीमत वास्तविक लागत से कम थी। इसका असर पुराने वित्तीय आंकड़ों में साफ दिखाई देता है। 2015-16 से 2019-20 के बीच तीन फैक्ट्रियों में 12 चुने गए छोटे हथियारों पर कुल 366 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया था।

हालांकि, इसे AWEIL के हालिया वित्तीय प्रदर्शन के साथ जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उपलब्ध हालिया रिकॉर्ड के अनुसार, AWEIL ने वित्त वर्ष 2023-24 में 20.24 करोड़ रुपये और 2024-25 में 82.74 करोड़ रुपये का PAT (कर के बाद मुनाफा) दर्ज किया। वित्त वर्ष 2025-26 का अंतिम PAT उस समय उपलब्ध नहीं था, क्योंकि खातों को अंतिम रूप दिया जाना बाकी था।

समिति ने AWEIL की लागत को कम करने के लिए उसकी प्रति यूनिट उत्पादन लागत की तुलना निजी क्षेत्र की समान रक्षा कंपनियों से करने की सिफारिश की है। इससे सरकारी और निजी रक्षा निर्माताओं के बीच लागत के अंतर को समझने में मदद मिल सकती है।

समिति ने फैक्ट्रियों के लिए नए कारोबारी विकल्प तलाशने की सलाह भी दी है। इनमें खेल और शिकार के लिए इस्तेमाल होने वाली राइफल, गैर-घातक उपकरण और निजी रक्षा कंपनियों के लिए कंपोनेंट तैयार करना शामिल है।

हथियारों की गुणवत्ता और ₹641 करोड़ के स्टॉक पर भी सवाल

रक्षा समिति ने हथियारों की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता जताई है। फाइनल असेपटेन्स इन्स्पेक्शन के दौरान बैरल के अंदर चिप निकलने, फायरिंग की दर कम होने और ब्रीच ब्लॉक में खराबी जैसी समस्याएं सामने आई थीं। समिति ने उत्पादन के अंत में केवल अंतिम जांच करने के बजाय पूरी निर्माण प्रक्रिया के दौरान गुणवत्ता की निगरानी मजबूत करने की सिफारिश की है।

इसके लिए Quality Improvement Notes के पालन की निगरानी का भी मजबूत सिस्टम बनाने की जरूरत बताई गई है। फैक्ट्रियों में जमा स्टॉक भी समिति के लिए चिंता का विषय रहा है। 31 मार्च 2020 तक तीनों फैक्ट्रियों के पास 641 करोड़ रुपये का स्टॉक था। यह उनकी कुल उत्पादन लागत का 72 प्रतिशत था।

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इस स्टॉक में वर्क इन प्रोग्रेस इन्वेन्टरी  की हिस्सेदारी 56 प्रतिशत थी। 2015 से 2020 के बीच इसमें 102 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वहीं, स्टोर में मौजूद सामान ऑर्ड्नन्स फैक्ट्री बोर्ड की 135 दिनों की तय सीमा से 156 से 241 दिन तक अधिक था। समिति ने स्टॉक की स्थिति सुधारने के लिए बेहतर मांग अनुमान, नियमित स्टॉक वेरिफिकेशन और लागत से जुड़े प्रदर्शन मानकों को मजबूत करने की सिफारिश की है।

रक्षा समिति ने AWEIL की नई रिसर्च एंड डेवलपमेंट यानी R&D योजना का भी स्वागत किया है। कंपनी ने अपने संसाधनों का 2 से 3 प्रतिशत R&D पर खर्च करने का लक्ष्य रखा है। समिति चाहती है कि R&D के लिए बजटीय सहायता का एक हिस्सा अलग से तय किया जाए और परियोजनाओं की समय पर निगरानी हो।

रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों में पेश की जा चुकी है। अब रक्षा मंत्रालय के सामने इन फैक्ट्रियों की मांग, लागत, गुणवत्ता और स्टॉक प्रबंधन को बेहतर बनाने की चुनौती है। लंबे समय की मांग योजना, उत्पादन लागत में सुधार, बेहतर गुणवत्ता नियंत्रण और R&D पर ध्यान देकर इन फैक्ट्रियों को ज्यादा सक्षम और प्रतिस्पर्धी बनाने की कोशिश की जा सकती है।

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Veer Rai

Founder & Editor, जय जगदम्बा न्यूज

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