टाटा को मिला ₹1,577 करोड़ का बड़ा ऑर्डर, सेना को मिलेंगे 840 खतरनाक अटैक ड्रोन

Tata 1577 Crore Defence Order, सेना को मिलेंगे 840 ड्रोन
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Tata 1577 Crore Defence Order: भारतीय सेना की लंबी दूरी की मारक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। रक्षा मंत्रालय ने टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और निबे डिफेंस के साथ करीब ₹1,577 करोड़ का करार किया है। इस डील के तहत सेना को 840 स्वदेशी वन-वे अटैक ड्रोन मिलेंगे, जो 100 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक लक्ष्य को निशाना बनाने में सक्षम होंगे।

टाटा और निबे को कितने करोड़ का डिफेंस ऑर्डर मिला?

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के लिए लोइटरिंग मुनिशन सिस्टम, मुनिशन और उनसे जुड़ी जरूरी एक्सेसरीज की खरीद के लिए टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और निबे डिफेंस के साथ ₹1,577 करोड़ का डिफेंस ऑर्डर किया है। यह समझौता नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में हुआ। इस खरीद का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट की क्षमता को और मजबूत करना है।

इस ₹1,577 करोड़ की डील में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स को सबसे बड़ा हिस्सा मिला है। कंपनी करीब 64 प्रतिशत ऑर्डर की सप्लाई करेगी, जबकि बाकी हिस्सा निबे डिफेंस को मिलेगा। तकनीकी परीक्षण और मूल्यांकन के बाद जब व्यावसायिक बोली खोली गई, तो टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी रही। इसके बाद निबे डिफेंस का स्थान रहा।

यह डिफेंस डील ऐसे समय में हुई है जब युद्ध के तरीके तेजी से बदल रहे हैं। ड्रोन और लोइटरिंग मुनिशन आधुनिक सैन्य अभियानों का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं। ऐसे सिस्टम सेना को सुरक्षित दूरी से दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने की क्षमता देते हैं।

इन अटैक ड्रोन की क्या है खासियत?

इस करार के तहत भारतीय सेना को कुल 840 लॉन्ग-रेंज वन-वे अटैक ड्रोन मिलेंगे। इन ड्रोन को लोइटरिंग मुनिशन के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। इनकी सबसे बड़ी खासियत इनकी लंबी मारक क्षमता है। ये 100 किलोमीटर से अधिक दूरी तक जाकर लक्ष्य पर हमला कर सकते हैं।

इनका इस्तेमाल दुश्मन के ऐसे सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है, जो सीमा से काफी अंदर स्थित हों। खास तौर पर आर्टिलरी पोजीशन जैसे लक्ष्यों के खिलाफ ऐसे ड्रोन सेना के लिए उपयोगी हो सकते हैं।

इन सिस्टम को जामिंग और स्पूफिंग जैसी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध की चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। दुश्मन जामिंग के जरिए ड्रोन के संचार या नियंत्रण में बाधा डालने की कोशिश कर सकता है। वहीं स्पूफिंग के जरिए ड्रोन के नेविगेशन या सिस्टम को भ्रमित करने का प्रयास किया जा सकता है।

इन चुनौतियों के बीच ड्रोन की क्षमता जांचने के लिए कठिन परिस्थितियों में परीक्षण भी किए गए। परीक्षण के दौरान टेकऑफ के समय से ही जामिंग वाले वातावरण में इनके प्रदर्शन को परखा गया। इससे यह जांचने में मदद मिली कि इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप वाले माहौल में सिस्टम किस तरह काम करता है।

अगले 12 महीने में सेना को मिलेंगे ड्रोन

रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह भारतीय सेना के लिए फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया के तहत वन-वे अटैक ड्रोन की पहली बड़ी खरीद है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य जरूरी हथियारों और सैन्य उपकरणों की खरीद को तेजी से पूरा करना है। करार के मुताबिक अगले 12 महीनों के भीतर सेना को ये ड्रोन उपलब्ध कराने हैं।

फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया के तहत कंपनियों को करार के बाद अपेक्षाकृत कम समय में आपूर्ति शुरू करने की क्षमता रखनी होती है। रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्षों में ड्रोन के इस्तेमाल ने आधुनिक युद्ध में इनकी बढ़ती भूमिका को सामने रखा है।

कम लागत वाले ड्रोन भी महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। भारत भी इन बदलती जरूरतों को देखते हुए अपनी सेनाओं में आधुनिक ड्रोन सिस्टम को तेजी से शामिल कर रहा है।

‘बाय इंडियन’ से स्वदेशी रक्षा उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा

इस खरीद को ‘बाय इंडियन’ कैटेगरी के तहत किया जा रहा है। इसका मतलब है कि इस डील में देश के भीतर तैयार किए जाने वाले रक्षा उपकरणों और स्वदेशी क्षमता पर जोर दिया जा रहा है। रक्षा क्षेत्र में घरेलू निर्माण बढ़ाने से भारत की विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

सरकार भी आत्मनिर्भर भारत के तहत आधुनिक रक्षा उपकरणों का उत्पादन देश में बढ़ाने पर जोर दे रही है। टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और निबे डिफेंस को मिला यह ऑर्डर इसी दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है। वन-वे अटैक ड्रोन के क्षेत्र में सेना की जरूरतें केवल इस डील तक सीमित नहीं हैं। ऐसे कई अन्य सिस्टम की खरीद प्रक्रिया भी चल रही है।

इनमें 1,500 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक लक्ष्य पर हमला करने में सक्षम सिस्टम भी शामिल हैं। इस लिहाज से ₹1,577 करोड़ का यह करार सिर्फ 840 ड्रोन की खरीद नहीं है। यह भारतीय सेना की लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता को मजबूत करने के साथ देश में आधुनिक रक्षा उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

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Veer Rai

Founder & Editor, जय जगदम्बा न्यूज

Veer Rai जय जगदम्बा न्यूज के Founder और Editor हैं। उन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है। वे बिहार और देश-दुनिया से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों के साथ करियर, शिक्षा, नौकरी, राजनीति, धर्म, बिजनेस, टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जैसे विषयों पर गहन और शोध-आधारित लेख प्रकाशित करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सरल, स्पष्ट और विश्वसनीय भाषा में उपयोगी, तथ्यपरक और प्रमाणित जानकारी पहुंचाना है, जिससे लोग सही और जागरूक निर्णय ले सकें।

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