UP Panchayat Election 2026: OBC आयोग की रिपोर्ट पर हाईकोर्ट क्यों असंतुष्ट? 11 याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई, चुनाव पर नजरें

UP Panchayat Election 2026: यूपी पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट में सुनवाई
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UP Panchayat Election 2026: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव कब होंगे, इस मुद्दे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में शुक्रवार को काफी गर्मजोशी से बहस हुई। कुल ग्यारह याचिकाओं को एक साथ जोड़कर सुना गया। जजों ने OBC आयोग की रिपोर्ट पढ़कर खुलकर नाराजगी जताई। उनका साफ कहना था कि रिपोर्ट देखकर ऐसा महसूस हो रहा है जैसे पिछड़ेपन का असली आकलन गांवों में जाकर करने की जगह ऑफिस में बैठे-बैठे कागजी काम निपटा दिया गया हो। सुनवाई करीब सवा घंटे चली। कोर्ट ने रिपोर्ट तैयार करने की पूरी प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े किए और पक्षकारों से जवाब मांगा। अगली सुनवाई सोमवार, 12 अक्टूबर को रख दी गई है।

कोर्ट की टिप्पणी और रिपोर्ट पर उठे सवाल

प्रयागराज स्थित खंडपीठ के सामने जब मामला आया तो जजों ने साफ कहा कि अगर रिपोर्ट सिर्फ दफ्तर के आंकड़ों और सीमित लोगों के बयानों पर आधारित है तो वह जमीनी हकीकत नहीं बताती। उन्होंने पूछा कि आयोग ने फील्ड वर्क कितना किया, कितने गांवों तक पहुंचा और आंकड़े इकट्ठा करने का तरीका क्या रहा। कोर्ट की टिप्पणी थी कि जमीनी स्तर पर पिछड़ेपन का सही आकलन किए बिना जो रिपोर्ट तैयार की गई है, उसमें काम कागजी ज्यादा नजर आ रहा है। अदालत ने रिपोर्ट को फिलहाल रद्द नहीं किया, लेकिन असंतोष साफ दिखा। पक्षों को अपना पक्ष रखने और जरूरी दस्तावेज दाखिल करने को कहा गया।

पंचायत चुनाव समय पर कराने की मांग

याचिका कर्ताओं की मुख्य मांग यही रही है कि पंचायतों (UP Panchayat Election 2026) का पांच साल का संवैधानिक कार्यकाल खत्म हो चुका है, इसलिए चुनाव कार्यक्रम जल्द से जल्द जारी किया जाए। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग दोनों से पहले ही पूछा था कि आखिर चुनाव समय पर क्यों नहीं हो पा रहे। दोनों तरफ से जवाब दाखिल हो चुके हैं। अब उन्हीं जवाबों और आयोग की रिपोर्ट पर उठे सवालों के मद्देनजर सुनवाई आगे बढ़ रही है। कई याचिकाओं में चुनाव प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी करने और पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने के बाद की व्यवस्था को लेकर भी मुद्दे उठाए गए हैं। इन सभी को एक साथ जोड़कर सुना जा रहा है।

गुरुवार की सुनवाई और मामले का पिछला सफर

गुरुवार को भी करीब दो घंटे तक सुनवाई हुई थी। उस दिन याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने अपना पक्ष विस्तार से रखा था। अगले दिन शुक्रवार को फोकस ज्यादातर OBC आयोग की रिपोर्ट पर रहा। मामला कई बार टल चुका है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 3 अगस्त के बाद इस पर दोबारा सुनवाई शुरू हुई। पहले अप्रैल में ही एक याचिका को इम्तियाज हुसैन की पहले से लंबित याचिका के साथ जोड़ दिया गया था। उस समय न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ल की खंडपीठ थी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया था कि इसी मांग से जुड़ी दूसरी याचिका भी पेंडिंग है, जिसके बाद कोर्ट ने दोनों को साथ में सुनने का आदेश दे दिया।

इम्तियाज हुसैन की याचिका का कनेक्शन

इम्तियाज हुसैन की याचिका में मांग की गई थी कि राज्य निर्वाचन आयोग पंचायतों (UP Panchayat Election 2026) का कार्यकाल खत्म होने से पहले चुनाव का विस्तृत कार्यक्रम जारी करे। कोर्ट ने पहले भी आयोग से पूछा था कि वह संविधान के अनुच्छेद 243ई के अनुसार समय पर चुनाव कराने की स्थिति में है या नहीं। सरकार की तरफ से OBC आरक्षण तय करने के लिए आयोग की रिपोर्ट का इंतजार बताया जाता रहा है। इसी वजह से चुनाव कार्यक्रम अभी तक जारी नहीं हो पाया। अब कोर्ट इसी रिपोर्ट की गुणवत्ता और प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है।

सोमवार को क्या हो सकता है?

12 अक्टूबर को फिर सुनवाई होगी। पक्षों की दलीलें, सरकार और निर्वाचन आयोग के जवाब तथा OBC आयोग की रिपोर्ट पर उठे सवाल एक साथ सामने आएंगे। अभी तक किसी फाइनल तारीख या चुनाव टालने के साफ आदेश की पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल मामला सुनवाई के अधीन है। सबकी नजर सोमवार की कार्यवाही पर है कि कोर्ट आगे क्या निर्देश देता है और चुनाव की समयसीमा को लेकर स्थिति कितनी साफ होती है।

आगे की स्थिति

उत्तरप्रदेश पंचायत चुनाव की तैयारी और OBC आरक्षण दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। जब तक आयोग की रिपोर्ट पर अदालत संतुष्ट नहीं होती, तब तक चुनाव कार्यक्रम जारी करने में दिक्कत बनी रह सकती है। कोर्ट ने रिपोर्ट को खारिज तो नहीं किया, लेकिन उसकी प्रक्रिया पर जो सवाल उठाए हैं, उनसे साफ है कि आगे और सख्ती दिख सकती है। सोमवार की सुनवाई में अगर पक्षों के जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए तो कोर्ट और निर्देश दे सकता है। फिलहाल सब कुछ अगली तारीख पर निर्भर है।

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Adarsh Pandey

Founder & Editor, जय जगदम्बा न्यूज
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