भारत के ऊर्जा भंडार को लेकर सरकार का बड़ा खुलासा, जानिए कितना बचा है देश में तेल और गैस का स्टॉक

India Energy Reserves Update 2026: 60 Days Oil Stock and Fuel Saving Mission Explained
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India Energy Reserves Update 2026: भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है, जिसने पूरे देश का ध्यान खींच लिया है। सरकार ने साफ किया है कि मौजूदा समय में देश के पास पर्याप्त तेल, गैस और LPG भंडार मौजूद है, जिससे तत्काल किसी संकट की आशंका नहीं है। हालांकि, वैश्विक बाजार में बढ़ती अनिश्चितता को देखते हुए अब ईंधन बचत को एक राष्ट्रीय जिम्मेदारी के रूप में देखा जा रहा है। यही वजह है कि सरकार ने लोगों से समझदारी से ऊर्जा उपयोग की अपील की है।

भारत के तेल और गैस भंडार की मौजूदा स्थिति

केंद्र सरकार के मुताबिक भारत की ऊर्जा स्थिति अभी काफी मजबूत है। देश के पास करीब 60 दिन का कच्चा तेल भंडार, 60 दिन की प्राकृतिक गैस और लगभग 45 दिन का एलपीजी स्टॉक मौजूद है, यानी फिलहाल सप्लाई को लेकर किसी तरह की कमी की चिंता नहीं है।

इसके साथ ही देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी करीब 703 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो आर्थिक मजबूती को दिखाता है। यह जानकारी 5वीं अनौपचारिक मंत्रिसमूह बैठक के बाद सामने आई, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की।

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बैठक में यह भी बताया गया कि,

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल रिफाइनर और चौथा सबसे बड़ा पेट्रोलियम उत्पाद निर्यातक देश है।

हालांकि वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, लेकिन सरकार का साफ कहना है कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं है और सप्लाई पूरी तरह सामान्य बनी हुई है।

पेट्रोल-डीजल पर भारी बोझ, सरकार उठा रही है खर्च का बड़ा हिस्सा

सरकार ने माना है कि दुनिया भर में कच्चे तेल और ईंधन की कीमतें काफी बढ़ी हुई हैं, जिसका सीधा असर देश के बजट पर पड़ रहा है। हालांकि, इसके बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अभी तक स्थिर रखी गई हैं ताकि आम लोगों पर महंगाई का दबाव न बढ़े। इसके लिए ऑयल मार्केटिंग कंपनियां हर दिन करीब 1000 करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही हैं।

बताया जा रहा है कि,

वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही तक यह कुल घाटा लगभग 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जो एक बहुत बड़ा आर्थिक बोझ है। यह पैसा शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे जैसे जरूरी क्षेत्रों में इस्तेमाल हो सकता था, लेकिन फिलहाल यह खर्च उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए किया जा रहा है।

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हालांकि, सरकार इसे “अंडर-रिकवरी” यानी लागत और बिक्री कीमत के बीच का अंतर मानती है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार के दबाव की वजह से लगातार बढ़ रहा है।

ऊर्जा बचत को लेकर सरकार की बड़ी अपील

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के लोगों से साफ अपील की है कि पेट्रोल और डीजल की बचत को सिर्फ सलाह नहीं, बल्कि रोजमर्रा की आदत बना लिया जाए। उन्होंने कहा कि,

ज्यादा से ज्यादा लोग मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें, कारपूलिंग को अपनाएं और बिना जरूरत विदेश यात्रा से बचें ताकि देश का ईंधन और विदेशी मुद्रा दोनों बच सके।

इसके साथ ही किसानों से भी अपील की गई है कि रासायनिक खाद का कम इस्तेमाल करें और प्राकृतिक खेती की तरफ बढ़ें, साथ ही सौर ऊर्जा से चलने वाले सिंचाई पंप अपनाकर डीजल पर निर्भरता घटाई जाए।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कहा है कि,

सभी मंत्रालय और राज्य मिलकर ऊर्जा की बचत और जिम्मेदारी से इस्तेमाल को बढ़ावा दें।

सरकार का मानना है कि यह सिर्फ कुछ समय का कदम नहीं है, बल्कि लंबे समय की रणनीति है, जिसका मकसद देश को वैश्विक आपूर्ति संकट से सुरक्षित रखना और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना है।

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