प्रीति जिंटा को बड़ी कानूनी राहत, AI Deepfake और मॉर्फ्ड तस्वीरें हटाने का बॉम्बे हाई कोर्ट ने दिया आदेश

Preity Zinta AI Deepfake Case Bombay High Court Order
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बॉलीवुड अभिनेत्री प्रीति जिंटा को AI से तैयार की गई फर्जी तस्वीरों और डीपफेक कंटेंट के मामले में बड़ी राहत मिली है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अभिनेत्री की ओर से चिन्हित किए गए आपत्तिजनक डीपफेक, AI-जनरेटेड विजुअल्स और मॉर्फ्ड तस्वीरों को हटाने का निर्देश दिया है।

प्रीति जिंटा के पक्ष में बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला

बुधवार, 8 जुलाई को बॉम्बे हाई कोर्ट ने प्रीति जिंटा की याचिका (Preity Zinta AI Deepfake) पर सुनवाई करते हुए उनके पक्ष में अंतरिम आदेश पारित किया। अभिनेत्री ने अदालत से शिकायत की थी कि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर उनकी पहचान का दुरुपयोग करते हुए AI तकनीक से तैयार किए गए डीपफेक वीडियो, नकली तस्वीरें और मॉर्फ्ड इमेज साझा की जा रही हैं।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि इस तरह का कंटेंट किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व अधिकार (Personality Rights), प्रचार अधिकार (Publicity Rights), नैतिक अधिकार (Moral Rights) और निजता (Privacy) का उल्लंघन कर सकता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी प्लेटफॉर्म को ऐसे आपत्तिजनक कंटेंट की जानकारी दी जाती है, तो वह केवल मूक दर्शक बनकर नहीं रह सकता। उसे जिम्मेदारी के साथ आवश्यक कार्रवाई करनी होगी।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को क्या निर्देश दिए गए?

अदालत ने सभी संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि प्रीति जिंटा द्वारा अपनी याचिका में जिन आपत्तिजनक पोस्ट, तस्वीरों और लिंक की पहचान की गई है, उन्हें हटाया जाए। सुनवाई के दौरान Google और Meta की ओर से पेश वकीलों ने अदालत को बताया कि,

उन्हें चिन्हित किए गए URL हटाने पर कोई आपत्ति नहीं है। उन्हें हर नए कंटेंट की स्वतः निगरानी करने या पहले से ही सभी संभावित पोस्ट खोजने का निर्देश नहीं दिया जाना चाहिए।

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यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब AI आधारित डीपफेक तकनीक तेजी से विकसित हो रही है। विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि इस तकनीक का गलत इस्तेमाल किसी भी व्यक्ति की छवि और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में अदालत का यह आदेश डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Deepfake क्या होता है?

डीपफेक ऐसी तकनीक है जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से किसी व्यक्ति की तस्वीर, आवाज या वीडियो को इस तरह बदला जाता है कि वह पहली नजर में बिल्कुल असली दिखाई देता है। हाल के वर्षों में कई मशहूर हस्तियां इस तरह के फर्जी कंटेंट का शिकार हुई हैं।

ऐसे मामलों में न केवल प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचता है, बल्कि निजता और डिजिटल सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़े होते हैं। यही वजह है कि अदालतें और सरकारें भी ऐसे मामलों को गंभीरता से देख रही हैं।

अब फिल्म ‘बटवारा 1947’ में नजर आएंगी प्रीति जिंटा

कानूनी राहत मिलने के बीच प्रीति जिंटा अपनी अगली फिल्म ‘बटवारा 1947’ को लेकर भी चर्चा में हैं। इस पीरियड ड्रामा का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है, जबकि फिल्म का निर्माण आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले किया गया है। फिल्म में प्रीति जिंटा के साथ सनी देओल, शबाना आजमी और अली फजल भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे।

यह फिल्म भारत के विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित है और साहस, विस्थापन तथा संघर्ष की कहानी को दर्शाती है। पहले इसका नाम ‘लाहौर 1947’ रखा गया था, लेकिन बाद में बदलकर ‘बटवारा 1947’ कर दिया गया। फिल्म 14 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।

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बॉम्बे हाई कोर्ट का यह अंतरिम आदेश केवल प्रीति जिंटा के लिए राहत नहीं है, बल्कि AI आधारित डीपफेक और डिजिटल पहचान के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी संदेश भी देता है। बढ़ती AI तकनीक के दौर में यह फैसला ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी और लोगों की निजता की सुरक्षा पर नई चर्चा को आगे बढ़ा सकता है।

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Veer Rai

Founder & Editor, जय जगदम्बा न्यूज

Veer Rai जय जगदम्बा न्यूज के Founder और Editor हैं। उन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है। वे बिहार और देश-दुनिया से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों के साथ करियर, शिक्षा, नौकरी, राजनीति, धर्म, बिजनेस, टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जैसे विषयों पर गहन और शोध-आधारित लेख प्रकाशित करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सरल, स्पष्ट और विश्वसनीय भाषा में उपयोगी, तथ्यपरक और प्रमाणित जानकारी पहुंचाना है, जिससे लोग सही और जागरूक निर्णय ले सकें।

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