शेयर बाजार में F&O का खेल पड़ा भारी! 9 में से करीब 8 ट्रेडर्स हारे, ₹91,685 करोड़ का नुकसान

SEBI Study F&O Trading Losses FY26
1 min read

F&O Trading Losses FY26: भारत में ऑप्शन ट्रेडिंग करने वाले लाखों लोगों के लिए SEBI की नई स्टडी ने चिंता बढ़ाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं। FY26 में 87.7 प्रतिशत Individual Traders को नुकसान हुआ और कुल नुकसान ₹91,685 करोड़ रहा। खास बात यह है कि बाजार में सक्रिय ट्रेडर्स की संख्या घटने के बावजूद औसत नुकसान बढ़ गया।

SEBI की यह स्टडी 20 अगस्त 2026 को जारी हुई है और इसमें FY25-26 के दौरान Individual Traders के ट्रेडिंग व्यवहार, भागीदारी और मुनाफे-नुकसान का विश्लेषण किया गया है।

ट्रेडर्स घटे, नुकसान फिर भी बड़ा

SEBI की स्टडी के मुताबिक FY26 में सक्रिय Individual Traders की संख्या घटकर 87.5 लाख रह गई, जबकि FY25 में यह आंकड़ा 1.062 करोड़ था। यानी एक साल में सक्रिय ट्रेडर्स की संख्या करीब 18 प्रतिशत कम हुई। SEBI के अनुसार FY16 के बाद यह पहली बार है जब Individual Traders की भागीदारी में सालाना गिरावट दर्ज की गई।

नए ट्रेडर्स के बाजार में आने की रफ्तार भी कम हुई। FY25 में 34.3 लाख नए ट्रेडर्स F&O बाजार में शामिल हुए थे, जबकि FY26 में यह संख्या घटकर 20.8 लाख रह गई। वहीं करीब 46 लाख ट्रेडर्स ऐसे रहे, जिन्होंने बाजार छोड़ने के बाद दोबारा ट्रेडिंग शुरू नहीं की।

ट्रेडर्स की संख्या घटने के साथ कुल नुकसान में भी कमी आई। FY25 में Individual Traders का संशोधित कुल नुकसान करीब ₹1.12 लाख करोड़ था, जो FY26 में घटकर ₹91,685 करोड़ रह गया। यानी कुल नुकसान करीब 18 प्रतिशत कम हुआ।

ये भी पढ़ें: चंद्रशेखरन के एक फैसले से टाटा ग्रुप को बड़ा झटका, एक दिन में ₹46,000 करोड़ डूबे

हालांकि औसत नुकसान का आंकड़ा अलग तस्वीर दिखाता है। FY26 में प्रति ट्रेडर औसत नुकसान करीब ₹1.17 लाख रहा, जबकि FY25 में यह ₹1.13 लाख था। यानी सक्रिय रहने वाले ट्रेडर्स के लिए औसत नुकसान करीब 2 प्रतिशत बढ़ गया।

FY26 में कुल 87.7 प्रतिशत Individual Traders नुकसान में रहे। हालांकि यह FY25 के 90.9 प्रतिशत से कम है, लेकिन इसका मतलब अब भी यही है कि हर 100 में करीब 88 ट्रेडर्स को F&O Trading में घाटा हुआ।

Options में क्यों डूबा पैसा?

F&O बाजार में सबसे ज्यादा नुकसान Options Trading से जुड़ा रहा। FY26 में Individual Traders के कुल नुकसान का करीब 92 प्रतिशत हिस्सा Options से आया। करीब 23 प्रतिशत ट्रेडर्स ने Options में हुए लगभग 90 प्रतिशत नुकसान में योगदान दिया। Options में ट्रेडिंग करने वालों की संख्या भी Futures के मुकाबले बहुत ज्यादा रही।

करीब 99.3 प्रतिशत Individual Traders ने FY26 में कम से कम एक बार Options में ट्रेड किया, जबकि लगभग 93 प्रतिशत ट्रेडर्स केवल Options में ही सक्रिय रहे। इसके मुकाबले Futures में हिस्सा लेने वाले ट्रेडर्स की संख्या करीब 6.6 प्रतिशत रही। नुकसान की दर भी Options में ज्यादा रही।

करीब 87.7 प्रतिशत Options Traders को नुकसान हुआ, जबकि Futures में नुकसान उठाने वाले ट्रेडर्स की दर करीब 66 प्रतिशत रही। नुकसान उठाने वाले ट्रेडर्स को औसतन करीब ₹1.47 लाख का नुकसान हुआ। इसके मुकाबले मुनाफा कमाने वाले ट्रेडर्स का औसत लाभ करीब ₹1.22 लाख रहा। यानी नुकसान की औसत रकम, औसत मुनाफे से करीब 21 प्रतिशत ज्यादा रही।

SEBI की स्टडी के मुताबिक करीब 97 प्रतिशत ट्रेडर्स मुख्य रूप से Options Buying की रणनीति अपनाते हैं, जबकि लगभग 2 प्रतिशत ट्रेडर्स मुख्य रूप से Options Selling करते हैं। स्टडी में यह भी पाया गया कि Trading Intensity बढ़ने के साथ नुकसान की दर भी बढ़ी। इसका असर खास तौर पर युवा, कम आय वाले और छोटे Equity Portfolio रखने वाले ट्रेडर्स में ज्यादा दिखाई दिया।

युवा और छोटे शहरों की बढ़ी भागीदारी

F&O Trading अब केवल बड़े शहरों और अनुभवी निवेशकों तक सीमित नहीं रही। FY26 में 30 साल से कम उम्र के ट्रेडर्स की हिस्सेदारी 43 प्रतिशत रही, जो FY22 में 31 प्रतिशत थी। लेकिन इस युवा वर्ग के करीब 89 प्रतिशत ट्रेडर्स को नुकसान हुआ। सालाना ₹5 लाख से कम कमाने वाले ट्रेडर्स कुल Individual Participants के करीब तीन-चौथाई थे।

उन्होंने कुल Trading Turnover में लगभग 43 प्रतिशत हिस्सा दिया, लेकिन कुल नुकसान में उनकी हिस्सेदारी करीब 53 प्रतिशत रही। Top 30 शहरों के बाहर रहने वाले ट्रेडर्स भी अब Individual Participants का करीब दो-तिहाई हिस्सा हैं। इनका कुल Turnover में योगदान लगभग आधा रहा। इससे पता चलता है कि Derivatives Trading अब देश के बड़े वित्तीय केंद्रों से आगे बढ़कर छोटे शहरों तक पहुंच चुकी है।

ये भी पढ़ें: बिहार में सोशल मीडिया क्रिएटर्स की बल्ले-बल्ले! अब वीडियो बनाने पर मिलेंगे 1 लाख रुपये, सरकार ने बदले नियम

बड़े खिलाड़ी रहे फायदे में

Individual Traders के मुकाबले Proprietary Trading Firms और Foreign Portfolio Investors का प्रदर्शन अलग रहा। Proprietary Trading Firms ने करीब ₹44,000 करोड़ का Gross Profit कमाया। इसके बाद FPIs ने करीब ₹14,000 करोड़ और Corporates ने लगभग ₹8,000 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया।

आंकड़ाFY26 की स्थिति
Proprietary Trading Firms का Gross Profitकरीब ₹44,000 करोड़
FPIs का Profitकरीब ₹14,000 करोड़
Corporates का Profitकरीब ₹8,000 करोड़
FPIs और Proprietary Trading Desks के Profit में Algorithmic Trading का योगदानकरीब 99%
F&O Transaction Costsकरीब ₹25,000 करोड़
F&O Turnover में बदलावकरीब 5% की कमी
Securities Transaction Tax Collections35% की बढ़ोतरी
Brokerage Costsकमी आई

F&O बाजार में Transaction Costs करीब ₹25,000 करोड़ पर बनी रही, जबकि कुल Turnover में लगभग 5 प्रतिशत की कमी आई। Brokerage Costs घटने के बावजूद Securities Transaction Tax Collections में 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

नियमों के बाद भी नुकसान जारी

SEBI की ओर से नवंबर 2024 में लागू किए गए उपायों के बाद Index Options में भागीदारी में शुरुआत में तेज गिरावट आई। हालांकि बाद में F&O Turnover में मजबूत रिकवरी देखने को मिली। SEBI ने साफ किया कि इन आंकड़ों से केवल संबंध दिखाई देता है। इससे यह साबित नहीं होता कि ट्रेडर्स की संख्या में गिरावट सिर्फ नियामकीय उपायों के कारण हुई।

लगातार नुकसान के बावजूद बड़ी संख्या में ट्रेडर्स F&O बाजार में बने रहे। करीब 90 प्रतिशत ऐसे ट्रेडर्स, जिन्हें लगातार दो वर्षों तक नुकसान हुआ और उन्होंने ट्रेडिंग जारी रखी, उन्हें अगले साल भी नुकसान हुआ। वहीं करीब 85 प्रतिशत Trader-Quarter Observations नुकसान वाले रहे।

FY26 के आंकड़े F&O Trading की एक अहम तस्वीर सामने रखते हैं। ट्रेडर्स की संख्या भले ही कम हुई हो, लेकिन Individual Traders के लिए नुकसान का जोखिम अभी भी बहुत ज्यादा है। खासकर Options Trading में लगातार और ज्यादा ट्रेडिंग करना मुनाफे की गारंटी नहीं है।

Jai Jagdamba News Whatsapp

About the Author

Veer Rai

Founder & Editor, जय जगदम्बा न्यूज

Veer Rai जय जगदम्बा न्यूज के Founder और Editor हैं। उन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है। वे बिहार और देश-दुनिया से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों के साथ करियर, शिक्षा, नौकरी, राजनीति, धर्म, बिजनेस, टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जैसे विषयों पर गहन और शोध-आधारित लेख प्रकाशित करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सरल, स्पष्ट और विश्वसनीय भाषा में उपयोगी, तथ्यपरक और प्रमाणित जानकारी पहुंचाना है, जिससे लोग सही और जागरूक निर्णय ले सकें।

View all articles by Veer Rai →