20 अरब डॉलर की बिकवाली के बाद बदला FII का मूड, भारतीय बाजार के इन 5 सेक्टरों में लगाया सबसे बड़ा दांव
Indian Market FII Investment July 2026: करीब 20 अरब डॉलर की बिकवाली के बाद विदेशी निवेशकों (FII) ने अचानक भारतीय शेयर बाजार में जोरदार वापसी की है। जुलाई के पहले 15 दिनों में उन्होंने करीब 3 अरब डॉलर का निवेश किया। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर उनका पैसा किन सेक्टरों में जा रहा है और किन सेक्टरों से वे अब भी दूरी बनाए हुए हैं?
FII ने जुलाई 2026 में किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा निवेश किया?
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने जुलाई के पहले पखवाड़े तक करीब 3 अरब डॉलर यानी लगभग 25 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश (Indian Market FII Investment July 2026) किया है। इससे पहले वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान वे करीब 20 अरब डॉलर की बिकवाली कर चुके थे।
NSDL के आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा खरीदारी वित्तीय सेवाओं (Financial Services) में हुई। इस सेक्टर में 16,609 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया। इसके बाद कंज्यूमर सर्विसेज में 10,442 करोड़ रुपये, हेल्थकेयर में 5,536 करोड़ रुपये, सर्विसेज सेक्टर में 4,997 करोड़ रुपये और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 4,948 करोड़ रुपये का निवेश आया।
हालांकि विदेशी निवेशकों की यह वापसी पूरे बाजार में समान नहीं रही। ऑटो सेक्टर से 8,260 करोड़ रुपये की निकासी हुई। इसके अलावा पावर सेक्टर से 5,010 करोड़ रुपये, कैपिटल गुड्स से 4,099 करोड़ रुपये, टेलीकॉम से 3,174 करोड़ रुपये और ऑयल एंड गैस सेक्टर से 2,531 करोड़ रुपये निकाले गए।
| सेक्टर | निवेश |
|---|---|
| Financial Services | ₹16,609 करोड़ |
| Consumer Services | ₹10,442 करोड़ |
| Healthcare | ₹5,536 करोड़ |
| Services | ₹4,997 करोड़ |
| Consumer Durables | ₹4,948 करोड़ |
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क्यों चुनिंदा सेक्टरों में ही बढ़ा विदेशी निवेश?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों की यह खरीदारी अभी लंबी अवधि की रणनीति नहीं बल्कि परिस्थितियों के अनुसार किया गया निवेश है। एक्सिस डायरेक्ट के रिसर्च प्रमुख राजेश पलविया के अनुसार,
वैश्विक मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता, विकसित देशों के बाजारों का आकर्षण और भारतीय शेयरों के पहले ऊंचे वैल्यूएशन जैसी वजहों से विदेशी निवेशक अभी भी सतर्क हैं।
हालांकि भारत के वैल्यूएशन प्रीमियम में कमी आने के बाद विदेशी निवेशकों की बिकवाली धीमी हुई है। वहीं घरेलू कारोबार वाले सेक्टरों में बेहतर कमाई की उम्मीद ने बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और फार्मा कंपनियों को निवेशकों के लिए आकर्षक बनाया है।
जून के दूसरे पखवाड़े में वित्तीय सेवाओं में 14,634 करोड़ रुपये का निवेश आया था, लेकिन जुलाई के पहले 15 दिनों में यह घटकर 1,975 करोड़ रुपये रह गया। दूसरी ओर कंज्यूमर सर्विसेज में निवेश 3,081 करोड़ रुपये से बढ़कर 7,361 करोड़ रुपये पहुंच गया। हेल्थकेयर सेक्टर में भी निवेश बढ़कर 4,101 करोड़ रुपये हो गया।
IT और FMCG शेयरों से FII ने क्यों निकाला पैसा?
विदेशी निवेशकों ने इस दौरान आईटी सेक्टर में खास दिलचस्पी नहीं दिखाई। पूरे महीने में आईटी शेयरों से 673 करोड़ रुपये की निकासी हुई। FMCG सेक्टर से भी 1,580 करोड़ रुपये का पैसा बाहर निकला। इससे साफ है कि भारतीय उपभोक्ता बाजार में निवेश भी चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित रहा।
SAMCO म्यूचुअल फंड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विराज गांधी का कहना है कि,
निजी बैंक फिलहाल सबसे आकर्षक अवसरों में शामिल हैं। कम वैल्यूएशन, बेहतर रिटर्न ऑन इक्विटी, तेज क्रेडिट ग्रोथ और कम एनपीए इस सेक्टर को मजबूत बनाते हैं।
वहीं मेटल सेक्टर में जुलाई के पहले 15 दिनों में 5,993 करोड़ रुपये का निवेश आया, हालांकि पिछले पखवाड़े की बिकवाली के कारण पूरे महीने का शुद्ध निवेश केवल 1,622 करोड़ रुपये रहा। निर्माण, रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन से जुड़े सेक्टरों में भी विदेशी निवेश देखने को मिला।
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AI ट्रेड से भारत को कैसे फायदा मिल रहा है?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले एक साल में विदेशी निवेशकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों में बड़े पैमाने पर निवेश किया था। खासकर ताइवान और दक्षिण कोरिया की चिप और मेमोरी बनाने वाली कंपनियों में काफी पैसा लगाया गया। अब इन शेयरों में मुनाफावसूली बढ़ने लगी है, जिससे विदेशी निवेशक नए निवेश के अवसर तलाश रहे हैं।
इसी वजह से भारत जैसे बाजारों की ओर उनका रुख बढ़ता दिखाई दे रहा है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा पूरी तरह लौट आया है। फिलहाल उनकी खरीदारी बैंकिंग, हेल्थकेयर और घरेलू खपत (Consumer) से जुड़े चुनिंदा सेक्टरों तक सीमित है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आने वाले महीनों में कंपनियों के नतीजे मजबूत रहे, वैश्विक आर्थिक माहौल स्थिर बना रहा और रुपये में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं हुआ, तो भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेश और बढ़ सकता है।
