धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद बड़ा फैसला, शिक्षा मंत्रालय की कमान अब प्रल्हाद जोशी के हाथों में

Pralhad Joshi Education Minister: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रल्हाद जोशी को मिली शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी
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देश में NEET-UG परीक्षा को लेकर चल रहे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को उनके मौजूदा मंत्रालयों के साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सरकार का बड़ा फैसला

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया। सरकार की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत यह इस्तीफा मंजूर किया गया है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार (Pralhad Joshi Education Minister) दिया गया है। वह पहले से ही उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अब इन मंत्रालयों के साथ शिक्षा मंत्रालय का काम भी उनके पास रहेगा।

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कौन हैं प्रल्हाद जोशी?

प्रल्हाद वेंकटेश जोशी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। वह फिलहाल केंद्र सरकार में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री हैं। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद उन्हें फिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में जगह मिली थी।

प्रल्हाद जोशी पांच बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं। उनका जन्म नवंबर 1962 में कर्नाटक के एक पारंपरिक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उन्होंने वर्ष 2004 में पहली बार लोकसभा चुनाव जीतकर राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखा। शुरुआती दिनों में उनका जुड़ाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से रहा और बाद में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी में अपनी मजबूत पहचान बनाई।

NEET-UG पेपर लीक विवाद के दौरान भी प्रल्हाद जोशी ने परीक्षा प्रणाली में सुधार की जरूरत पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और भविष्य में तकनीक आधारित परीक्षा व्यवस्था लागू करने की दिशा में काम किया जा रहा है। उनके अनुसार ऐसे सुधारों में समय लगता है और इन्हें चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

क्यों दिया धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा?

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब NEET-UG पेपर लीक और अन्य परीक्षा अनियमितताओं को लेकर देश के कई हिस्सों में छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी था। इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बढ़ रहा था।

धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए अपने पत्र में कहा कि,

उन्होंने छात्रों के भविष्य और देश के हित को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपा है। वह चाहते हैं कि छात्र कानूनी विवादों में न उलझें और अपनी पढ़ाई तथा करियर पर पूरा ध्यान दे सकें। देश में चल रहे हालात का फायदा देश विरोधी तत्वों को नहीं मिलना चाहिए।

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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घोषणा के कुछ घंटे बाद सरकार और CJP के बीच संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। इसमें बताया गया कि अभिजीत दिपके के नेतृत्व वाले संगठन ने अपना आंदोलन समाप्त करने का फैसला किया है, क्योंकि केंद्र सरकार ने उनकी सभी मांगों पर सहमति जताई है।

शिक्षा मंत्रालय की कमान अब प्रल्हाद जोशी के हाथों में आने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परीक्षा सुधार, पारदर्शिता और तकनीक आधारित परीक्षा प्रणाली जैसे मुद्दों पर सरकार किस तरह आगे बढ़ती है।

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