6 साल बाद फिर शुरू हुआ भारत-चीन सीमा व्यापार, जानिए किन सामानों का होगा सौदा और क्या हैं नए नियम?

India-China Border Trade: भारत और चीन के बीच करीब छह साल से बंद पड़ा पारंपरिक सीमा व्यापार आखिरकार फिर शुरू हो गया है। उत्तराखंड के लिपुलेख और हिमाचल प्रदेश के शिपकी ला दर्रे से व्यापारिक गतिविधियों की दोबारा शुरुआत हुई है। इससे सीमावर्ती इलाकों के व्यापारियों में नई उम्मीद जगी है।
6 साल बाद फिर शुरू हुआ भारत-चीन सीमा व्यापार
कोविड-19 महामारी के बाद से बंद पड़े भारत-चीन के पारंपरिक सीमा व्यापार को शनिवार से फिर शुरू कर दिया गया। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित लिपुलेख दर्रे और हिमाचल प्रदेश के शिपकी ला दर्रे के जरिए व्यापारिक गतिविधियां दोबारा शुरू हुई हैं। ये दोनों मार्ग हिमालयी क्षेत्रों के पुराने व्यापारिक रास्तों में शामिल हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
लिपुलेख में पहले दिन 16 भारतीय व्यापारी और उनके साथ चार सहयोगी तिब्बत के लिए रवाना हुए। शुरुआती चरण में वे अपने साथ कोई सामान नहीं ले गए। अधिकारियों के अनुसार, चीन की ओर से तकलाकोट व्यापार केंद्र में सीमित सुविधाओं का हवाला देते हुए पहले दल में केवल 20 लोगों को ही अनुमति दी गई।
चीनी प्रशासन ने पहले से सभी व्यापारियों की विस्तृत व्यक्तिगत जानकारी भी मांगी थी। साथ ही उन व्यापारियों को प्राथमिकता देने को कहा गया, जिन्होंने वर्ष 2019 के अंतिम व्यापार सत्र में हिस्सा लिया था।
2019 के व्यापारियों को क्यों दी गई प्राथमिकता?
धारचूला के उप जिलाधिकारी और जिला व्यापार अधिकारी आशीष जोशी ने बताया कि पहले दल के लिए उन्हीं व्यापारियों का चयन किया गया, जिन्होंने वर्ष 2019 के अंतिम व्यापार सत्र में हिस्सा लिया था। इनमें वे व्यापारी भी शामिल हैं, जिनका सामान वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के कारण सीमा व्यापार बंद होने के बाद तिब्बत के तकलाकोट व्यापार केंद्र में ही फंस गया था। ऐसे व्यापारियों को पहले अवसर देने का फैसला लिया गया ताकि उनका लंबित व्यापार आगे बढ़ सके।
वहीं, हिमाचल प्रदेश के शिपकी ला दर्रे से भी 16 भारतीय व्यापारियों का पहला दल तिब्बत के लिए रवाना हुआ। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने इस दल को हरी झंडी दिखाकर विदा किया। व्यापारी घोड़ों के जरिए शिपकी गांव की ओर रवाना हुए।
हालांकि सीमा व्यापार को 1 जून से शुरू करने की योजना थी, लेकिन दोनों देशों की ओर से सुरक्षा संबंधी तैयारियों और व्यापार केंद्रों पर आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के अधूरे होने के कारण इसकी शुरुआत में लगभग दो महीने की देरी हुई।
भारत और चीन के बीच किन वस्तुओं का होगा आदान-प्रदान?
शिपकी ला के जरिए होने वाला व्यापार 30 नवंबर तक जारी रहेगा और यह पारंपरिक बार्टर यानी वस्तु विनिमय प्रणाली के तहत होगा। भारतीय व्यापारियों को सीमा पार अधिकतम 72 घंटे तक रुकने की अनुमति दी गई है। गृह विभाग ने सत्यापन के बाद 53 व्यापारियों को व्यापार के लिए मंजूरी दी है।
भारतीय व्यापारी सूखे मेवे, मसाले, हस्तशिल्प उत्पाद और जड़ी-बूटियों समेत 36 श्रेणियों के सामान का निर्यात कर सकेंगे। वहीं चीन की ओर से पश्मीना, ऊन, याक के बाल, भेड़ और बकरी की खाल तथा चाइना क्ले सहित 20 श्रेणियों के उत्पाद भारत लाए जा सकेंगे। अधिकारियों के अनुसार भारतीय पक्ष के लिए कुल 72 और चीनी पक्ष के लिए 30 प्रकार के व्यापारिक सामान की सूची तैयार की गई है।
इस मौके पर हिमाचल प्रदेश के नामग्या गांव में करीब 1.7 करोड़ रुपये की लागत से बने छुप्पन ट्रेड मार्ट का भी उद्घाटन किया गया। यह केंद्र सीमा व्यापार को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
स्थानीय व्यापारियों ने व्यापार योग्य वस्तुओं की सूची बढ़ाने की मांग भी रखी। इस पर राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और विदेश मंत्रालय के समक्ष रखा जाएगा।
सीमा व्यापार की दोबारा शुरुआत से उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापार और रोजगार को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि दोनों देशों के बीच व्यापार फिलहाल तय नियमों और सीमित संख्या में व्यापारियों के साथ चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।




