Ola Electric को राहत या नई चिंता? घाटा घटा, लेकिन कमाई 45% गिरी, बाजार हिस्सेदारी भी फिसली

Ola Electric Q1 Results 2026: कभी इलेक्ट्रिक स्कूटर बाजार की सबसे बड़ी कंपनी रही Ola Electric अब मुश्किल दौर से गुजर रही है। जून तिमाही में कंपनी का घाटा जरूर कम हुआ, लेकिन कमाई 45 फीसदी गिर गई और बाजार हिस्सेदारी भी लगातार घट रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कंपनी वापसी कर पाएगी?
घाटा कम हुआ, लेकिन कमाई और बिक्री में बड़ी गिरावट
Ola Electric ने जून 2026 तिमाही में 336 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी का घाटा 428 करोड़ रुपये था। यानी इस बार कंपनी का नुकसान कम हुआ है। हालांकि, इसका सबसे बड़ा कारण परिचालन खर्च में कमी रही।
दूसरी ओर कंपनी की कमाई में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। संचालन से मिलने वाला राजस्व 455 करोड़ रुपये रहा, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 828 करोड़ रुपये था। यानी कंपनी की आय में लगभग 45 प्रतिशत की कमी आई।
वाहनों की बिक्री भी घटकर 39,192 यूनिट रह गई। पिछले साल जून तिमाही में कंपनी ने 68,192 वाहन बेचे थे। हालांकि, यह आंकड़ा पिछली मार्च तिमाही के 20,256 वाहनों से बेहतर रहा।
दिलचस्प बात यह है कि इस दौरान नए ऑर्डर बढ़े हैं। जून तिमाही में कंपनी को 44,071 वाहनों के ऑर्डर मिले, जबकि मार्च तिमाही में यह संख्या 22,522 थी। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले महीनों में बिक्री में सुधार की उम्मीद की जा सकती है।
Ola Electric ने खर्च कम करने के लिए क्या कदम उठाए?
Ola Electric का कहना है कि,
पिछले वित्तीय वर्ष में कंपनी ने अपने कारोबार को बेहतर बनाने के लिए कई बड़े बदलाव किए। कंपनी ने संगठन में बदलाव किए, काम करने के तरीके को अधिक प्रभावी बनाया और गैर-जरूरी खर्चों में कटौती की।
CEO भाविश अग्रवाल के मुताबिक,
जून 2026 तिमाही पहली ऐसी अवधि थी जिसमें इन सभी बदलावों का पूरा असर देखने को मिला। इन्हीं कदमों का असर कंपनी के वित्तीय नतीजों में भी दिखा। जून तिमाही में परिचालन खर्च सालाना आधार पर 35 प्रतिशत घटकर 333 करोड़ रुपये रह गया। इससे परिचालन घाटा भी 237 करोड़ रुपये से घटकर 165 करोड़ रुपये पर आ गया।
हालांकि कंपनी की कमाई और वाहन बिक्री में गिरावट बनी रही, लेकिन लागत नियंत्रण की वजह से कुल शुद्ध घाटा पिछले साल की तुलना में कम हुआ। कंपनी के कुल खर्च में एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) PLI योजना से जुड़े 57 करोड़ रुपये के जुर्माने की एक बार की रिवर्सल का भी फायदा मिला।
इसके अलावा सकल मार्जिन बढ़कर 30.5 प्रतिशत हो गया, जो एक साल पहले 25.8 प्रतिशत था। हालांकि परिचालन EBITDA मार्जिन अभी भी नकारात्मक 42.8 प्रतिशत पर बना हुआ है, जिससे साफ है कि कंपनी को मुनाफे में लौटने के लिए अभी और सुधार की जरूरत होगी।
Ola Electric का फोकस अब LFP बैटरी और लागत घटाने पर
Ola Electric अब अपनी भविष्य की रणनीति में LFP (लिथियम आयरन फॉस्फेट) बैटरी पर ज्यादा जोर दे रही है। कंपनी का कहना है कि NMC बैटरी की तुलना में LFP बैटरी कम लागत वाली है, जिससे मुनाफा बढ़ाने में मदद मिलेगी।
कंपनी के CEO भाविश अग्रवाल ने बताया कि,
NMC आधारित Shakti बैटरी उम्मीद के मुताबिक बेहतर ग्रॉस मार्जिन नहीं दे सकी। इसी वजह से कंपनी अब इस तकनीक का विस्तार नहीं करेगी और LFP आधारित Shakti बैटरी को प्राथमिकता देगी।
आने वाले समय में Ola Electric के लगभग सभी ऑटो उत्पाद LFP बैटरी के साथ आएंगे, जबकि केवल करीब 20 प्रतिशत प्रीमियम और हाई-परफॉर्मेंस मॉडल में NMC बैटरी का इस्तेमाल जारी रहेगा।
इसके अलावा कंपनी ने बताया कि उसकी,
6 गीगावाट-घंटे क्षमता वाली गीगाफैक्ट्री सितंबर तक चालू होने की उम्मीद है। भविष्य में पूंजीगत खर्च 30 से 50 करोड़ रुपये के बीच रहने का अनुमान है। वहीं जून महीने में कंपनी ने क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) के जरिए 780 करोड़ रुपये भी जुटाए हैं।
बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच सर्विस बिजनेस पर भी बड़ा दांव
Ola Electric का मानना है कि जैसे-जैसे उसके ग्राहकों की संख्या बढ़ेगी, सर्विस बिजनेस भी कंपनी के लिए लगातार कमाई का मजबूत स्रोत बन सकता है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2027-28 तक सर्विस कारोबार से लगभग 400 से 500 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि कंपनी के सामने चुनौतियां अभी भी कम नहीं हैं।
पिछले एक साल में Ola Electric की बिक्री और बाजार हिस्सेदारी लगातार घटी है। TVS Motor, Bajaj Auto, Ather Energy और Hero MotoCorp जैसी कंपनियां मासिक बिक्री में Ola Electric से आगे निकल चुकी हैं। वाहन पंजीकरण के आंकड़ों के अनुसार कंपनी की बाजार हिस्सेदारी 2024 में 36.7 प्रतिशत थी, जो 2025 में घटकर 16.1 प्रतिशत और जुलाई 2026 में केवल 6.9 प्रतिशत रह गई।
ऐसे में आने वाली तिमाहियों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि लागत नियंत्रण, नई बैटरी रणनीति और सर्विस बिजनेस पर किया गया दांव कंपनी को दोबारा मजबूत स्थिति में पहुंचा पाता है या नहीं।




