टेलीकॉम सेक्टर में PLI का बड़ा असर, ₹5,200 करोड़ से ज्यादा निवेश, 32,500 लोगों को मिला रोजगार

Telecom PLI Scheme: ₹5,200 करोड़ निवेश, ₹1.1 लाख करोड़ की बिक्री और 32,500 नौकरियां
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भारत के टेलीकॉम सेक्टर में सरकार की PLI योजना ने चार साल में बड़ा असर दिखाया है। दूरसंचार विभाग के मुताबिक, योजना के तहत अब तक ₹5,200 करोड़ से ज्यादा का निवेश आया है और कंपनियों की कुल बिक्री करीब ₹1.1 लाख करोड़ पहुंच गई है। इसमें ₹23,500 करोड़ से ज्यादा का निर्यात भी शामिल है। वहीं, फरवरी 2026 तक इस योजना से करीब 32,500 लोगों को रोजगार मिला है और 10 राज्यों में 22 नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित की गई हैं।

टेलीकॉम PLI से ₹1.1 लाख करोड़ की बिक्री

दूरसंचार और नेटवर्किंग उत्पादों के लिए शुरू की गई PLI योजना (Telecom PLI Scheme) का कुल बजट ₹12,195 करोड़ रखा गया था। दूरसंचार विभाग ने संचार और सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ी संसदीय समिति को बताया कि फरवरी 2026 तक इस योजना के तहत ₹5,200 करोड़ से अधिक का निवेश आकर्षित हुआ है।

इस दौरान कंपनियों की कुल बिक्री करीब ₹1.1 लाख करोड़ तक पहुंच गई। इसमें ₹23,500 करोड़ से ज्यादा का सामान दूसरे देशों को निर्यात किया गया। इससे यह संकेत मिलता है कि भारत में टेलीकॉम उपकरणों का उत्पादन केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय कंपनियां और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स विदेशी बाजारों में भी पहुंच बना रही हैं।

योजना के तहत फरवरी 2026 तक करीब 32,500 लोगों को रोजगार मिला। पिछले चार वर्षों में 10 राज्यों में 22 नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स भी स्थापित की गई हैं। इससे पहले समिति के सामने दिए गए आंकड़ों में कुल बिक्री ₹1,03,859 करोड़, निर्यात ₹21,898 करोड़ और रोजगार करीब 29,000 लोगों का बताया गया था। नए आंकड़ों में इन सभी क्षेत्रों में बढ़ोतरी दिखाई देती है।

फंड जारी करने की रफ्तार पर उठे सवाल

हालांकि PLI योजना से बिक्री, निर्यात और रोजगार में अच्छी प्रगति हुई है, लेकिन इसके तहत कंपनियों को मिलने वाले प्रोत्साहन यानी इंसेंटिव की रफ्तार को लेकर संसदीय समिति ने चिंता जताई थी। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए टेलीकॉम PLI का बजट अनुमान ₹1,965.5 करोड़ था। बाद में इसे संशोधित कर ₹1,944 करोड़ कर दिया गया। 31 मार्च 2026 तक इस राशि में से ₹1,597.93 करोड़ का वास्तविक उपयोग हुआ।

समिति ने बताया था कि दिसंबर 2025 तक केवल ₹700.98 करोड़ खर्च हुए थे। इसके बाद समिति ने इंसेंटिव जारी करने में आने वाली प्रक्रियात्मक और अनुपालन संबंधी रुकावटों की समीक्षा करने की जरूरत बताई। दूरसंचार विभाग के अनुसार, कंपनियां अपने ऑडिट किए गए वित्तीय विवरणों के आधार पर इंसेंटिव का दावा करती हैं।

ये दस्तावेज आमतौर पर अगले वित्त वर्ष के दिसंबर में जमा किए जाते हैं। इसी वजह से इंसेंटिव का भुगतान अक्सर वित्त वर्ष के अंतिम हिस्से में अधिक होता है। अब प्रक्रिया को तेज करने के लिए DoT ने योजना के नियमों में बदलाव किया है। कंपनियों को साल में एक बार के बजाय हर तिमाही इंसेंटिव क्लेम जमा करने की अनुमति दी गई है।

विभाग ने क्लेम की जांच और भुगतान के लिए Standard Operating Procedure भी तैयार किया है। इसके अलावा एक ऑनलाइन सिस्टम बनाया गया है, जहां आवेदक अपने क्लेम की स्थिति देख सकते हैं और विभाग भुगतान की प्रक्रिया पर नजर रख सकता है। DoT ने यह भी स्पष्ट किया कि टेलीकॉम PLI योजना में पात्रता के लिए न्यूनतम घरेलू वैल्यू एडिशन को अनिवार्य शर्त नहीं बनाया गया है।

5G की 100 लैब पर भी सरकार की नजर

टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग के अलावा सरकार 5G तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने पर भी काम कर रही है। DoT ने TDIP (Technology Development and Investment Promotion) Scheme के तहत 100 5G Use Case Labs स्थापित की हैं। इन लैब की प्रभावशीलता जांचने के लिए DoT ने Indian Institute of Public Administration के जरिए तीसरे पक्ष से मूल्यांकन कराया है।

योजना को 16वें वित्त आयोग की अवधि में भी जारी रखा जा रहा है। मूल्यांकन के आधार पर विभाग ने 11 प्रमुख प्रदर्शन मानकों वाला ग्रेडिंग फ्रेमवर्क तैयार किया है। इसके जरिए लैब में विकसित हो रहे 5G उपयोग, उद्योगों के साथ उनके जुड़ाव, बड़े स्तर पर इस्तेमाल की क्षमता और वास्तविक परिणामों को मापा जाएगा।

DoT इन 5G लैब की समय-समय पर समीक्षा भी कर रहा है। इसमें उच्च स्तर की निगरानी और अलग-अलग मंत्रालयों के बीच समन्वय शामिल है। संसदीय समिति ने भी 5G लैब के नियमित मूल्यांकन की सिफारिश की है। उसका कहना है कि,

सरकारी निवेश का फायदा लंबे समय तक चलने वाले इनोवेशन, घरेलू वैल्यू एडिशन और वैश्विक टेलीकॉम बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के रूप में दिखाई देना चाहिए।

Telecom PLI Scheme के आंकड़े बताते हैं कि भारत में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग तेजी से आगे बढ़ रही है। निवेश, बिक्री, निर्यात और रोजगार में हुई बढ़ोतरी इसके संकेत हैं। अब सरकार का अगला फोकस इंसेंटिव भुगतान की प्रक्रिया को तेज और आसान बनाने पर है, ताकि कंपनियों को योजना का लाभ समय पर मिल सके।

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Veer Rai

Founder & Editor, जय जगदम्बा न्यूज

Veer Rai जय जगदम्बा न्यूज के Founder और Editor हैं। उन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है। वे बिहार और देश-दुनिया से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों के साथ करियर, शिक्षा, नौकरी, राजनीति, धर्म, बिजनेस, टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जैसे विषयों पर गहन और शोध-आधारित लेख प्रकाशित करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सरल, स्पष्ट और विश्वसनीय भाषा में उपयोगी, तथ्यपरक और प्रमाणित जानकारी पहुंचाना है, जिससे लोग सही और जागरूक निर्णय ले सकें।

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