एक महीने बाद फिर भड़की मिडिल ईस्ट की जंग, ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें, कई देशों में मचा हड़कंप

Iran US Tensions 2.0: एक महीने की शांति के बाद मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका के IRGC ठिकानों पर हमले के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। जॉर्डन के अमेरिकी बेस पर बैलिस्टिक मिसाइल हमले के साथ बहरीन और कुवैत में ड्रोन अटैक से हालात और गंभीर हो गए हैं। इस बढ़ते तनाव का असर अब होर्मुज जलडमरूमध्य और वैश्विक तेल बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है।
अमेरिका के हमले के बाद ईरान का बड़ा पलटवार
मिडिल ईस्ट में तनाव तब अचानक बढ़ गया जब अमेरिका ने ईरान के अंदर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM के अनुसार, यह कार्रवाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास अमेरिकी सैनिकों और कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाने की ईरानी कोशिशों के जवाब में की गई।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इस हमले को लेकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि,
कार्रवाई ईरान की ओर से होर्मुज में समुद्री माइन बिछाने की कोशिश और जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर मिसाइल हमले के जवाब में की गई।
ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि अगर दोबारा हमला हुआ तो अमेरिका इससे भी ज्यादा सख्त कार्रवाई कर सकता है। अमेरिकी हमले के जवाब में ईरान ने जॉर्डन स्थित प्रिंस हसन एयरबेस और वहां मौजूद अमेरिकी मरीन ठिकाने पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं।
जॉर्डन की सेना ने बताया कि उसकी एयर डिफेंस ने सीमा में दाखिल हुई 13 मिसाइलों में से 10 को हवा में ही नष्ट कर दिया। बाकी तीन मिसाइलें आबादी से दूर खाली इलाकों में गिरीं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इस हमले में किसी की मौत या घायल होने की खबर नहीं है।
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बहरीन और कुवैत भी बने निशाना
ईरान की जवाबी कार्रवाई का असर सिर्फ जॉर्डन तक सीमित नहीं रहा। बहरीन के शेख ईसा एयरबेस पर बड़े स्तर पर ड्रोन हमला हुआ। ईरानी मीडिया के मुताबिक एयरबेस में रडार सिस्टम और अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी वाले स्थानों को निशाना बनाया गया। वहीं कुवैत ने भी अपने क्षेत्र में ड्रोन हमलों की पुष्टि की है।
जॉर्डन के मफरक शहर में भी सायरन सुनाई दिए और मिसाइलों को हवा में रोके जाने की खबर सामने आई। ईरान के IRGC ने दावा किया कि उसने हमले के जिम्मेदार लोगों को जवाब दिया है। संगठन ने बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने का दावा किया, लेकिन अमेरिका ने इसकी पुष्टि नहीं की। एक अमेरिकी अधिकारी ने इस दावे को झूठा बताया और कहा कि CENTCOM की जानकारी में किसी अमेरिकी सैनिक के हताहत होने का उल्लेख नहीं है।
IRGC ने उत्तरी इराक के इरबिल प्रांत में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले का भी दावा किया है। ईरान का कहना है कि इन हमलों में एक रिपेयर सेंटर, गोदाम और अमेरिकी सर्विलांस बलून के गाइडेंस सिस्टम को नुकसान पहुंचा। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दूसरी ओर, ईरानी सरकारी मीडिया ने क्वेश्म आइलैंड, बंदर अब्बास, चाबहार, जास्क, सिरिक, असलुयेह, कोनारक और लावन में धमाकों की जानकारी दी। जिरोफ्त के एक सिविलियन एयरपोर्ट पर हमले की भी खबर है। सिरिक से सामने आई जानकारी सबसे ज्यादा चिंता बढ़ाने वाली है। ईरानी रेड क्रिसेंट के मुताबिक अमेरिकी हमले की चपेट में एक ऐसा घर आया जहां शादी समारोह चल रहा था। इसमें एक बच्चे समेत कम से कम चार लोगों की मौत और 50 से ज्यादा लोगों के घायल होने की बात कही गई है।
होर्मुज संकट से तेल बाजार पर बढ़ा दबाव
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का सीधा असर तेल बाजार पर भी पड़ रहा है। सोमवार को होर्मुज से बाहर निकल रहे दो तेल टैंकरों पर हमला हुआ। जुलाई के बाद यह इस तरह की पहली बड़ी झड़प बताई गई। इसके बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत में करीब चार फीसदी की तेजी देखी गई।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। यहां से दुनिया की करीब पांचवीं हिस्सेदारी वाला तेल गुजरता है। फरवरी में अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने इस जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही लगभग रोक दी है। इससे वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।
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ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान बातचीत के जरिए समाधान चाहते हैं, लेकिन IRGC होर्मुज पर नियंत्रण और आर्थिक मुआवजे जैसी शर्तें रख रहा है। अमेरिका इन शर्तों को स्वीकार नहीं कर रहा है।
अमेरिका की ट्रैवल एडवाइजरी
तनाव के बीच अमेरिका ने पूरे मिडिल ईस्ट के लिए फिर से यात्रा चेतावनी जारी की है। ईरान और ओमान जहाजों की आवाजाही के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक से मुलाकात कर क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा की।
इस बीच IAEA ने बताया कि,
जून 2025 में हुए 12 दिन के युद्ध के बाद से उसके अधिकारी ईरान के परमाणु ठिकानों का निरीक्षण नहीं कर पाए हैं। ऐसे में ईरान के मौजूदा यूरेनियम भंडार की स्थिति की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
गाजा में भी तनाव जारी है। इजरायली सेना ने एक अभियान के दौरान हमास के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी को हिरासत में लिया। इस कार्रवाई के दौरान दो बच्चों समेत चार लोगों की मौत की खबर है। वहीं यमन में सऊदी समर्थित सुरक्षाबलों ने इस्लामिक स्टेट के प्रवक्ता अबू हुजैफा अल अंसारी को मार गिराया। इस कार्रवाई में अमेरिका की कोई भूमिका नहीं बताई गई है।

