गमले में उगाएं बाजार जैसी लाल-मीठी स्ट्रॉबेरी, अक्टूबर-नवंबर में करें ये काम, कुछ महीनों में मिलने लगेंगे फल

Strawberry Plant Growing Guide: बाजार में दिखने वाली लाल और रसीली स्ट्रॉबेरी देखकर अक्सर लगता है कि इसे उगाने के लिए ठंडे पहाड़ी इलाके और बड़े खेत जरूरी होंगे। लेकिन ऐसा नहीं है। सही मौसम और थोड़ी देखभाल के साथ इसे घर की बालकनी या छत पर गमले में भी उगाया जा सकता है। स्ट्रॉबेरी का पौधा ज्यादा जगह नहीं लेता और इसकी जड़ें भी बहुत गहरी नहीं जातीं। यही वजह है कि यह कंटेनर गार्डनिंग और किचन गार्डन के लिए अच्छा विकल्प माना जाता है।
भारत के मैदानी और प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में स्ट्रॉबेरी लगाने के लिए अक्टूबर से नवंबर का समय उपयुक्त माना जाता है। मानसून के बाद मौसम में हल्की ठंडक शुरू हो जाती है, जिससे नई जड़ों के विकास में मदद मिलती है। स्ट्रॉबेरी का पौधा बहुत ज्यादा गर्मी और लू को सहन नहीं कर पाता। इसलिए इसकी रोपाई ठंड का मौसम शुरू होने से पहले कर देना बेहतर रहता है।
अगर अक्टूबर या नवंबर में स्वस्थ पौध, सैपलिंग या रनर लगाया जाए तो दिसंबर के आखिर से फरवरी और मार्च के बीच फूल और फल आने शुरू हो सकते हैं। घर पर इसे उगाने के लिए बहुत बड़ा गमला जरूरी नहीं है। करीब 8 से 12 इंच व्यास और इतनी ही गहराई वाला गमला एक पौधे के लिए पर्याप्त हो सकता है। हैंगिंग बास्केट या चौड़े ग्रो बैग में भी इसे लगाया जा सकता है।
गमले में पानी की निकासी अच्छी होना बेहद जरूरी है। इसके नीचे कम से कम दो से तीन ड्रेनेज होल होने चाहिए। गमले में पानी लंबे समय तक जमा रहने पर स्ट्रॉबेरी की नाजुक जड़ों में फंगस लग सकती है और पौधा खराब हो सकता है।
ऐसी मिट्टी तैयार करें, जिसमें जड़ों को मिले पर्याप्त हवा
गमले में स्ट्रॉबेरी की अच्छी बढ़वार के लिए मिट्टी हल्की, भुरभुरी और हवादार होनी चाहिए। बहुत भारी और चिपचिपी मिट्टी में जड़ों के विकास में परेशानी हो सकती है। पॉटिंग मिक्स के लिए 40 प्रतिशत उपजाऊ बगीचे की मिट्टी, 30 प्रतिशत कोकोपीट और 30 प्रतिशत अच्छी तरह सड़ी हुई वर्मीकम्पोस्ट या पुरानी गोबर की खाद का मिश्रण तैयार किया जा सकता है।
कोकोपीट मिट्टी को हल्का रखने और नमी बनाए रखने में मदद करती है, जबकि वर्मीकम्पोस्ट पौधे को जरूरी पोषक तत्व देती है। स्ट्रॉबेरी के लिए मिट्टी का पीएच हल्का अम्लीय होना बेहतर माना जाता है। इसका पीएच करीब 5.5 से 6.5 के बीच रखा जा सकता है। पौधे को रोज 5 से 6 घंटे की सीधी धूप मिलना भी जरूरी है।
बालकनी, खिड़की या छत पर ऐसी जगह चुनें जहां सुबह से दोपहर तक अच्छी रोशनी आती हो। पर्याप्त धूप नहीं मिलने पर पत्तियां तो बढ़ सकती हैं, लेकिन फूल और फल कम हो सकते हैं। मार्च के अंत में गर्मी बढ़ने पर दोपहर की तेज धूप से पौधे को हल्की छाया में रखा जा सकता है।
पानी देते समय इस गलती से बचें
स्ट्रॉबेरी को नमी वाली मिट्टी पसंद है, लेकिन जरूरत से ज्यादा पानी नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए रोजाना तय मात्रा में पानी डालने के बजाय मिट्टी की नमी देखकर सिंचाई करें। गमले की ऊपर की करीब 1 इंच मिट्टी सूखी महसूस होने पर पानी देना उचित है।
पानी पौधे के तने और जड़ों के आसपास मिट्टी में डालें। पत्तियों, फूलों और बन रहे फलों पर ऊपर से पानी डालने से बचना चाहिए। लगातार नमी रहने पर फूल और फल प्रभावित हो सकते हैं तथा फलों में ग्रे मोल्ड जैसी फफूंद लगने का खतरा बढ़ सकता है।
रोपाई के दौरान पौधे के क्राउन पर भी विशेष ध्यान दें। क्राउन वह हिस्सा है जहां से जड़ें और पत्तियां निकलती हैं। इसे मिट्टी में बहुत गहराई तक नहीं दबाना चाहिए और इसे सतह से थोड़ा ऊपर रखना चाहिए। बहुत नीचे दबाने पर तना सड़ सकता है, जबकि जड़ों के बाहर रह जाने पर पौधा सूख सकता है।
शुरुआत में पौधा छोटा हो और पहली बार फूल आएं तो शुरुआती फूलों को हटाने की सलाह दी जाती है। इससे पौधे को पहले जड़ और शाखाएं मजबूत करने का मौका मिलता है। बाद में स्वस्थ पौधे पर आने वाले फलों का विकास बेहतर हो सकता है। इस तरह सही मौसम, अच्छी मिट्टी, पर्याप्त धूप और नियंत्रित सिंचाई के साथ घर पर भी ताजी स्ट्रॉबेरी उगाने की कोशिश की जा सकती है।
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