सहजन की फलियां ही नहीं, पत्तियों में भी छिपा है सेहत का खजाना, जानिए खाने का सही तरीका

सांभर में इस्तेमाल होने वाली सहजन की फलियां कई घरों में आम सब्जी हैं, लेकिन यह पौधा सिर्फ स्वाद के लिए नहीं जाना जाता। इसकी पत्तियां, फूल, बीज और दूसरे हिस्से भी पारंपरिक रूप से भोजन और औषधीय उपयोग में लिए जाते हैं।
आयुर्वेद में मोरिंगा के नाम से पहचाने जाने वाले सहजन को पोषक तत्वों से भरपूर माना जाता है। इसमें प्रोटीन के साथ कैल्शियम, आयरन, पोटेशियम, मैग्नीशियम और कई जरूरी विटामिन पाए जाते हैं।
सहजन में कौन-कौन से पोषक तत्व होते हैं? (Drumstick Benefits)
सहजन के अलग-अलग हिस्सों में पोषक तत्वों की मात्रा अलग हो सकती है। इसकी पत्तियों को खासतौर पर आयरन और कैल्शियम का अच्छा स्रोत माना जाता है। वहीं फलियों में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है, जो पाचन तंत्र के लिए उपयोगी माना जाता है।
सहजन में विटामिन ए और विटामिन सी के साथ प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, पोटेशियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व (Drumstick Benefits) भी पाए जाते हैं। इसी पोषण संरचना के कारण इसे कई जगह सुपरफूड कहा जाता है।
इस पौधे की खास बात यह है कि इसका इस्तेमाल केवल फलियों तक सीमित नहीं है। पत्तियों से पाउडर बनाया जाता है, जबकि फूलों और बीजों का भी पारंपरिक व्यंजनों में इस्तेमाल होता है। सहजन की छाल और जड़ का भी पारंपरिक चिकित्सा में उपयोग बताया जाता है।
सहजन की सब्जी बनाते समय किन बातों का ध्यान रखें?

सहजन की फलियों की सब्जी बिहार, उत्तर प्रदेश और बंगाल सहित कई जगहों पर बनाई जाती है। इसे रोटी या चावल के साथ खाया जा सकता है। बनाने से पहले फलियों के कड़े रेशे निकालना जरूरी होता है। अगर रेशे ठीक से नहीं निकाले जाएं तो खाने में परेशानी हो सकती है।
इसे हल्के मसाले और थोड़े पानी के साथ कम समय में पकाना बेहतर माना जाता है। बहुत देर तक पकाने या उबालने से कुछ पोषक तत्व कम हो सकते हैं। सहजन के फूलों से पकौड़े भी बनाए जा सकते हैं। इसके अलावा इसका हल्का सूप भी तैयार किया जाता है।
सहजन को डाइट में शामिल करने का एक और तरीका इसकी पत्तियों (Moringa Leaves) का पाउडर है। इसे गुनगुने पानी, दूध, चाय या दाल में मिलाकर लिया जा सकता है। हालांकि पाउडर की मात्रा सीमित रखना जरूरी है।
सहजन रोज कितनी मात्रा में खाना सही है?
सामान्य मात्रा में सहजन को रोज के भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है। सब्जी के तौर पर इसे सप्ताह में दो से तीन बार खाया जा सकता है। वहीं पाउडर के लिए आधा से एक छोटा चम्मच सुबह लेने की बात दी गई है। जरूरत से ज्यादा सेवन करने पर कुछ लोगों को पेट से जुड़ी परेशानी हो सकती है।
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, दिल्ली के संहिता एवं सिद्धांत विभाग की विशेषज्ञ डॉक्टर निकिता शर्मा के अनुसार, सहजन में मौजूद फाइबर पाचन को बेहतर रखने में मदद कर सकता है। स्रोत में यह भी बताया गया है कि इसके सेवन को वजन नियंत्रण, ब्लड शुगर मैनेजमेंट और बैड कोलेस्ट्रॉल से जुड़े स्वास्थ्य लाभों के संदर्भ में देखा जाता है।
हालांकि सहजन को किसी बीमारी की दवा या पूरी डाइट का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। संतुलित भोजन के साथ इसे शामिल करना बेहतर तरीका है।
किन लोगों को सहजन खाने से पहले सावधानी रखनी चाहिए?
डायबिटीज, थायरॉइड या किसी पुरानी बीमारी से जूझ रहे लोगों को सहजन या इसके पाउडर का नियमित सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य आहार विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए भी व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
कुल मिलाकर मोरिंगा कम लागत में डाइट में शामिल किया जा सकने वाला पौष्टिक खाद्य पदार्थ है। फलियों की सब्जी हो, पत्तियों का पाउडर या हल्का सूप, इसे संतुलित मात्रा में लेना ही बेहतर विकल्प है।
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