दिल्ली में तिरंगा मार्च से पहले हिरासत में लिए गए अभिजीत दीपके और नेहा बोरा, जानिए अब क्या हुआ

CJP Tiranga March controversy in Delhi involving Abhijeet Dipke and Neha Bora detention
1 min read

दिल्ली: राजधानी में ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और छात्र नेता नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने पर विवाद बढ़ गया है। शशि थरूर समेत कई विपक्षी नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। 17 अक्टूबर की सुबह आई रिपोर्टों के मुताबिक, नेहा बोरा को रिहा कर दिया गया है, जबकि अभिजीत दीपके के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

तिरंगा मार्च से पहले कार्रवाई

दिल्ली में 16 अक्टूबर 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले पुलिस की कार्रवाई चर्चा में आ गई। इस मार्च का उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करना था। प्रदर्शन से जुड़े नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी सवाल उठाए थे।

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके को दिल्ली के झंडेवालान स्थित उनके घर से हिरासत में लिया गया। वह कनॉट प्लेस में प्रस्तावित मार्च में शामिल होने जा रहे थे। वहीं, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा को मंडी हाउस के पास हिरासत में लिया गया।

इस कार्रवाई के बाद CJP और छात्र संगठनों ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए। संगठन की ओर से आरोप लगाया गया कि दीपके को किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। हिरासत में लिए गए नेताओं की स्थिति जानने और उनसे संपर्क करने में परेशानी होने की बात भी कही गई।

ये भी पढ़ें: चुनाव से पहले सपा को झटका, अभय सिंह समेत तीन नेताओं ने थामा BJP का दामन

हालांकि, मामले को समझने के लिए पुलिस का पक्ष और कार्रवाई के कानूनी आधार जानना भी जरूरी है। प्रदर्शन से पहले कानून-व्यवस्था बनाए रखने को लेकर उठाए गए कदमों के बीच शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का मुद्दा भी चर्चा में आ गया।

शशि थरूर समेत विपक्ष ने उठाए सवाल

अभिजीत दीपके और नेहा बोरा की हिरासत (Abhijeet Dipke and Neha Bora detention) पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी प्रतिक्रिया दी। ABP न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने सोशल मीडिया पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। थरूर ने कहा कि,

सार्वजनिक सड़क पर तिरंगा लेकर चलना अपराध नहीं है और पुलिस को इस मामले में स्पष्टीकरण देना चाहिए।

इस घटना पर अन्य विपक्षी नेताओं ने भी चिंता जताई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने दोनों नेताओं की रिहाई की मांग की, जबकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाओं के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया।

इस विवाद के केंद्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी जैसे मुद्दे हैं। बड़े प्रदर्शन के दौरान आम लोगों, दुकानदारों और राहगीरों को होने वाली संभावित परेशानी भी कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों का हिस्सा है। ऐसे में प्रदर्शनकारियों के आरोपों के साथ पुलिस का पक्ष और संबंधित कानूनी दस्तावेज भी महत्वपूर्ण हैं।

नेहा बोरा रिहा, दीपके पर कार्रवाई

17 अक्टूबर 2026 की सुबह सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, नेहा बोरा को हिरासत से रिहा कर दिया गया। दिल्ली पुलिस ने आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उन्हें छोड़ दिया।

हालांकि, अभिजीत दीपके के मामले में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। रिपोर्टों के अनुसार, उनके खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई शुरू की गई है। उन्हें विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया जाना है।

ये भी पढ़ें: राहुल गांधी का बड़ा दावा! केंद्र के 200 अधिकारी उनके संपर्क में, सुप्रीम कोर्ट मार्च से पहले क्या बोले कांग्रेस नेता?

इन धाराओं के तहत की गई कार्रवाई का आगे क्या परिणाम होगा, यह संबंधित कानूनी प्रक्रिया और अधिकारियों के सामने रखे जाने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगा। उपलब्ध जानकारी के आधार पर उनके मामले के अंतिम नतीजे के बारे में कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

तिरंगा मार्च और विरोध के अधिकार पर चर्चा

इस घटनाक्रम के बाद CJP के प्रस्तावित मार्च और उसके नेताओं की हिरासत का मामला फिर चर्चा में है। अब अभिजीत दीपके की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी। साथ ही, यह भी महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस अपनी कार्रवाई के आधार पर क्या स्पष्टीकरण देती है। यह विवाद केवल दो नेताओं की हिरासत तक सीमित नहीं है।

इसके साथ शांतिपूर्ण विरोध, राष्ट्रीय ध्वज के साथ प्रदर्शन, चुनाव आयोग की भूमिका और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण जैसे मुद्दे भी जुड़े हैं। मामले की पूरी तस्वीर समझने के लिए सभी संबंधित पक्षों की बात और सत्यापित तथ्यों को ध्यान में रखना जरूरी है।

Jai Jagdamba News Whatsapp

About the Author

Harshita Shrimali

Founder & Editor, जय जगदम्बा न्यूज

Harshita Shrimali is a news writer at Jai Jagdamba News who contributes to creating informative and reader-friendly news content. She focuses on presenting information in clear, simple language, helping readers understand important news and developments. At Jai Jagdamba News, she aims to deliver content that prioritizes accuracy, clarity, and relevance for readers.

View all articles by Harshita Shrimali →