कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए रोज खाते हैं कच्चा लहसुन? फायदे के साथ जान लें ये नुकसान

कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर खान-पान में बदलाव करने की सलाह दी जाती है। ऐसे में कई लोग सुबह खाली पेट कच्चा लहसुन खाना शुरू कर देते हैं। माना जाता है कि इसमें मौजूद एलिसिन कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद कर सकता है। लेकिन क्या वैज्ञानिक शोध भी इस दावे का समर्थन करते हैं? जानिए लहसुन के सेवन से जुड़ी जरूरी बातें, इसके संभावित नुकसान और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने के सही तरीके।
क्या लहसुन से कोलेस्ट्रॉल कम होता है?
लहसुन का इस्तेमाल भारतीय रसोई में लंबे समय से होता आ रहा है। इसे स्वाद बढ़ाने के साथ सेहत के लिए भी उपयोगी माना जाता है। हालांकि, लहसुन से कोलेस्ट्रॉल कम करने के मामले में इसके फायदे को लेकर वैज्ञानिक प्रमाण अभी स्पष्ट नहीं हैं।
साल 2018 में Medicine जर्नल में प्रकाशित एक मेटा-विश्लेषण में शोधकर्ताओं ने ब्लड लिपिड्स पर लहसुन के प्रभाव का अध्ययन किया था। इसमें कुल कोलेस्ट्रॉल, खराब कोलेस्ट्रॉल यानी LDL और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर में कोई खास सुधार नहीं पाया गया।
वहीं, साल 2024 में Journal of Health, Population and Nutrition में प्रकाशित एक अन्य मेटा-विश्लेषण में लहसुन के सेवन और ब्लड लिपिड्स के बीच संबंध का अध्ययन किया गया। इसमें अच्छे कोलेस्ट्रॉल यानी HDL के स्तर में मामूली बढ़ोतरी देखी गई। हालांकि, केवल इस आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि लहसुन कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने का प्रभावी तरीका है।
इसलिए अगर आपका कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है, तो सिर्फ लहसुन पर निर्भर रहना सही नहीं होगा। संतुलित खान-पान, नियमित व्यायाम और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से इलाज जरूरी है।
एलिसिन शरीर में कैसे करता है काम?
लहसुन में एलिसिन नाम का एक प्राकृतिक यौगिक पाया जाता है। जब लहसुन की कली को काटा या कुचला जाता है, तो उसमें मौजूद एंजाइम की मदद से एलिसिन बनता है। लहसुन की तेज गंध के लिए भी यह यौगिक जिम्मेदार होता है।
कुछ शोधों में एलिसिन और लहसुन में मौजूद दूसरे यौगिकों के संभावित स्वास्थ्य लाभों का अध्ययन किया गया है। कुछ अध्ययनों में LDL और कुल कोलेस्ट्रॉल में कमी के संकेत मिले हैं। हालांकि, सभी शोधों के नतीजे एक जैसे नहीं हैं।
साल 2012 में Nutrition Reviews में प्रकाशित एक अध्ययन में एलिसिन के कोलेस्ट्रॉल पर प्रभाव की जांच की गई थी। इसमें कोलेस्ट्रॉल के स्तर पर कोई खास असर नहीं मिला। यह पशुओं पर आधारित अध्ययन था, इसलिए इसके नतीजों को सीधे इंसानों पर लागू नहीं किया जा सकता।
दरअसल, किसी खाद्य पदार्थ में उपयोगी यौगिक मौजूद होने का मतलब यह नहीं है कि उसका सेवन किसी बीमारी का पक्का इलाज है। लहसुन को सामान्य संतुलित आहार में शामिल किया जा सकता है, लेकिन इसे कोलेस्ट्रॉल की दवा का विकल्प नहीं मानना चाहिए।
खाली पेट लहसुन खाने के नुकसान
सुबह खाली पेट कच्चा लहसुन खाना हर व्यक्ति के लिए सही नहीं होता। कुछ लोगों में इसके सेवन से पाचन संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। पेट में जलन, दर्द, गैस, पेट फूलना, मतली और बेचैनी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा, सांसों और शरीर से लहसुन की गंध भी आ सकती है।
एसिडिटी, सीने में जलन या पेट में अल्सर की समस्या से परेशान लोगों को कच्चा लहसुन खाने से तकलीफ बढ़ सकती है। अगर आप खून पतला करने वाली दवाएं लेते हैं, तो लहसुन के अधिक सेवन या सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। लहसुन कुछ दवाओं के साथ असर डाल सकता है और रक्तस्राव का जोखिम बढ़ा सकता है।
लो ब्लड प्रेशर वाले लोगों को भी सावधानी बरतनी चाहिए। लहसुन से एलर्जी होने पर इसका सेवन नहीं करना चाहिए। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भोजन में सामान्य मात्रा से अधिक लहसुन लेने या इसके सप्लीमेंट का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
खराब कोलेस्ट्रॉल कैसे कम करें?
कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने के लिए सबसे पहले समय-समय पर लिपिड प्रोफाइल जांच कराना जरूरी है। इससे LDL, HDL और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर का पता चलता है। जांच की रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर आगे की सलाह दे सकते हैं।
अपने रोजाना के भोजन में ओट्स, दालें, बीन्स, फल और हरी सब्जियां शामिल करें। इनमें मौजूद फाइबर हृदय की सेहत के लिए उपयोगी होता है। बादाम जैसे मेवे और बीज भी संतुलित मात्रा में खाए जा सकते हैं। वहीं, घी, मक्खन और अधिक सैचुरेटेड फैट वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखना बेहतर है।
नियमित पैदल चलना और शारीरिक गतिविधियां करना भी जरूरी है। यदि LDL कोलेस्ट्रॉल बहुत अधिक है या आपको पहले से हृदय रोग, डायबिटीज जैसी समस्या है, तो डॉक्टर से सलाह लें। निर्धारित दवाओं को अपने मन से बंद न करें और न ही उनकी खुराक बदलें।
ध्यान दें: लहसुन खाने से कोलेस्ट्रॉल निश्चित रूप से कम होता है, इसका मजबूत प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसे संतुलित आहार का हिस्सा जरूर बनाया जा सकता है, लेकिन कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखने के लिए सही खान-पान, नियमित व्यायाम, जांच और जरूरत के अनुसार इलाज को प्राथमिकता देना जरूरी है।

