भारतीय नौसेना को मिलने जा रहे हैं 4 आधुनिक ‘महाविनाशक’ युद्धपोत, चीन-पाक की उड़ी नींद

Indian Navy Next Gen Destroyers: समंदर में भारत की ताकत को कई गुना बढ़ाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाया गया है। रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने भारतीय नौसेना के लिए चार अगली पीढ़ी के अत्याधुनिक ‘नेक्स्ट जनरेशन डिस्ट्रॉयर’ की खरीद को हरी झंडी दे दी है। यह नए युद्धपोत दुश्मन के होश उड़ाने के लिए काफी होंगे।
क्यों खास हैं ये ‘नेक्स्ट जनरेशन डिस्ट्रॉयर’?
नौसेना के बेड़े में शामिल होने वाले ये नए विध्वंसक (Destroyers) मौजूदा युद्धपोतों के मुकाबले कहीं अधिक ताकतवर और विध्वंसक होंगे।
ज्यादा मारक क्षमता: ये जहाज साइज में बड़े होंगे और अपने साथ पहले से ज्यादा आधुनिक हथियार और मिसाइलें ले जा सकेंगे।
हर मोर्चे पर मुस्तैद: ये मल्टी-रोल युद्धपोत होंगे, जो एक साथ दुश्मन के जहाजों (Surface Targets), पनडुब्बियों (Submarines) और हवाई हमलों (Air Threats) का चुटकियों में खात्मा करने में सक्षम होंगे।
अत्याधुनिक सेंसर: इनमें दुश्मन का दूर से पता लगाने और बिना चूके सटीक हमला करने के लिए फ्यूचरिस्टिक सेंसर और कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगाए जाएंगे।
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नौसेना में कब तक शामिल होंगे ये विध्वंसक?
फिलहाल रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने इसकी खरीद की जरूरत को शुरुआती मंजूरी (AoN) दी है। यानी अभी यह शुरुआती चरण में है। इसके बाद देश के चुनिंदा शिपयार्डों को प्रस्ताव के लिए अनुरोध (RFP) भेजा जाएगा, जिसमें डेढ़ से दो साल का वक्त लग सकता है।
सभी प्रस्तावों के मूल्यांकन और विश्लेषण के बाद ‘कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी’ (CCS) की अंतिम मुहर लगेगी। अनुबंध (Contract) साइन होने के बाद इन महाविनाशक जहाजों को बनकर नौसेना के बेड़े में शामिल होने में कम से कम 4 से 5 साल का लंबा वक्त लग सकता है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह कदम?
वर्तमान में विशाखापट्टनम क्लास और कोलकाता क्लास के डिस्ट्रॉयर भारतीय नौसेना की रीढ़ हैं। लेकिन बदलती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों और हिंद महासागर में बढ़ती ताकतों (खासकर चीन) को देखते हुए भारत अपनी नेवी को पूरी तरह आत्मनिर्भर और भविष्य के युद्धों के लिए तैयार कर रहा है। इन चार नए डिस्ट्रॉयर के आने से समंदर में भारत की सामरिक स्थिति और अधिक मजबूत हो जाएगी।
फ्रिगेट और डिस्ट्रॉयर में क्या अंतर है? (Frigate vs Destroyer)
भारतीय नौसेना में फ्रिगेट (Frigate) और डिस्ट्रॉयर (Destroyer) दोनों ही महत्वपूर्ण युद्धपोत (Warships) हैं, लेकिन इनके आकार, क्षमता और युद्ध में इनकी भूमिकाओं में मुख्य अंतर होता है।
| विशेषता | फ्रिगेट (Frigate) | डिस्ट्रॉयर (Destroyer) |
|---|---|---|
| आकार और वजन | आमतौर पर मध्यम आकार का युद्धपोत होता है। | आमतौर पर बड़ा और भारी युद्धपोत होता है। |
| हथियार और मिसाइलें | जरूरत के अनुसार मिसाइलों, तोपों और अन्य हथियारों से लैस होता है। | इसमें कई तरह के आधुनिक हथियार और मिसाइल सिस्टम लगाए जा सकते हैं। |
| मुख्य भूमिका | गश्त, पनडुब्बियों का पता लगाने और दूसरे जहाजों की सुरक्षा जैसे काम करता है। | दुश्मन के जहाजों, पनडुब्बियों और हवाई खतरों से निपटने सहित कई भूमिकाएं निभा सकता है। |
| समुद्री अभियान | तटीय सुरक्षा से लेकर लंबी दूरी के अभियानों तक इस्तेमाल किया जा सकता है। | खुले समुद्र में लंबी दूरी के अभियानों और बेड़े की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा सकता है। |
| युद्ध क्षमता | इसका प्रदर्शन डिजाइन, हथियारों और तकनीक पर निर्भर करता है। | आम तौर पर इसमें अधिक हथियार और उन्नत सिस्टम लगाने की क्षमता होती है। |
| मुख्य अंतर | कई अभियानों में सुरक्षा और निगरानी की भूमिका निभाता है। | आम तौर पर आकार में बड़ा होता है और कई तरह के युद्ध अभियानों के लिए बनाया जाता है। |
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फ्रिगेट का इस्तेमाल भी पनडुब्बियों, दुश्मन के जहाजों और हवाई खतरों के खिलाफ किया जा सकता है। हालांकि, किसी युद्धपोत की वास्तविक भूमिका उसके डिजाइन और उसमें लगे उपकरणों पर निर्भर करती है। कॉरवेट आम तौर पर इन दोनों से छोटा होता है और उसका इस्तेमाल अलग तरह के समुद्री अभियानों में किया जाता है।
चार Next Generation Destroyer की खरीद की दिशा में यह शुरुआती मंजूरी भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया का हिस्सा है। अब आगे की खरीद प्रक्रिया, तकनीकी प्रस्ताव और निर्माण का अनुबंध तय करेंगे कि ये युद्धपोत कब तक तैयार होकर नौसेना की सेवा में शामिल होंगे।

