Diwali 2026: धनतेरस से भाई दूज तक नोट कर लें सभी तारीखें, जानें लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त

Diwali 2026 Calendar: दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही देशभर में तैयारियां जोरों पर शुरू हो जाती हैं। हिंदू धर्म में प्रकाश का यह पर्व सुख, समृद्धि और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। इस बार कार्तिक मास के दीपोत्सव को लेकर लोगों में काफी उत्सुकता है।
अगर आप भी अभी से खरीदारी, घर की सजावट और पूजा की तैयारियों का प्लान बना रहे हैं, तो धनतेरस से भाई दूज तक की सटीक तिथियां और शुभ मुहूर्त यहां देखें।
दिवाली 2026: त्योहारों की तारीख और शुभ मुहूर्त
| त्योहार | तारीख | दिन | शुभ मुहूर्त / समय |
|---|---|---|---|
| धनतेरस | 6 नवंबर 2026 | शुक्रवार | शाम 6:18 से रात 8:10 बजे तक |
| नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) | 7 नवंबर 2026 | शनिवार | उदयातिथि एवं स्थानीय पंचांग के अनुसार |
| दिवाली (लक्ष्मी पूजा) | 8 नवंबर 2026 | रविवार | शाम 5:54 से रात 7:50 बजे तक |
| गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) | 10 नवंबर 2026 | मंगलवार | सुबह 6:40 से 8:50 बजे तक |
| भाई दूज (यम द्वितीया) | 11 नवंबर 2026 | बुधवार | दोपहर का शुभ मुहूर्त |
धनतेरस 2026 कब है?
दिवाली के पांच दिवसीय उत्सव की शुरुआत धनतेरस यानी धनत्रयोदशी से होती है। साल 2026 में धनतेरस का त्योहार 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करने की परंपरा है। दिए गए पंचांग के अनुसार, धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6:18 बजे से रात 8:10 बजे तक रहेगा।
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धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ माना जाता है?
धनतेरस के अवसर पर सोना, चांदी, नए बर्तन और झाड़ू खरीदना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन खरीदी गई वस्तुएं घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक होती हैं।
सोने-चांदी के सिक्के, पीतल या तांबे के बर्तन, साबुत धनिया, गोमती चक्र, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, साबुत हल्दी और नमक भी इस दिन खरीदे जाने वाले पारंपरिक सामानों में शामिल हैं। मान्यता है कि इन वस्तुओं को घर लाने से समृद्धि आती है और दिवाली की पूजा की तैयारियां भी पूरी होती हैं।
धनतेरस पर किन चीजों को खरीदने से बचें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर कुछ वस्तुओं की खरीदारी से बचने की सलाह दी जाती है। इनमें लोहा, स्टील, कांच का सामान और चाकू-कैंची जैसी धारदार वस्तुएं शामिल हैं। हालांकि, ये मान्यताएं परंपराओं पर आधारित हैं और अलग-अलग क्षेत्रों में इनमें अंतर हो सकता है।
अगर आप धनतेरस पर नए बर्तन खरीदते हैं, तो एक प्रचलित परंपरा के अनुसार उन्हें घर में खाली लाने के बजाय पानी, अनाज या मिठाई से भरकर लाया जाता है।
काली चौदस और नरक चतुर्दशी कब है?
साल 2026 में काली चौदस का पर्व 7 नवंबर, शनिवार को मनाया जाएगा। इसे कुछ स्थानों पर महाकाली चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन कई जगहों पर मां काली और हनुमान जी की पूजा की जाती है। गुजरात और पश्चिम भारत में इसे लेकर अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं।
महाकाली और हनुमान जी की पूजा के लिए निशिता काल का शुभ समय रात 11:57 बजे से 8 नवंबर की देर रात 12:48 बजे तक रहेगा। यह मुहूर्त दिल्ली के समय के अनुसार है। इस दिन मध्यरात्रि में पूजा करने की परंपरा है।
नरक चतुर्दशी 2026
साल 2026 में नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली 8 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन अभ्यंग स्नान का शुभ समय सुबह 5:41 बजे से 6:38 बजे तक बताया गया है। वहीं, यम दीपदान के लिए शाम 5:31 बजे से रात 8:08 बजे तक का समय दिया गया है।
मान्यता के अनुसार, इस दिन सूर्योदय से पहले तेल और उबटन लगाकर स्नान किया जाता है और शाम को यमराज के नाम का दीपक जलाया जाता है।
2026 में दिवाली कब है?
साल 2026 में दिवाली का त्योहार 8 नवंबर, रविवार को मनाया जाएगा। दीपावली के दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा है। कई घरों में मां सरस्वती की भी पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि दिवाली पर विधि-विधान से पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है।
दिवाली के दिन लोग अपने घरों की सफाई करके दीपक जलाते हैं, रंगोली बनाते हैं और मिठाइयां बांटकर खुशियां मनाते हैं। बाजारों में भी सजावट, कपड़ों, मिठाइयों और उपहारों की खरीदारी को लेकर रौनक रहती है। 2026 में लक्ष्मी-गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे तक बताया गया है।
पंचांग के अनुसार, कार्तिक अमावस्या तिथि 8 नवंबर 2026 को सुबह 11:27 बजे शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक रहेगी। दिवाली पर पूजा का समय तय करते समय स्थानीय पंचांग का ध्यान रखना जरूरी है, क्योंकि अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय के अनुसार मुहूर्त में अंतर हो सकता है।
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गोवर्धन पूजा और अन्नकूट
दिवाली के बाद गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है। इस साल गोवर्धन पूजा 10 नवंबर 2026, मंगलवार को मनाई जाएगी। इसे अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को देवराज इंद्र के प्रकोप और मूसलाधार बारिश से बचाने के लिए अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया था।
इस दिन कई जगहों पर गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर पूजा की जाती है और भगवान श्रीकृष्ण को अन्नकूट का भोग लगाया जाता है। कुछ स्थानों पर 56 भोग अर्पित करने की परंपरा भी है। गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6:40 बजे से 8:50 बजे तक रहेगा।
भाई दूज 2026 कब है?
दिवाली उत्सव का समापन भाई दूज के साथ होता है। इस साल भाई दूज 11 नवंबर 2026, बुधवार को मनाई जाएगी। इसे यम द्वितीया भी कहा जाता है। यह त्योहार भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का प्रतीक है।
इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। वहीं, भाई अपनी बहनों को उपहार देकर उनके प्रति अपना प्यार जताते हैं। परिवार के लोग एक साथ मिलकर इस त्योहार को मनाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. 2026 में दिवाली की सही तारीख क्या है?
2026 में मुख्य दिवाली (लक्ष्मी पूजन) 8 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी।
Q2. दिवाली 2026 पर लक्ष्मी पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त कब है?
लक्ष्मी-गणेश पूजा का सबसे शुभ प्रदोष काल मुहूर्त 8 नवंबर 2026 को शाम 05:54 बजे से रात 07:50 बजे तक रहेगा।
Q3. धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ होता है?
धनतेरस के दिन सोना, चांदी, नए बर्तन, धनिया के बीज और झाड़ू खरीदना अति शुभ माना जाता है।
