भारतीय वायुसेना को इजराइल से मिलेंगे 6 बोइंग ‘हवाई टैंकर’, ₹8,000 करोड़ की महाडील अंतिम चरण में

India Israel Defence Deal: भारतीय वायुसेना (IAF) की ताकत में जल्द ही जबरदस्त इजाफा होने जा रहा है। भारत और इजराइल के बीच करीब ₹8,000 करोड़ ($905.7 Million) की एक मेगा डिफेंस डील अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।
इस रणनीतिक समझौते के तहत वायुसेना को 6 नए बोइंग 767 ‘हवाई ईंधन टैंकर’ (MRTT) विमान मिलेंगे, जो आसमान में ही लड़ाकू विमानों में तेल भरकर उनकी मारक क्षमता को दोगुना कर देंगे। इस प्रोजेक्ट में ‘मेक इन इंडिया’ के तहत घरेलू दिग्गज कंपनी HAL की भी बड़ी भूमिका होगी। जानिए कब तक होगी इन विमानों की डिलीवरी!
क्या है पूरा मामला?
भारत और इजराइल के बीच करीब 905.7 मिलियन डॉलर यानी लगभग 8,000 करोड़ रुपये की रक्षा डील को लेकर बातचीत अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है। इजराइल की सरकारी रक्षा कंपनी Israel Aerospace Industries (IAI) इस परियोजना में सबसे आगे बताई जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय वायुसेना के लिए छह हवाई ईंधन भरने वाले टैंकर विमान तैयार करने की जिम्मेदारी IAI को मिल सकती है। इस कंपनी ने प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया में अपनी जगह बनाई है। रूस और यूरोप की दूसरी कंपनियां जरूरी मूल्यांकन मानदंडों को पूरा नहीं कर सकीं, जिसके बाद IAI एकमात्र योग्य बोलीदाता के रूप में सामने आई है।
इस परियोजना के तहत कंपनी छह बोइंग 767 यात्री विमानों को सैन्य इस्तेमाल के लिए एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग टैंकर में बदलेगी। अभी इसे पूरी तरह फाइनल हो चुकी डील कहना सही नहीं होगा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी को ठेका मिलने की संभावना है, लेकिन अंतिम सरकारी मंजूरियों और अनुबंध की प्रक्रिया पूरी होना बाकी है।
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बोइंग 767 विमान बनेंगे हवाई ईंधन टैंकर
इस परियोजना में पुराने यात्री विमानों को एक नई सैन्य भूमिका दी जाएगी। IAI छह बोइंग 767 विमानों को आधुनिक तकनीक की मदद से ऐसे टैंकर विमानों में बदलेगी, जो उड़ान के दौरान दूसरे विमानों को ईंधन दे सकेंगे।
इसका मतलब है कि लड़ाकू विमानों को ईंधन भरवाने के लिए बार-बार जमीन पर उतरने की जरूरत कम होगी। वे हवा में ही दूसरे विमान से ईंधन लेकर अपनी उड़ान जारी रख सकेंगे। इस परियोजना में भारत सरकार की मेक इन इंडिया पहल को भी महत्व दिया गया है। समझौते के तहत कम से कम 30 प्रतिशत काम भारत में किए जाने की शर्त रखी गई है।
इसमें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की अहम भूमिका हो सकती है। भारतीय साझेदार स्थानीय सिस्टम इंटीग्रेशन, वायरिंग और विमानों के ढांचे में जरूरी बदलाव जैसे कामों में सहयोग कर सकते हैं।
इससे भारत को सिर्फ नए सैन्य विमान ही नहीं मिलेंगे, बल्कि विमान निर्माण और तकनीकी बदलाव से जुड़ा अनुभव भी हासिल हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, सभी जरूरी मंजूरियां मिलने के बाद इन छह विमानों की डिलीवरी 2028 से 2030 के बीच होने की उम्मीद है।
भारतीय वायुसेना को कैसे होगा फायदा?
हवाई ईंधन भरने वाले विमान किसी भी आधुनिक वायुसेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इनकी मदद से लड़ाकू विमान ज्यादा समय तक हवा में रह सकते हैं और लंबी दूरी तक सैन्य अभियान चला सकते हैं। उदाहरण के लिए, अगर किसी लड़ाकू विमान को लंबी दूरी पर मिशन के लिए भेजा जाता है, तो रास्ते में उसका ईंधन कम हो सकता है।
ऐसे में हवाई टैंकर विमान उड़ान के दौरान ही उसे ईंधन उपलब्ध करा सकता है। इससे लड़ाकू विमान को बीच में एयरबेस पर लौटने की जरूरत नहीं पड़ती। भारत फिलहाल रूस में बने छह Ilyushin Il-78 टैंकर विमानों का इस्तेमाल करता है।
ये विमान लंबे समय से भारतीय वायुसेना की जरूरतों को पूरा कर रहे हैं, लेकिन पुराने बेड़े के रखरखाव और उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियां भी सामने आती रही हैं।
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राफेल और सुखोई की बढ़ेगी ताकत
नए बोइंग 767 आधारित टैंकर विमान भारतीय वायुसेना की मौजूदा क्षमता को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं। इनसे राफेल और सुखोई-30MKI जैसे लड़ाकू विमानों के लंबी दूरी के अभियानों को भी बेहतर सहयोग मिलने की उम्मीद है।
वहीं, इस परियोजना को पूरा करने वाली इजराइली कंपनी IAI के पास एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग तकनीक में 40 साल से अधिक का अनुभव बताया जाता है। कंपनी इजराइल समेत दुनिया के 12 से अधिक देशों के लिए इस तरह के विमानों को तैयार या परिवर्तित कर चुकी है।
हालांकि, इसकी वास्तविक तस्वीर अंतिम सरकारी मंजूरी और अनुबंध पर हस्ताक्षर होने के बाद ही साफ होगी।

