कभी भाजपा का गढ़ रहा बिहार का यह इलाका, अब चुनाव से पहले ही BJP का पत्ता हुवा साफ

Rohtas BJP seat loss NDA Seat Sharing
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बिहार में एनडीए में सीट बंटवारे के बाद रोहतास जिला इस बार भाजपा के लिए पूरी तरह खाली (Rohtas BJP seat loss) हो गया है। सात विधानसभा क्षेत्रों वाले इस जिले में भाजपा ने एक भी सीट अपने पास नहीं रखी है। सभी सीटें सहयोगी दलों- जेडीयू, राष्ट्रीय लोक मोर्चा और लोजपा (रामविलास) को दे दी गई हैं।

रोहतास में भाजपा को झटका

बता दें की पिछली बार 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में रोहतास में दो सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था और इस बार पार्टी ने बड़ा फैसला करते हुए उन सीटों को भी अपने सहयोगी दलों के हवाले कर दिया है। नतीजतन, जिले में भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच गहरी निराशा और आक्रोश फैल गया है।

इस बार रोहतास की तीन सीटें काराकाट, नोखा और करगहर जेडीयू के पास गई हैं, जबकि सासाराम और दिनारा सीटें राष्ट्रीय लोक मोर्चा के खाते में आई हैं और चेनारी व डेहरी सीटें लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को दी गई हैं। खास बात यह है कि यह पहली बार है जब शाहाबाद क्षेत्र में भाजपा किसी भी सीट पर चुनाव नहीं लड़ रही है, जो लंबे समय से इस जिले का गढ़ माना जाता रहा।

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Rohtas BJP seat loss पर भाजपा कार्यकर्ताओं में सन्नाटा

रोहतास जिला में भाजपा को कोई भी सीट न मिलने (Rohtas BJP seat loss) पर कार्यकर्ताओं के बीच “तूफान से पहले का सन्नाटा” देखने को मिल रहा है। वरिष्ठ नेता इस पर खुलकर कुछ नहीं बोल रहे हैं, लेकिन अंदरूनी तौर पर काफी असंतोष है।

पूर्व जिला अध्यक्ष प्रमोद सिंह कहते हैं कि 35 साल से पार्टी में रहते हुए उन्होंने ऐसा पहली बार देखा है। युवा नेता अभिषेक तिवारी ने भी कहा कि जिले के कार्यकर्ताओं के मान-सम्मान के साथ गलत हुआ है।

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सासाराम और नोखा का महत्व

बता दें की रोहतास जिला की सासाराम और नोखा विधानसभा सीटें भाजपा का परंपरागत गढ़ मानी जाती रही हैं, जहां जवाहर प्रसाद और रामेश्वर चौरसिया जैसे नेता लगातार जीतते रहे हैं। हालाकी, पिछले दो चुनावों से भाजपा का प्रतिनिधित्व इन सीटों पर नहीं रहा और इस बार भी यह क्षेत्र पार्टी के लिए अछूता रहा।

जिले में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गोपाल नारायण सिंह, विधान परिषद सभापति अवधेश नारायण सिंह, निवेदिता सिंह और राजेंद्र सिंह जैसे कई दिग्गज नेता होने के बावजूद निचले स्तर के कार्यकर्ता निराश हैं। गौरतलब है कि इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में रोहतास के EVM में पहली बार कमल का निशान नहीं दिखेगा और कार्यकर्ता अपने स्तर पर बैठकों और मंथन की तैयारी में हैं।

रोहतास जैसे राजनीतिक रूप से सशक्त जिले में भाजपा का गायब होना कार्यकर्ताओं के आत्मविश्वास पर गहरी चोट है और यह सन्नाटा आने वाले राजनीतिक तूफान का संकेत भी हो सकता है।

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Veer Rai

Founder & Editor, जय जगदम्बा न्यूज

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