भारत की तेल कंपनियों को बड़ा झटका, रूस की प्रमुख तेल कंपनियों पर अमेरिका ने लगाए नए प्रतिबंध

Russia oil US sanctions Impact on India
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Russia Oil US sanctions Impact: अमेरिका ने हाल ही में रूस की प्रमुख तेल कंपनियों Rosneft और LUKOIL पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। इसका असर सीधे भारत की सबसे बड़ी निजी और सरकारी तेल कंपनियों पर पड़ेगा। बता दें, Reliance Industries Limited (RIL) और सरकारी तेल कंपनियां अब रूस से कच्चे तेल का आयात अस्थायी रूप से रोकने की तैयारी कर रही हैं। हालाकि, ये दोनों कंपनियां भारत को सबसे ज्यादा रूसी तेल आपूर्ति करती रही हैं।

Russia oil US sanctions Impact – रिलायंस और नयारा एनर्जी की बढ़ी मुश्किलें

अमेरिका द्वारा रूस की प्रमुख तेल कंपनियों Rosneft और LUKOIL पर नए प्रतिबंधों के बाद भारत की बड़ी तेल कंपनियों पर सीधे असर (Russia oil US sanctions Impact) पड़ने वाला है। खास तौर पर रिलायंस इंडस्ट्रीज, जो भारत में रूसी तेल की सबसे बड़ी उपभोक्ता है, इस कदम से सबसे ज्यादा प्रभावित होगी।

बता दें की कंपनी अपनी अधिकांश रूसी तेल आपूर्ति Rosneft के साथ दीर्घकालिक अनुबंध के तहत करती है और जामनगर रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में करीब आधी फीड स्टॉक रूसी तेल से आती है। रिलायंस ने कहा कि वह सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार आयात समीक्षा पूरी कर रही है।

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नयारा एनर्जी की मुश्किलें

वहीं नयारा एनर्जी भी संकट में है, क्योंकि उसकी गुजरात की वडिनार रिफाइनरी पहले ही यूरोपीय प्रतिबंधों से दबाव में थी और अब अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रोसनेफ्ट से उत्पाद खरीदना और बेचना और कठिन हो जाएगा। सूत्रों के अनुसार, कंपनियां 21 नवंबर तक रूसी तेल की खेप प्राप्त कर सकती हैं, लेकिन अब यह प्रतिबंध सीधे कंपनियों पर लक्षित है, जिससे कट-ऑफ के बाद हर बैरल “दागदार” माना जाएगा।

भारत पर आर्थिक असर

बता दें की इस कदम का व्यापक असर भारत के तेल आयात पर भी पड़ेगा, क्योंकि इस साल कुल कच्चे तेल आयात का 36% हिस्सा रूस से आया, जिसमें लगभग 60% आपूर्ति Rosneft और LUKOIL ने की। विशेषज्ञों के अनुसार वैकल्पिक आपूर्ति पश्चिम एशिया, अफ्रीका या अमेरिका से की जा सकती है, लेकिन इससे क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ेंगी और रिफाइनिंग मार्जिन्स प्रभावित होंगे।

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इतिहास बताता है कि रूसी तेल किसी न किसी रास्ते बाजार में पहुंच ही जाता है, हालाकि बैंकिंग संबंधी दिक्कतें बनी रह सकती हैं। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 65.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। अधिकारी ने कहा कि यह अभी 60 डॉलर के आसपास स्थिर है और अगर 70 डॉलर तक भी जाए तो स्थिति संभाली जा सकती है।

अमेरिका-रूस तनाव का वैश्विक प्रभाव

अमेरिका और रूस के बीच बढ़ते तनाव के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प लंबे समय से भारत और चीन पर रूसी तेल आयात कम करने का दबाव बना रहे हैं, जबकि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चेतावनी दी है कि ऊर्जा बाजार का संतुलन बिगड़ने से वैश्विक तेल कीमतें बढ़ सकती हैं, जो अमेरिका समेत कई देशों के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर सकती हैं।

इस स्थिति में भारत को भी खतरा है, क्योंकि रियायती रूसी तेल की आपूर्ति बंद होने से देश को अपने वार्षिक तेल आयात बिल में लगभग 4-5 अरब डॉलर का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है। भारत अपनी कुल तेल आवश्यकता का 85% आयात के माध्यम से पूरा करता है, और ICRA के अनुसार वैकल्पिक आपूर्ति से तेल आयात बिल में लगभग 2% की वृद्धि संभव है, जिससे आर्थिक संकेतकों पर असर पड़ सकता है।

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Veer Rai

Founder & Editor, जय जगदम्बा न्यूज

Veer Rai जय जगदम्बा न्यूज के Founder और Editor हैं। उन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है। वे बिहार और देश-दुनिया से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों के साथ करियर, शिक्षा, नौकरी, राजनीति, धर्म, बिजनेस, टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जैसे विषयों पर गहन और शोध-आधारित लेख प्रकाशित करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सरल, स्पष्ट और विश्वसनीय भाषा में उपयोगी, तथ्यपरक और प्रमाणित जानकारी पहुंचाना है, जिससे लोग सही और जागरूक निर्णय ले सकें।

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