बक्सर में ट्रक एंट्री माफिया का भंडाफोड़, व्हाट्सएप ग्रुप से खुला बड़ा खेल, अब तक 2 गिरफ्तार

बक्सर में ट्रक एंट्री माफिया का भंडाफोड़, व्हाट्सएप ग्रुप से खुला बड़ा खेल, अब तक 2 गिरफ्तार

बक्सर: बिहार के बक्सर में अवैध तरीके से ट्रक एंट्री के खेल का बड़ा खुलासा हुआ है। नगर थाना पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो ओवरलोडेड और बिना कागजात वाले ट्रकों को पैसे लेकर शहर से पार कराता था। पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है और उनके मोबाइल से कई अहम सुराग मिले हैं।

गुप्त सूचना के बाद पुलिस की घेराबंदी, बोलेरो से भागने की कोशिश

पुलिस के अनुसार 11 मार्च की भोर करीब 3 बजकर 20 मिनट पर सूचना मिली कि कुछ लोग एक काले रंग की बोलेरो गाड़ी से ट्रकों की सेटिंग कर उन्हें शहर से पार कराने के लिए आईटीआई मोड़ की तरफ जा रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस ने इलाके में घेराबंदी कर दी। जब बोलेरो गाड़ी को रोकने का इशारा किया गया, तो चालक ने गाड़ी को साइड से निकालकर भागने की कोशिश की।

हालांकि पुलिस ने पीछा करते हुए कॉलेज गेट के पास वाहन को रोक लिया और उसमें सवार दो लोगों को पकड़ लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गंगा दयाल (20 वर्ष) और भरत सिंह (24 वर्ष) के रूप में हुई है। पुलिस ने जब दोनों से पूछताछ शुरू की तो पूरे ट्रक एंट्री नेटवर्क (Buxar Truck Entry Mafia) की परतें खुलने लगीं।

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मोबाइल जांच में सामने आया व्हाट्सएप ग्रुप का खेल

पुलिस की जांच में सबसे चौंकाने वाली बात आरोपियों के मोबाइल से सामने आई। गंगा दयाल के फोन में “बक्सर मोबाईल एसआई” नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप मिला, जिसका वह खुद एडमिन था।

गौरतलब है कि इस ग्रुप में कई ऐसे नंबर सेव थे जो बक्सर चेक पोस्ट और विभाग से जुड़े कर्मियों के नाम से थे। ग्रुप में ट्रकों के नंबर, ड्राइवरों के मोबाइल नंबर और ऑनलाइन पैसों के लेनदेन से जुड़े संदेश भी मिले हैं।

पुलिस का कहना है कि,

इन सबूतों से साफ होता है कि ट्रकों को बिना जांच के पास कराने के लिए बाकायदा नेटवर्क बनाकर काम किया जा रहा था। जांच अभी जारी है और पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे मामले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं

हर ट्रक से वसूले जाते थे 1200 रुपये

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कई अहम बातें कबूल की हैं। उन्होंने बताया कि,

एक ट्रक को शहर और चेक पोस्ट से पार कराने के लिए मालिक या चालक से 1200 रुपये लिए जाते थे। इस रकम में से करीब 500 रुपये विभाग से जुड़े कुछ अधिकारियों और कर्मियों को दिए जाते थे ताकि ट्रक बिना किसी जांच के आसानी से गुजर सकें।

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जांच में यह भी सामने आया कि रोजाना करीब 15 से 20 ट्रकों को अवैध तरीके से पास कराया जाता था। ये ट्रक ज्यादातर कोयला और भूसी से लदे होते थे। आरोपियों ने यह भी बताया कि वे यह काम अपने चाचा अरुण पहलवान के नेटवर्क के जरिए करते थे, जो चौसा के रहने वाले हैं। जानकारी के अनुसार अरुण पहलवान पहले भी इसी तरह के मामले में जेल जा चुके हैं।

नगर थाना में तैनात महिला सब-इंस्पेक्टर शुभम कुमारी के आवेदन पर इस मामले में कांड संख्या 139/26 दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। फिलहाल पुलिस इस पूरे सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

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