डेंगू में बुखार उतरते ही क्या खत्म हो जाता है खतरा? इन लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

मानसून और उसके बाद के महीनों में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी मच्छर जनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। डेंगू के ज्यादातर मरीज सामान्य दवाओं, आराम और निगरानी से ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।
खास बात यह है कि डेंगू में बुखार कम होना हमेशा बीमारी के खत्म होने का संकेत नहीं होता। बीमारी के एक खास दौर में मरीज को अधिक निगरानी की जरूरत पड़ सकती है।
कब गंभीर रूप ले सकता है डेंगू?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार डेंगू की गंभीर स्थिति आमतौर पर बीमारी शुरू होने के करीब 3 से 7 दिन के बीच देखने को मिल सकती है। इस दौरान कई मरीजों का बुखार कम होने लगता है। ऐसे में परिवार के लोगों को लग सकता है कि मरीज अब ठीक हो रहा है, लेकिन यही समय विशेष सावधानी का भी हो सकता है।
डेंगू के दौरान प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से कम हो सकती है। हालांकि, केवल प्लेटलेट्स की संख्या देखकर बीमारी की गंभीरता तय नहीं की जाती। डॉक्टर मरीज की पूरी स्थिति, लक्षण और दूसरी जांचों को ध्यान में रखकर जोखिम का आकलन करते हैं।
इसलिए प्लेटलेट्स कम आने पर केवल संख्या देखकर घबराने के बजाय डॉक्टर की सलाह के अनुसार मरीज की निगरानी करना जरूरी है।
प्लेटलेट्स कम होने पर किन बातों पर नजर रहती है?
डेंगू के शुरुआती दिनों में ब्लड टेस्ट के जरिए मरीज की स्थिति पर नजर रखी जाती है। बीमारी के तीसरे से सातवें दिन के बीच विशेष निगरानी की जरूरत हो सकती है। इस दौरान प्लेटलेट्स कम होना डेंगू में आम बात है।
हालांकि, डॉक्टर केवल प्लेटलेट्स की रिपोर्ट पर निर्भर नहीं रहते। मरीज के लक्षण, ब्लड प्रेशर, शरीर में पानी की स्थिति और हेमेटोक्रिट यानी खून में लाल रक्त कोशिकाओं के अनुपात जैसे संकेतों को भी देखा जाता है।
गंभीर डेंगू में शरीर से प्लाज्मा के बाहर निकलने, ब्लीडिंग और दूसरे अंगों पर असर होने का खतरा हो सकता है। इसी वजह से बीमारी के दौरान मरीज की पूरी स्थिति को समझना जरूरी है। प्लेटलेट्स की संख्या में गिरावट हर मरीज में एक जैसी नहीं होती। इसलिए जांच रिपोर्ट को डॉक्टर की सलाह के साथ समझना अधिक जरूरी है।
इन संकेतों को न करें नजरअंदाज
डेंगू का क्रिटिकल फेज (Dengue Critical Phase) अक्सर उस समय के आसपास देखा जा सकता है जब बुखार कम होने लगता है। ऐसे में तापमान सामान्य होने के बाद भी मरीज की निगरानी जारी रखना जरूरी है। अगर इस दौरान पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, सांस तेजी से चलना या नाक और मसूड़ों से खून आने जैसी समस्या दिखाई दे तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लेनी चाहिए।
ये ऐसे संकेत हो सकते हैं जिन पर चिकित्सकीय जांच की जरूरत होती है। इसके अलावा बहुत ज्यादा कमजोरी, बेचैनी या पेशाब की मात्रा कम होना भी गंभीर स्थिति की ओर संकेत कर सकता है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए।
समय पर चिकित्सकीय देखभाल और सहायक उपचार मिलने से डेंगू के कारण दूसरे अंगों पर पड़ने वाले गंभीर प्रभाव के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। इसलिए डेंगू में सिर्फ बुखार कम होने या प्लेटलेट्स की एक रिपोर्ट को देखकर बीमारी के ठीक होने का फैसला नहीं करना चाहिए। मरीज की पूरी स्थिति पर नजर रखना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करना सबसे जरूरी है।
अस्वीकरण: यह लेख केवल स्वास्थ्य जानकारी और जागरूकता के लिए है। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई बड़ा स्वास्थ्य संबंधी फैसला न लें। डेंगू के गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर या नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें।

