आज से वॉशिंगटन में 3 दिन की अहम बैठक, भारत-अमेरिका के बीच फिर शुरू होगी ट्रेड डील पर बात

India US Trade Talks 2026: Tariff Changes Force New Deal Discussions in Washington
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भारत और अमेरिका के बीच होने जा रही बड़ी व्यापार वार्ता ने अचानक सबका ध्यान खींच लिया है। 20 अप्रैल से वॉशिंगटन में शुरू हो रही यह बैठक सिर्फ एक मीटिंग नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक आर्थिक रणनीति का संकेत है। हालांकि, अमेरिका के नए टैरिफ नियमों ने पूरे समझौते को उलझा दिया है। अब सवाल यह है कि क्या भारत को फायदा मिलेगा या नई शर्तें चुनौती बनेंगी। आने वाले तीन दिन बेहद अहम साबित हो सकते हैं।

20 अप्रैल से वॉशिंगटन में भारत-अमेरिका की अहम बातचीत शुरू

भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार वार्ता (India US Trade Talks 2026) अब 20 से 22 अप्रैल तक वॉशिंगटन डीसी में होने जा रही है, जहां दोनों देशों के अधिकारी आमने-सामने बैठकर अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इस प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव दरपन जैन कर रहे हैं, और उनके साथ कस्टम व विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी शामिल हैं।

यह बातचीत भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को लेकर हो रही है, हालांकि यह बैठक पहले फरवरी में तय थी, लेकिन बदलते शुल्क नियमों की वजह से इसे टालना पड़ा। अब नए हालात को देखते हुए दोनों देश समझौते को आगे बढ़ाने की दिशा में रास्ता निकालने की कोशिश करेंगे।

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US टैरिफ बदलाव से समझौते की शर्तों पर असर

इस बार भारत और अमेरिका की बातचीत पहले जैसी सीधी नहीं रहने वाली है, क्योंकि अमेरिका की शुल्क नीति में बड़ा बदलाव हो चुका है। अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए कई बड़े शुल्क फैसलों को झटका लगा, जिसके बाद 24 फरवरी से सभी देशों पर 150 दिनों के लिए 10 प्रतिशत शुल्क लागू कर दिया गया।

पहले अमेरिका भारत पर शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने के लिए तैयार था और रूसी तेल खरीद पर लगाए गए 25 प्रतिशत शुल्क को भी हटाने की योजना थी। हालांकि, अब एक समान 10 प्रतिशत शुल्क लागू होने से पूरे समझौते को नए सिरे से संतुलित और तैयार करने की जरूरत पड़ गई है।

बदलते आंकड़ों के बीच भारत के लिए कितनी बड़ी चुनौती

भारत और अमेरिका के बीच होने वाले इस समझौते में भारत ने कई अहम प्रस्ताव रखे हैं, जिनमें अमेरिकी कृषि और खाद्य उत्पादों जैसे सोयाबीन तेल, फल, सूखे मेवे और शराब पर शुल्क कम या खत्म करने की बात शामिल है। इसके साथ ही भारत ने अगले पांच साल में करीब 500 अरब डॉलर के ऊर्जा संसाधन, विमान, तकनीकी सामान और कोयला खरीदने की इच्छा जताई है।

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हाल के आंकड़े इस बातचीत को और भी जरूरी बना रहे हैं, क्योंकि 2025-26 में भारत का निर्यात 87.3 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 52.9 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिससे व्यापार अधिशेष घटकर 34.4 अरब डॉलर रह गया।

हालांकि, सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब चीन, अमेरिका को पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा व्यापार भागीदार बन गया है, ऐसे में भारत के लिए अमेरिकी बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करना बेहद जरूरी हो गया है।

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