सुपर एल नीनो से सूखा पड़ेगा या बचेगा भारत? समुद्र में बन रहा बड़ा संकेत, मौसम विभाग भी अलर्ट!
भारत में इस साल संभावित सुपर एल नीनो को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। आमतौर पर एल नीनो के दौरान मानसून कमजोर पड़ सकता है, जिससे खेती, जल भंडारण और दैनिक जीवन प्रभावित होता है। ऐसे में मौसम वैज्ञानिकों की नजर अब इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) पर है, जिसे कई विशेषज्ञ मानसून के लिए राहत देने वाला कारक मान रहे हैं।
हालांकि सवाल यह है कि क्या पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल वास्तव में सुपर एल नीनो के प्रभाव को रोक सकता है? विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरी तरह से एल नीनो को खत्म नहीं कर सकता, लेकिन इसके नकारात्मक असर को कुछ हद तक कम जरूर कर सकता है।
इंडियन ओशन डाइपोल क्या है?
इंडियन ओशन डाइपोल हिंद महासागर में समुद्र की सतह के तापमान में होने वाला एक महत्वपूर्ण बदलाव है। जब अफ्रीका के पास पश्चिमी हिंद महासागर का पानी सामान्य से अधिक गर्म और इंडोनेशिया के पास पूर्वी भाग का पानी अपेक्षाकृत ठंडा हो जाता है, तब इसे पॉजिटिव IOD कहा जाता है।
ऐसी स्थिति में भारत की ओर नमी बढ़ सकती है और मानसूनी हवाओं को अतिरिक्त ऊर्जा मिल सकती है। यही कारण है कि मौसम विशेषज्ञ इसे भारतीय मानसून के लिए सकारात्मक संकेत मानते हैं। IOD और एल नीनो दोनों अलग-अलग जलवायु प्रणालियां हैं, लेकिन कई बार इनके प्रभाव एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं।
कुछ वर्षों में पॉजिटिव IOD ने एल नीनो के कारण होने वाली बारिश की कमी को आंशिक रूप से संतुलित किया है।
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क्या सुपर एल नीनो के असर को कम कर पाएगा पॉजिटिव IOD?
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि,
पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल (आईओडी) भारतीय मानसून के लिए राहत की खबर बन सकता है, लेकिन यह सुपर एल नीनो के असर को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकता। अगर एल नीनो बेहद मजबूत रहा, तो बारिश पर उसका प्रभाव बना रह सकता है।
अच्छी बात यह है कि जुलाई से सितंबर के बीच पॉजिटिव आईओडी सक्रिय होने पर मानसून के दूसरे चरण में बारिश बेहतर हो सकती है, जिससे किसानों, जलाशयों और जल संसाधनों को फायदा मिल सकता है। फिलहाल आईओडी (Indian Ocean Dipole) की स्थिति न्यूट्रल मानी जा रही है, इसलिए शुरुआती मानसून में इसका असर सीमित रह सकता है।
वहीं कई अंतरराष्ट्रीय और भारतीय मौसम मॉडल संकेत दे रहे हैं कि,
आने वाले महीनों में पॉजिटिव आईओडी बनने की संभावना बढ़ रही है और जुलाई के बाद इसकी ताकत बढ़ सकती है।
दूसरी ओर, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का मानना है कि अभी आईओडी न्यूट्रल स्थिति में है और मानसून के दौरान भी इसके न्यूट्रल रहने की संभावना है। ऐसे में मानसून पर इसका वास्तविक असर समुद्री तापमान और मौसम की बदलती परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
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आम लोगों और किसानों के लिए इसका क्या मतलब है?
सुपर एल नीनो की वजह से बारिश कम होने की आशंका जताई जा रही है, जिसका सीधा असर खेती, फसलों की पैदावार, खाने-पीने की चीजों की कीमतों और पानी की उपलब्धता पर पड़ सकता है। ऐसे समय में हिंद महासागर में बनने वाला पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल भारत के लिए राहत की खबर बनकर सामने आ रहा है, क्योंकि यह मानसून को मजबूत करने में मदद कर सकता है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि,
किसानों और आम लोगों को फिलहाल मौसम विभाग की सलाह और स्थानीय मौसम पूर्वानुमानों पर नजर रखनी चाहिए। मानसून की सही स्थिति जुलाई और अगस्त में ज्यादा साफ होगी।
पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल सुपर एल नीनो के असर को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकता, लेकिन यह बारिश को बेहतर बनाए रखने में अहम भूमिका निभा सकता है। अब आने वाले कुछ हफ्ते तय करेंगे कि 2026 का मानसून लोगों के लिए राहत लेकर आएगा या नई चुनौतियां खड़ी करेगा।
