ईरान ने कर दिया बड़ा इशारा! अमेरिका-ईरान न्यूक्लियर डील पर दुनिया में हड़कंप, SCO के बाद बदले हालात
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहा परमाणु विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने अपने समृद्ध यूरेनियम को लेकर एक बड़ा संकेत दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। SCO बैठक के बाद सामने आए इस घटनाक्रम ने हालात को और दिलचस्प बना दिया है। क्या यह कदम दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की शुरुआत है या फिर नई जटिलताओं का संकेत, यह देखना अहम होगा।
SCO बैठक के बाद सामने आया ईरान का नया रुख
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की हालिया बैठक के दौरान पाकिस्तान के मंत्री मोहसिन नकवी और ईरान के मंत्री एस्कंदर मोमेनी के बीच हुई बातचीत के बाद एक नई जानकारी सामने आई है कि ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम का कुछ हिस्सा किसी तीसरे देश को सौंपने पर विचार कर सकता है।
यह मुद्दा लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय विवाद का कारण बना हुआ है, जहां अमेरिका लगातार ईरान से अपने यूरेनियम भंडार को कम करने या अंतरराष्ट्रीय निगरानी में देने की मांग करता रहा है, जबकि ईरान साफ कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है और वह किसी बाहरी दबाव में कोई फैसला नहीं लेगा।
यूरेनियम विवाद क्यों है इतना संवेदनशील?
समृद्ध यूरेनियम का इस्तेमाल ऊर्जा बनाने के साथ-साथ परमाणु हथियारों के लिए भी किया जा सकता है, इसी वजह से यह मुद्दा दुनिया की बड़ी शक्तियों के लिए बेहद संवेदनशील बना हुआ है और हर हलचल पर अंतरराष्ट्रीय नजर बनी रहती है।
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परमाणु समझौते पर क्यों फंसा है अमेरिका और ईरान का विवाद?
अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते (Iran Uranium Transfer) को लेकर बातचीत लंबे समय से चल रही है, लेकिन अभी तक कोई साफ नतीजा नहीं निकल पाया है। दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं, जिनकी वजह से समझौता आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
अमेरिका का कहना है कि ईरान को अपने समृद्ध यूरेनियम भंडार पर सख्त नियंत्रण रखना चाहिए, जबकि ईरान का आरोप है कि अमेरिका उसकी आर्थिक संपत्तियों पर प्रतिबंध लगाकर दबाव बना रहा है। हाल की रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि ईरान अपनी जब्त की गई वित्तीय संपत्तियों को वापस चाहता है, वहीं अमेरिका धीरे-धीरे और शर्तों के साथ राहत देने के पक्ष में है।
इस पूरी बातचीत में सबसे बड़ी रुकावट दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी है, क्योंकि अमेरिका को डर है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सैन्य रूप दे सकता है, जबकि ईरान का कहना है कि उस पर लगाए गए प्रतिबंध पूरी तरह अन्यायपूर्ण हैं।
क्षेत्रीय राजनीति पर क्या पड़ेगा असर?
ईरान यूरेनियम हस्तांतरण को लेकर जो नया घटनाक्रम सामने आया है, उसका असर सिर्फ ईरान और अमेरिका तक ही सीमित नहीं रहेगा। यह पूरे पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया की राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे मंचों पर हुई हाल की बातचीत से साफ दिख रहा है कि अब क्षेत्रीय देश भी इस विवाद को सुलझाने में अपनी भूमिका निभाने लगे हैं।
इस बीच पाकिस्तान को भी एक अहम मध्यस्थ के तौर पर देखा जा रहा है, जो दोनों पक्षों के बीच बातचीत बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि,
अगर ईरान सच में अपने समृद्ध यूरेनियम को किसी तीसरे देश को सौंप देता है, तो यह परमाणु तनाव कम करने की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक कदम हो सकता है, लेकिन इसका पूरा नतीजा इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका और ईरान आगे किस तरह की शर्तों पर सहमत होते हैं।
फिलहाल यह पूरा मामला अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक अहम मोड़ बन चुका है और आने वाले दिनों में पूरी दुनिया की नजर अमेरिका-ईरान संबंधों पर टिकी रहेगी।
