IRFC में 2% हिस्सेदारी बेच रही मोदी सरकार, जानिए खुदरा निवेशकों को कब मिलेगा मौका
IRFC OFS 2026: भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए एक अहम खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने भारतीय रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन (IRFC) में अपनी हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है। यह बिक्री ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए की जाएगी, जिसमें संस्थागत निवेशकों के साथ-साथ खुदरा निवेशकों को भी हिस्सा लेने का अवसर मिलेगा। ऐसे में IRFC के शेयरों पर निवेशकों की नजरें टिक गई हैं।
IRFC OFS के जरिए सरकार बेचेगी 2% तक हिस्सेदारी
केंद्र सरकार के निवेश एवं लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) ने घोषणा की है कि भारतीय रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन में 2 प्रतिशत तक हिस्सेदारी OFS के माध्यम से बेची जाएगी।
इस ऑफर में शुरुआत में 1 प्रतिशत इक्विटी शेयर बिक्री के लिए रखे गए हैं। हालांकि, यदि निवेशकों की मांग मजबूत रहती है तो सरकार ग्रीन शू ऑप्शन के तहत अतिरिक्त 1 प्रतिशत हिस्सेदारी भी बेच सकती है।
गैर-खुदरा निवेशकों के लिए बोली प्रक्रिया बुधवार को शुरू होगी, जबकि खुदरा निवेशक गुरुवार को इस OFS में भाग ले सकेंगे।
निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी
- फ्लोर प्राइस: ₹91 प्रति शेयर
- मंगलवार का बंद भाव: ₹98.69 प्रति शेयर
- संभावित हिस्सेदारी बिक्री: 2% तक
- खुदरा निवेशकों के लिए बोली: गुरुवार
- OFS का संचालन: DIPAM द्वारा
गौरतलब है कि मंगलवार को BSE पर IRFC का शेयर 2.53 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹98.69 पर बंद हुआ था।
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क्या है IRFC और भारतीय रेलवे से इसका संबंध?
IRFC (इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन) भारतीय रेलवे की वह अहम सरकारी कंपनी है जो रेलवे के बड़े विकास कार्यों के लिए धन जुटाने का काम करती है। वर्ष 1986 में स्थापित इस नवरत्न कंपनी की जिम्मेदारी देश और विदेश के वित्तीय बाजारों से पूंजी जुटाकर रेलवे की नई परियोजनाओं, ट्रेनों की खरीद और बुनियादी ढांचे के विस्तार को वित्तीय सहायता देना है।
रेल मंत्रालय के अधीन काम करने वाली यह कंपनी पिछले कई दशकों से भारतीय रेलवे के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यही वजह है कि आज आईआरएफसी को भारतीय रेलवे के विकास की वित्तीय रीढ़ माना जाता है।
रेलवे के विकास में IRFC की कितनी बड़ी भूमिका है?
भारतीय रेलवे के विस्तार और आधुनिकीकरण में IRFC की भूमिका बेहद अहम रही है। कंपनी द्वारा जुटाए गए फंड का इस्तेमाल नए इंजन, यात्री डिब्बों और मालगाड़ियों के वैगनों की खरीद के साथ-साथ रेलवे से जुड़ी बड़ी विकास परियोजनाओं में किया जाता है। अब तक आईआरएफसी 13,764 इंजन, 76,735 यात्री कोच और 2,65,815 मालवाहक वैगनों के वित्तपोषण में योगदान दे चुकी है।
यह भारतीय रेलवे के कुल रेल बेड़े का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा है। वहीं 2011-12 के बाद से कंपनी ने रेलवे लाइनों के विस्तार, क्षमता बढ़ाने और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए भी वित्तीय सहायता देना शुरू किया, जिससे देशभर में रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिली।
कई स्रोतों से जुटाती है फंड
IRFC अपनी सालाना वित्तीय जरूरतें पूरी करने के लिए कई तरह के रास्ते अपनाती है, जैसे कर योग्य बॉन्ड, कर-मुक्त बॉन्ड, बैंक ऋण, वित्तीय संस्थानों से उधारी और विदेशी बाजारों से लिया गया कर्ज। इसी समझदारी भरी और विविध फंडिंग रणनीति की वजह से कंपनी कम और प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों पर पैसा जुटाने में सफल रही है।
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निवेशकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह OFS?
IRFC के इस ऑफर फॉर सेल (OFS) पर निवेशकों की खास नजर बनी हुई है, क्योंकि इसमें शेयर खरीदने का मौका मौजूदा बाजार कीमत से कम दर पर मिल रहा है। कंपनी ने प्रति शेयर फ्लोर प्राइस 91 रुपये तय किया है, जबकि हाल ही में इसका शेयर 98.69 रुपये पर बंद हुआ था। हालांकि, सिर्फ कम कीमत देखकर निवेश करना सही रणनीति नहीं मानी जाती।
पिछले दो वर्षों में IRFC के शेयर में दबाव देखने को मिला है, इसलिए निवेशकों को कंपनी की स्थिति, बाजार के माहौल और अपने वित्तीय लक्ष्यों को ध्यान में रखकर फैसला लेना चाहिए। फिर भी भारतीय रेलवे की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में आईआरएफसी की अहम भूमिका और सरकारी कंपनी होने के कारण यह ओएफएस बाजार में चर्चा का विषय बना हुआ है।
