ईरान के सबसे बड़े गैस प्लांट पर इज़राइल का हमला, सीजफायर बातचीत के बीच बढ़ा तनाव

Israel strikes Iran South Pars Gas Plant
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ईरान और इज़राइल के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। सीजफायर की उम्मीदों के बीच अचानक हुए एक बड़े हमले ने पूरे इलाके को हिला दिया। तेज धमाकों, काले धुएं और लगातार बढ़ते खतरे ने हालात को और तनावपूर्ण बना दिया है। बताया जा रहा है कि इस हमले का असर सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा असर वैश्विक बाजार और आम लोगों की जिंदगी पर भी पड़ सकता है। अब सबकी नजर अगला कदम क्या होगा, इस पर टिकी है।

दुनिया के सबसे बड़े गैस फील्ड पर इज़राइल का हमला

इज़राइल ने ईरान के साउथ पार्स पेट्रोकेमिकल प्लांट पर बड़ा हवाई हमला (Israel strikes Iran South Pars Gas Plant) किया, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग आधा हिस्सा संभालता है। इज़राइल के रक्षा मंत्री इज़राइल कैट्ज़ ने इसे ईरान की सबसे बड़ी पेट्रोकेमिकल सुविधा बताया। बता दें कि यह गैस क्षेत्र, दुनिया का सबसे बड़ा माना जाता है और क़तर के साथ साझा किया जाता है, जो फारस की खाड़ी के नीचे फैला हुआ है।

हमले के बाद तेहरान में कई धमाके सुनाई दिए और आसमान में काला धुआं छा गया। हालांकि यह सब ऐसे समय हुआ जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर बातचीत चल रही थी, जिससे हालात और बिगड़ गए।

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हमले में ईरान के बड़े कमांडर की मौत

इस हमले में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के खुफिया प्रमुख मेजर जनरल मजीद खदेमी और कुद्स फोर्स से जुड़े असगर बकेरी की मौत हो गई। इसके जवाब में ईरान ने इज़राइल के शहर हाइफा पर मिसाइल दागी, जिसमें एक रिहायशी इमारत पर हमला हुआ और चार लोगों की जान चली गई।

बढ़ते खतरे को देखते हुए कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब ने अपने हवाई रक्षा सिस्टम सक्रिय कर दिए हैं, ताकि मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोका जा सके।

अमेरिका की चुप्पी, तेल की कीमतों में उछाल

हमले पर United States की ओर से तुरंत कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump पहले ही चेतावनी दे चुके थे कि अगर ईरान ने खाड़ी क्षेत्र की ऊर्जा संरचना को निशाना बनाया तो अमेरिका जवाब देगा। दूसरी ओर, मिस्र, पाकिस्तान और तुर्की जैसे देशों ने 45 दिन के सीजफायर का प्रस्ताव दिया है ताकि बातचीत आगे बढ़ सके, लेकिन अब तक इस पर कोई सहमति नहीं बनी है।

इस पूरे घटनाक्रम का असर वैश्विक बाजार पर भी पड़ा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 109 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जो युद्ध शुरू होने के बाद लगभग 50 प्रतिशत बढ़ोतरी दर्शाती है। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष António Costa ने इस हमले की आलोचना करते हुए कहा कि नागरिक ढांचे पर हमला करना गैरकानूनी है और इससे शांति की कोशिशों को नुकसान पहुंचता है।

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बढ़ती हिंसा और नागरिकों पर असर

इस संघर्ष की वजह से आम लोगों पर भी बड़ा असर पड़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में अब तक 1900 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, हालांकि सरकार ने हाल के आंकड़े जारी नहीं किए हैं। इसके अलावा लेबनान में भी 1400 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं।

इज़राइली हमले लगातार तेहरान और क़ोम जैसे शहरों में हो रहे हैं, जहां रिहायशी इलाकों को भी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील कर रहा है, लेकिन जमीन पर हालात फिलहाल और बिगड़ते नजर आ रहे हैं।

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