जापान में 7.4 तीव्रता का भूकंप, देश पर गहराया सुनामी का खतरा
जापान में आए 7.4 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने पूरे देश को हिला दिया है। समुद्र के अंदर आए इस झटके के बाद सुनामी का खतरा भी मंडराने लगा, जिससे तटीय इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि प्रशासन तुरंत अलर्ट हो गया है, लेकिन हालात अभी भी संवेदनशील बने हुए हैं। आखिर कितना बड़ा है खतरा और क्या सुरक्षित हैं लोग?
समुद्र के नीचे आया जोरदार भूकंप
सोमवार शाम जापान के उत्तरी हिस्से में उस समय हड़कंप मच गया जब समुद्र के भीतर 7.4 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप (Japan Earthquake 7.4 Magnitude) आया। इसका केंद्र इवाते प्रांत के पास प्रशांत महासागर में था। झटके इतने शक्तिशाली थे कि सैकड़ों किलोमीटर दूर टोक्यो तक लोग इन्हें महसूस कर सके।
हालांकि सबसे चिंता की बात यह रही कि भूकंप की गहराई कम थी, जिसकी वजह से जमीन पर इसका असर ज्यादा देखने को मिला। हालात को देखते हुए जापान मौसम विभाग ने तुरंत इसे गंभीर मानकर अलर्ट जारी कर दिया, ताकि लोग समय रहते सतर्क हो सकें।
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सुनामी का खतरा बढ़ा, सरकार अलर्ट
भूकंप के तुरंत बाद समुद्र में हलचल तेज हो गई और सुनामी का खतरा पैदा हो गया, जहां एजेंसियों ने करीब 3 मीटर तक ऊंची लहरों की आशंका जताई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ तटीय इलाकों में शुरुआती लहरें नजर भी आईं, जिससे लोगों में डर का माहौल बन गया। प्रशासन ने साफ कहा है कि,
किसी तरह की लापरवाही न करें और तुरंत ऊंची जगहों पर चले जाएं, क्योंकि ये लहरें एक बार नहीं बल्कि बार-बार आ सकती हैं।
इसी बीच एहतियात के तौर पर बुलेट ट्रेन सेवाएं भी रोक दी गई हैं। दूसरी तरफ सरकार ने तेजी दिखाते हुए आपातकालीन टीम बना दी है, जो पूरे हालात पर नजर रख रही है, साथ ही बिजली और जरूरी सेवाओं की जांच भी जारी है ताकि किसी बड़े नुकसान को रोका जा सके। फिलहाल किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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क्यों बार-बार आते हैं जापान में भूकंप?
जापान दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां भूकंप सबसे ज्यादा आते हैं, और इसकी सबसे बड़ी वजह उसकी लोकेशन है। दरअसल, जापान प्रशांत महासागर के “रिंग ऑफ फायर” इलाके में स्थित है, जहां चार बड़ी टेक्टोनिक प्लेटें आपस में टकराती रहती हैं। यही कारण है कि यहां हर साल करीब 1500 भूकंप दर्ज किए जाते हैं, जो पूरी दुनिया के कुल भूकंपों का लगभग 18 प्रतिशत हैं।
हालांकि, इनमें से ज्यादातर झटके हल्के होते हैं और ज्यादा नुकसान नहीं करते, लेकिन जब बड़ा भूकंप आता है तो हालात गंभीर हो सकते हैं। गौरतलब है कि साल 2011 में आए 9.0 तीव्रता के भूकंप और उसके बाद आई सुनामी ने करीब 18,500 लोगों की जान ले ली थी और फुकुशिमा में बड़ा परमाणु हादसा भी हुआ था।
