होर्मुज संकट के बीच एक्शन में भारत, सऊदी पहुंचे रक्षा सलाहकार अजीत डोभाल

होर्मुज संकट के बीच एक्शन में भारत, सऊदी पहुंचे रक्षा सलाहकार अजीत डोभाल

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने बड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है। अचानक सऊदी अरब पहुंचे अजीत डोभाल के दौरे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य संकट से भारत की तेल सप्लाई पर असर पड़ सकता है? हालांकि अभी हालात पूरी तरह बिगड़े नहीं हैं, लेकिन वैश्विक बाजार में हलचल तेज हो चुकी है। ऐसे में यह दौरा सिर्फ एक बैठक नहीं, बल्कि आने वाले संकट को भांपने की रणनीति माना जा रहा है।

सऊदी अरब में उच्च स्तर की बैठक, कई बड़े मुद्दों पर चर्चा

बता दें कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल रविवार को रियाद पहुंचे (Ajit Doval Saudi Visit), जहां उनका स्वागत सऊदी अरब के राजनीतिक मामलों के उप मंत्री सऊद अल-सती ने किया, जो पहले भारत में राजदूत भी रह चुके हैं। इस दौरान डोभाल ने ऊर्जा मंत्री अब्दुलअजीज बिन सलमान, विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मुसाएद अल-ऐबान से मुलाकात की।

इन बैठकों में भारत और सऊदी अरब के रिश्तों के साथ-साथ क्षेत्रीय हालात और दोनों देशों के साझा हितों पर चर्चा हुई। हालांकि ज्यादा आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन साफ माना जा रहा है कि पश्चिम एशिया की बदलती स्थिति और उसके आगे के असर को लेकर गंभीर बातचीत हुई है।

भारत की बढ़ती चिंता की असली वजह

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं, और यही वजह है कि भारत की चिंता भी बढ़ रही है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल रास्तों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। भारत की बात करें तो करीब चालीस प्रतिशत तेल खाड़ी देशों से आता है, जो इसी रास्ते से होकर पहुंचता है।

हालांकि अभी यह मार्ग पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन अगर यहां थोड़ी भी रुकावट आती है तो भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं, जैसे तेल की सप्लाई प्रभावित होना और कीमतों का तेजी से बढ़ना। इसी खतरे को देखते हुए भारत लगातार बड़े तेल आपूर्ति करने वाले देशों के संपर्क में बना हुआ है, ताकि किसी भी स्थिति से निपटने की तैयारी पहले से की जा सके।

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच तेल बाजार में उथल-पुथल

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब पूरी दुनिया पर साफ दिखने लगा है। बता दें कि हाल ही में अमेरिका ने एक ईरानी जहाज को अपने कब्जे में लिया, जिसके बाद हालात और ज्यादा बिगड़ गए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक जहाज को कई बार चेतावनी दी गई थी, लेकिन जब उसने बात नहीं मानी तो कार्रवाई करनी पड़ी।

इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया और ब्रेंट क्रूड करीब 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, वहीं डब्ल्यूटीआई में भी तेजी देखी गई। हालांकि जानकारों का मानना है कि अगर तनाव और बढ़ता है तो तेल और महंगा हो सकता है।

इस बीच राहत की बात यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं, अप्रैल में पहली बैठक हो चुकी है और अब दूसरे दौर की उम्मीद जताई जा रही है।

क्या है भारत की रणनीति?

अजीत डोभाल का सऊदी अरब दौरा सिर्फ एक सामान्य मुलाकात नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भारत की बड़ी रणनीतिक तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल, भारत पहले से ही यह समझने की कोशिश में जुटा है कि आने वाले समय में पश्चिम एशिया की स्थिति किस तरफ जाएगी और इसका सीधा असर तेल की आपूर्ति पर कितना पड़ सकता है।

बता दें कि अभी हालात काबू में हैं, लेकिन अगर तनाव बढ़ता है तो भारत को महंगे ईंधन के साथ-साथ सप्लाई में रुकावट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, जिससे आम लोगों की जेब पर भी असर पड़ना तय है।

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