साबरमती नदी पर तैयार हुआ 12 मंजिला ऊंचाई वाला पुल, बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को मिली बड़ी रफ्तार

Bullet Train Project
1 min read

Bullet Train Project: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के निर्माण में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव सामने आया है। गुजरात के अहमदाबाद में साबरमती नदी के ऊपर 480 मीटर लंबे पुल का निर्माण पूरा कर लिया गया है।

यह पुल करीब 36 मीटर यानी लगभग 118 फीट ऊंचा है। इसकी ऊंचाई करीब 12 मंजिला इमारत जितनी है। इंजीनियरिंग के लिहाज से इसे 508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के कठिन निर्माण कार्यों में शामिल किया जा रहा है।

साबरमती और अहमदाबाद स्टेशन के बीच बना अहम पुल

नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी NHSRCL के अनुसार, यह पुल बुलेट ट्रेन के साबरमती टर्मिनल और अहमदाबाद रेलवे स्टेशन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करेगा। पुल साबरमती बुलेट ट्रेन टर्मिनल से करीब एक किलोमीटर और अहमदाबाद रेलवे स्टेशन से लगभग चार किलोमीटर की दूरी पर बनाया गया है।

इस पुल की खास बात इसकी लोकेशन भी है। इसका निर्माण पश्चिम रेलवे की व्यस्त अहमदाबाद-दिल्ली मुख्य रेल लाइन और मौजूदा शहरी परिवहन व्यवस्था के ऊपर से किया गया है। नीचे से चलने वाली ट्रेनों, ओवरहेड बिजली तारों और सड़क यातायात को ध्यान में रखते हुए पुल को काफी ऊंचाई पर तैयार किया गया है।

पुल के पिलरों की ऊंचाई करीब 36 मीटर रखी गई है। इससे नीचे मौजूद रेलवे लाइन और अन्य यातायात व्यवस्था के लिए जरूरी ऊर्ध्वाधर दूरी बनी रहती है।

आठ पिलरों पर टिका है 480 मीटर लंबा पुल

साबरमती नदी पर बने इस पुल को कुल आठ गोलाकार पिलरों का सहारा दिया गया है। प्रत्येक पिलर का व्यास करीब 6 से 6.5 मीटर के बीच है। नदी के जलप्रवाह और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए पिलरों की स्थिति भी विशेष तरीके से तय की गई है।

इनमें चार पिलर नदी के तल में बनाए गए हैं। दो पिलर नदी के किनारे और बाकी दो पिलर तटवर्ती जमीन पर स्थित हैं। इस डिजाइन का एक उद्देश्य नदी के अंदर पिलरों की संख्या को सीमित रखना भी है।

पुल पर सामान्य नदी पुलों की तुलना में लंबे स्पैन का इस्तेमाल किया गया है। बुलेट ट्रेन परियोजना के दूसरे नदी पुलों में आमतौर पर 40 मीटर तक के स्पैन इस्तेमाल किए जाते हैं, जबकि साबरमती पुल में 50 से 76 मीटर तक के स्पैन बनाए गए हैं।

इसके सुपरस्ट्रक्चर में 76 मीटर के पांच स्पैन और 50 मीटर के दो स्पैन शामिल हैं। लंबे स्पैन के कारण नदी के अंदर कम पिलर रखने में मदद मिली। इससे मानसून के दौरान पानी के बहाव और निकासी पर प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना को कम किया गया है।

बिना पारंपरिक मचान के तैयार किया गया पुल

साबरमती पुल का निर्माण इसलिए भी चुनौतीपूर्ण था क्योंकि नीचे गहरा पानी और व्यस्त रेलवे लाइन मौजूद थी। ऐसी स्थिति में पारंपरिक मचान या फॉल्सवर्क लगाकर पुल बनाना बेहद मुश्किल था।

इस चुनौती से निपटने के लिए इंजीनियरों ने ‘बैलेंस्ड कैंटिलीवर मेथड’ का इस्तेमाल किया। इस तकनीक में पुल के पिलर से दोनों दिशाओं में कंक्रीट सेगमेंट को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाया जाता है।

इन सेगमेंट को भारी केबलों की मदद से पोस्ट-टेंशनिंग तकनीक के जरिए मजबूती दी जाती है। इसके बाद पुल का डेक दोनों तरफ से आगे बढ़ता है और बीच में आकर जुड़ जाता है। इस तरीके से नीचे के जलप्रवाह और रेलवे यातायात को रोके बिना पुल का निर्माण किया जा सकता है।

गुजरात में 21 में से 18 नदी पुल पूरे

मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर की कुल लंबाई 508 किलोमीटर है। इस पूरे मार्ग पर 25 प्रमुख नदी पुल बनाए जाने हैं। इनमें 21 गुजरात और चार महाराष्ट्र में हैं।

साबरमती नदी पर पुल पूरा होने के साथ गुजरात में प्रस्तावित 21 नदी पुलों में से 18 का निर्माण पूरा हो चुका है। इससे पार्वती, तापी, नर्मदा और माही जैसी नदियों पर निर्माण के बाद अब साबरमती पुल भी परियोजना की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल हो गया है।

इस प्रगति से संकेत मिलता है कि बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का सिविल निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। अब ट्रैक बिछाने और ओवरहेड ट्रैक्शन सिस्टम से जुड़े कामों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। ऐसे में मुंबई और अहमदाबाद के बीच हाई स्पीड रेल सेवा शुरू करने की दिशा में परियोजना एक और महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ी है।

Jai Jagdamba News Whatsapp

ये भी पढ़ें:

पितृ दोष से हैं परेशान? इस सर्वपितृ अमावस्या करें ये आसान उपाय, मिल सकती है राहत

6 अक्टूबर से महंगी होंगी उड़ानें, टिकट बुक करने से पहले जान लें नया फ्यूल चार्ज, घरेलू से इंटरनेशनल उड़ानों तक असर

AIIMS Bhopal Vacancy 2026: डॉक्टरों के लिए AIIMS में नौकरी का मौका, ₹1.42 लाख से ज्यादा सैलरी, जानें योग्यता और आवेदन तरीका

तुलसी का पौधा घर में कहां रखें? इन जगहों पर रखने से बचने की मान्यता, जानें सही दिशा

About the Author

Netsha

Founder & Editor, जय जगदम्बा न्यूज
View all articles by Netsha →