भारत को मिली बड़ी ताकत, देश में बनेंगे अमेरिकी फाइटर जेट इंजन, रक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक डील

US India Fighter Jet Engine Deal
1 min read

भारत की रक्षा ताकत को नई उड़ान मिलने जा रही है। अमेरिका और भारत के बीच हुआ एक ऐतिहासिक समझौता अब देश को फाइटर जेट इंजन तकनीक के मामले में नई पहचान दिला सकता है। खास बात यह है कि पहली बार इतनी उन्नत अमेरिकी इंजन टेक्नोलॉजी भारत को ट्रांसफर की जा रही है, जिससे तेजस मार्क-2 और भविष्य के AMCA जैसे लड़ाकू विमान और ज्यादा ताकतवर बनेंगे। यह डील भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति के लिए बड़ा गेमचेंजर मानी जा रही है।

भारत में बनेंगे F414 फाइटर जेट इंजन

बता दें कि GE Aerospace और HAL ने F414 जेट इंजन के भारत में संयुक्त निर्माण के लिए तकनीकी समझौता किया है। सूत्रों के अनुसार इस डील (US India Fighter Jet Engine Deal) के तहत करीब 80 प्रतिशत मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स HAL को ट्रांसफर किए जाएंगे। यह इंजन भारतीय वायुसेना के लिए तैयार किए जा रहे तेजस मार्क-2 फाइटर जेट में लगाया जाएगा।

तेजस मार्क-2, मौजूदा तेजस मार्क-1A का ज्यादा शक्तिशाली और भारी संस्करण होगा। भारत पहले चरण में देश के भीतर 99 F414 इंजन बनाने की योजना पर काम कर रहा है। वहीं कुल आवश्यकता 120 से 130 तेजस मार्क-2 विमानों के लिए बताई जा रही है।

ये भी पढ़ें: दुश्मनों का काल बना भारत का नया मिसाइल ध्रुवास्त्र, 7 KM दूर बैठकर भी होगा सटीक हमला

AMCA और भविष्य के लड़ाकू विमानों को मिलेगा फायदा

यह डील केवल तेजस मार्क-2 तक सीमित नहीं है। यही F414 इंजन भारत के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम AMCA यानी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के शुरुआती दो स्क्वाड्रन में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत के भविष्य के स्वदेशी फाइटर जेट कार्यक्रमों को बड़ी मजबूती मिलेगी। GE Aerospace की वाइस प्रेसिडेंट रीटा फ्लेहर्टी ने इस डील को खास बताते हुए कहा कि,

दुनिया में बहुत कम कंपनियां इस स्तर की तकनीक विकसित कर सकती हैं और अब भारत को यह क्षमता दी जा रही है ताकि वह खुद यह काम कर सके।

क्यों खास है यह समझौता?

भारत लंबे समय से फाइटर जेट इंजन तकनीक में आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अब तक पूरी सफलता नहीं मिल सकी थी। भारत ने पहले भी इंजन निर्माण के लिए रूस और सोवियत संघ के साथ लाइसेंस आधारित उत्पादन किया था, लेकिन उसमें सीमित तकनीक ही साझा की गई थी।

वहीं मौजूदा F414 समझौते में तकनीक के साथ बौद्धिक संपदा अधिकारों का भी बड़ा हिस्सा भारत को दिया जा रहा है। इसे इसलिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि अमेरिका ने पहली बार किसी गैर-नाटो देश को इतनी उन्नत फाइटर जेट इंजन तकनीक ट्रांसफर करने का फैसला किया है।

भारत के कावेरी इंजन कार्यक्रम और HF-24 मरुत जैसे पुराने प्रयासों को देखते हुए यह समझौता देश के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। कावेरी इंजन परियोजना 1989 में शुरू हुई थी, लेकिन दशकों बाद भी वह किसी ऑपरेशनल फाइटर जेट को शक्ति नहीं दे सकी।

ये भी पढ़ें: -35°C में भी दुश्मन पर सटीक वार, भारतीय सेना को मिले नए कामीकाज़े ड्रोन, जानिए कैसे बदलेगा युद्ध का खेल

अगले दो साल में शुरू हो सकता है उत्पादन

जानकारी के अनुसार GE और HAL के बीच कीमत और वाणिज्यिक शर्तों पर चर्चा जारी है। उम्मीद है कि मौजूदा वित्त वर्ष के अंत तक औपचारिक अनुबंध पर हस्ताक्षर हो जाएंगे। इसके बाद HAL, GE की मदद से भारत में विशेष निर्माण सुविधा स्थापित करेगा। इस प्लांट को दो वर्षों के भीतर चालू करने का लक्ष्य रखा गया है।

अलग से GE Aerospace ने भारतीय वायुसेना के साथ F404-IN20 इंजनों के लिए भारत में मेंटेनेंस डिपो स्थापित करने का भी समझौता किया है। यह सुविधा तेजस फ्लीट की सर्विसिंग और रखरखाव को मजबूत करेगी। भारत के लिए यह कदम सिर्फ इंजन निर्माण नहीं, बल्कि रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत माना जा रहा है।

आने वाले वर्षों में इसका असर भारत की वायु शक्ति और रक्षा निर्यात दोनों पर देखने को मिल सकता है।

Jai Jagdamba News Whatsapp

About the Author

Veer Rai

Founder & Editor, जय जगदम्बा न्यूज

Veer Rai is the Founder and Editor-in-Chief of Jai Jagdamba News, a digital news platform covering Bihar and key developments across India. He oversees the publication’s editorial direction, content strategy, and digital growth, with a focus on accurate reporting, local issues, and reader-focused journalism. Committed to maintaining editorial standards and delivering clear, reliable, and relevant news to readers.

View all articles by Veer Rai →

2 thoughts on “भारत को मिली बड़ी ताकत, देश में बनेंगे अमेरिकी फाइटर जेट इंजन, रक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक डील”

Comments are closed.