विराट कोहली पर 5 करोड़ रुपये के दावे से बढ़ा विवाद, फलाहारी महाराज ने फिर उठाई जांच की मांग

Virat Kohli 5 Crore Claim Falahari Maharaj Request CBI Inquiry
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क्रिकेटर विराट कोहली को लेकर फलाहारी महाराज के कथित पांच करोड़ रुपये के भुगतान वाले दावे ने एक बार फिर विवाद खड़ा कर दिया है। कोहली के प्रवक्ता पहले ही इन आरोपों को झूठा और निराधार बता चुके हैं। इसके बावजूद फलाहारी महाराज ने अपने दावे को दोहराते हुए खातों की जांच और CBI जांच की मांग की है।

विराट कोहली को लेकर क्या है दावा?

फलाहारी महाराज ने अपने बयान में दावा किया है कि,

विराट कोहली जब पहली बार प्रेमानंद महाराज के पास पहुंचे थे, तब कथित तौर पर पांच करोड़ रुपये की रकम दी गई थी। इस रकम का एक हिस्सा बैंक खाते के जरिए और दूसरा हिस्सा नकद दिया गया।

फलाहारी महाराज के दावे के मुताबिक, करीब दो करोड़ रुपये प्रेमानंद महाराज के एक सेवादार के खाते से दिए गए थे। इसके अलावा तीन करोड़ रुपये कथित तौर पर नकद कोहली के आवास तक पहुंचाए गए। इस तरह उन्होंने कुल रकम पांच करोड़ रुपये बताई है।

हालांकि, इन दावों के समर्थन में अभी तक कोई सार्वजनिक रसीद, बैंक स्टेटमेंट, ट्रांजैक्शन आईडी या गवाह का शपथपत्र सामने नहीं आया है। खासकर नकद भुगतान के दावे की स्वतंत्र पुष्टि करना उपलब्ध दस्तावेजों के बिना मुश्किल है।

कोहली के प्रवक्ता इस पूरे आरोप को पहले ही खारिज कर चुके हैं। इसलिए फिलहाल यह मामला एक पक्ष के आरोप और दूसरे पक्ष के खंडन तक ही सीमित है।

फलाहारी महाराज ने की खातों के जांच की मांग क्यों उठी?

विराट कोहली के प्रवक्ता की ओर से आरोपों को झूठा और निराधार बताए जाने के बाद फलाहारी महाराज ने जांच की मांग को और तेज कर दिया। उनका कहना है कि,

यदि उनके द्वारा लगाए गए आरोप गलत हैं, तो संबंधित खातों की जांच कर स्थिति साफ की जा सकती है।

फलाहारी महाराज ने ट्रस्ट से जुड़े बैंक खातों की पड़ताल की मांग की है। उनका तर्क है कि अगर वास्तव में किसी खाते से इतनी बड़ी रकम का लेनदेन हुआ है, तो बैंक रिकॉर्ड से इसकी जानकारी सामने आ सकती है।

हालांकि, केवल जांच की मांग किए जाने से कोई लेनदेन साबित नहीं होता। किसी बैंक खाते की जांच के लिए संबंधित खाता, लेनदेन की तारीख और ट्रांजैक्शन से जुड़े रिकॉर्ड जैसे दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे।

अभी तक किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी द्वारा इस मामले में औपचारिक जांच शुरू किए जाने की पुष्टि सार्वजनिक तौर पर नहीं हुई है। इसलिए पांच करोड़ रुपये के कथित भुगतान को फिलहाल प्रमाणित लेनदेन नहीं माना जा सकता।

विराट कोहली के बारे में फलाहारी महाराज ने और क्या कहा?

फलाहारी महाराज ने अपने बयान में विराट कोहली के मौजूदा व्यवहार का भी जिक्र किया। उन्होंने कोहली को साधक बताते हुए कहा कि,

वह अब साधकों के भोजन की व्यवस्था संभालते हैं और उनके अनुसार कोहली एक अच्छे व्यक्ति बन चुके हैं।

उन्होंने यह भी दावा किया कि बाद में विराट कोहली प्रेमानंद महाराज के भक्त बन गए और कथित तौर पर पहले दी गई रकम से कई गुना ज्यादा पैसा वापस कर दिया गया।

हालांकि, इस दावे के संबंध में भी कोई स्वतंत्र लेखा रिकॉर्ड या सार्वजनिक दस्तावेज सामने नहीं आया है। कथित वापसी की रकम, तारीख और भुगतान का माध्यम भी स्पष्ट नहीं किया गया है। यहां यह समझना जरूरी है कि किसी व्यक्ति का किसी धार्मिक गुरु का भक्त होना या भोजन व्यवस्था में सहयोग करना अपने आप में कथित आर्थिक लेनदेन का प्रमाण नहीं है। दोनों मामलों की अलग-अलग पुष्टि जरूरी होगी।

CBI जांच की मांग पर क्या स्थिति है?

फलाहारी महाराज ने विवाद की जांच CBI से कराने की मांग भी की है। उनका कहना है कि,

जांच होने पर पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है।

दूसरी ओर, विराट कोहली के प्रवक्ता आरोपों को पहले ही पूरी तरह खारिज कर चुके हैं। CBI की जांच की मांग और CBI द्वारा जांच शुरू किया जाना दो अलग बातें हैं। किसी मामले में जांच शुरू होने के लिए संबंधित कानूनी प्रक्रिया और सक्षम स्तर से कार्रवाई जरूरी होती है। फिलहाल इस मामले में CBI जांच शुरू होने की कोई आधिकारिक सूचना सामने नहीं आई है।

अभी तक क्या साफ है?

इस पूरे विवाद में पांच करोड़ रुपये (Virat Kohli 5 Crore Claim) का आंकड़ा, दो करोड़ रुपये के कथित बैंक लेनदेन और तीन करोड़ रुपये नकद देने का दावा फलाहारी महाराज के बयान पर आधारित है। कोहली पक्ष इन आरोपों को झूठा और निराधार बता चुका है। अभी तक कथित भुगतान की स्वतंत्र पुष्टि करने वाला कोई बैंक रिकॉर्ड, रसीद या जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है।

प्रेमानंद महाराज के आश्रम या ट्रस्ट की ओर से इस रकम की पुष्टि या खंडन की जानकारी भी इस विवरण में उपलब्ध नहीं है। ऐसे में फिलहाल पांच करोड़ रुपये के कथित भुगतान को सिद्ध तथ्य मानना सही नहीं होगा। जब तक कोई सक्षम एजेंसी दस्तावेजों की जांच कर निष्कर्ष नहीं देती, तब तक यह मामला आरोप और खंडन के स्तर पर ही है।

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Adarsh Pandey

Founder & Editor, जय जगदम्बा न्यूज
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