भारत में अब 100% एथेनॉल से चलेंगी गाड़ियां! सरकार ने दी मंजूरी, पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता घटाने की बड़ी तैयारी
भारत में ईंधन के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने 100 प्रतिशत एथेनॉल से चलने वाले वाहनों को कानूनी मंजूरी दे दी है, जिससे आने वाले समय में कई कारें और बाइक बिना पेट्रोल या डीजल के सड़क पर दौड़ती नजर आ सकती हैं। सरकार का मानना है कि यह कदम तेल आयात पर निर्भरता कम करने, किसानों को फायदा पहुंचाने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने में मदद करेगा।
आखिर 100% एथेनॉल फ्यूल क्या है, कौन-कौन सी कंपनियां ऐसे वाहन लॉन्च करने जा रही हैं और इसका आम लोगों पर क्या असर पड़ सकता है, आइए जानते हैं।
100% एथेनॉल को मिली कानूनी मंजूरी
नितिन गडकरी ने बताया कि उन्होंने शुक्रवार शाम 8 बजे उस फाइल पर हस्ताक्षर किए, जिससे देश में 100% एथेनॉल के उपयोग को कानूनी स्वीकृति मिल गई। यह कदम भारत के फ्लेक्स-फ्यूल और वैकल्पिक ऊर्जा आधारित परिवहन मिशन को नई गति देने वाला माना जा रहा है। गडकरी ने कहा कि,
भारत धीरे-धीरे ऐसे परिवहन मॉडल की ओर बढ़ रहा है जो आयातित जीवाश्म ईंधन पर कम निर्भर हो। एथेनॉल आधारित वाहन न केवल पर्यावरण के लिए बेहतर होंगे बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेंगे।
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कई कंपनियां लॉन्च करेंगी E-100 वाहन
भारत में 100 प्रतिशत एथेनॉल ईंधन को मंजूरी मिलने के साथ ही कई बड़ी वाहन निर्माता कंपनियां इस नई तकनीक पर तेजी से काम कर रही हैं। मारुति सुजुकी पहले ही अपनी लोकप्रिय वैगनआर का ऐसा मॉडल पेश कर चुकी है जो पूरी तरह एथेनॉल पर चल सकता है। वहीं, हीरो मोटोकॉर्प ने भी दो ऐसी मोटरसाइकिलें तैयार की हैं जिनमें पेट्रोल की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इसके अलावा टोयोटा, सुजुकी, एमजी और हुंडई जैसी कंपनियां भी अगले कुछ हफ्तों में एथेनॉल आधारित वाहन लॉन्च करने की तैयारी में हैं। ऐसे में आने वाले समय में ग्राहकों को पेट्रोल और डीजल वाहनों के अलावा एक नया और वैकल्पिक विकल्प मिलने की उम्मीद है।
100 प्रतिशत एथेनॉल फ्यूल क्या है?
100 प्रतिशत एथेनॉल फ्यूल एक ऐसा जैव ईंधन है जिसे गन्ना, मक्का और अन्य कृषि फसलों से तैयार किया जाता है। भारत में इसका सबसे बड़ा स्रोत गन्ने से बनने वाला शीरा है। अब तक एथेनॉल का इस्तेमाल पेट्रोल में मिलाकर किया जाता था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत कुछ विशेष वाहनों को पूरी तरह एथेनॉल पर चलाया जा सकेगा।
इसके लिए फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक वाली गाड़ियां विकसित की गई हैं, जो पेट्रोल, एथेनॉल या दोनों के मिश्रण पर आसानी से चल सकती हैं। सरकार का मानना है कि इससे विदेशी तेल पर निर्भरता कम होगी और देश में स्वच्छ व वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा मिलेगा।
आम लोगों के लिए कितना फायदेमंद है एथेनॉल?
100 प्रतिशत एथेनॉल ईंधन को मंजूरी (100 Percent Ethanol Fuel Approved India) मिलने से सिर्फ वाहन क्षेत्र ही नहीं, बल्कि किसानों और देश की अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। एथेनॉल के बढ़ते इस्तेमाल से गन्ने जैसी फसलों की मांग बढ़ सकती है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर मिल सकता है।
वहीं, भारत को विदेशों से तेल खरीदने पर होने वाले भारी खर्च में भी कुछ राहत मिल सकती है। इसके अलावा, पेट्रोल और डीजल के मुकाबले एथेनॉल को अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन माना जाता है, जिससे प्रदूषण कम करने की दिशा में मदद मिल सकती है।
हालांकि, इस योजना की असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि भविष्य में एथेनॉल की उपलब्धता, उसकी कीमत और इस तकनीक से जुड़े वाहनों का विस्तार कितनी तेजी से होता है।
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भारत के तेल आयात बिल पर क्या पड़ेगा असर?
भारत अपनी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने या वैश्विक तनाव पैदा होने का असर सीधे देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। यही वजह है कि सरकार अब एथेनॉल जैसे वैकल्पिक ईंधन को तेजी से बढ़ावा दे रही है।
इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने 22 प्रतिशत, 25 प्रतिशत, 27 प्रतिशत और 30 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क को शून्य कर दिया है। साथ ही सड़क एवं अवसंरचना उपकर और कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर जैसी कई शुल्क श्रेणियों में भी राहत दी गई है।
माना जा रहा है कि इससे एथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा और भविष्य में देश की तेल आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
हाइड्रोजन बसों से सफर का सपना भी होगा साकार
एथेनॉल आधारित वाहनों को बढ़ावा देने के साथ-साथ सरकार अब हरित हाइड्रोजन पर भी तेजी से काम कर रही है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि,
जल्द ही नागपुर में एक विशेष परियोजना शुरू की जाएगी, जिसमें हाइड्रोजन ईंधन स्टेशन और दो हाइड्रोजन से चलने वाली बसें शुरू होंगी।
खास बात यह है कि आम लोग भी इन बसों में सफर कर सकेंगे। यह हाइड्रोजन पानी से तैयार की जाएगी, जिससे प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी। वहीं, 100 प्रतिशत एथेनॉल ईंधन को मिली मंजूरी को भारत के परिवहन क्षेत्र में बड़े बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है।
इससे विदेशी तेल पर निर्भरता घटाने, किसानों को नए अवसर देने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। आने वाले समय में एथेनॉल और हाइड्रोजन से चलने वाले वाहनों की बढ़ती संख्या देश की ऊर्जा व्यवस्था को नई दिशा दे सकती है।
