भयानक होने वाली है मिडिल ईस्ट की जंग, ईरान के खिलाफ युद्ध में उतर सकते हैं 2 और देश

Saudi Arabia UAE Iran War क्या बढ़ने वाली है जंग Middle East में बड़ा खतरा
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अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग अब खतरनाक मोड़ लेती दिख रही है। ताजा रिपोर्ट्स में सऊदी अरब और यूएई की संभावित एंट्री ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन हालात तेजी से बदल रहे हैं। इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप के रुख में नरमी भी नजर आई है। सवाल यही है कि क्या यह युद्ध थमेगा या अब और बड़े स्तर पर भड़कने वाला है?

सऊदी अरब और UAE की बढ़ती भूमिका से बढ़ा तनाव

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अमेरिका का साथ (Saudi Arabia UAE Iran War) देने के लिए कुछ अहम कदम उठाए हैं। बताया जा रहा है कि सऊदी अरब ने अपने किंग फाहद एयर बेस तक अमेरिका को पहुंच देने पर सहमति जताई है। हालांकि, सऊदी अरब पहले इस तरह के इस्तेमाल से इनकार करता रहा है, इसलिए यह बदलाव काफी अहम माना जा रहा है।

वहीं, UAE ने ईरान से जुड़े कुछ ठिकानों पर कार्रवाई करते हुए एक अस्पताल और क्लब को बंद कर दिया है। माना जा रहा है कि ये जगहें तेहरान के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण थीं। इसके अलावा, कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि ईरान पर हमले में इस्तेमाल की गई मिसाइलें बहरीन से दागी गईं थीं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

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कूटनीतिक मोर्चे पर भी बढ़ी सख्ती

बता दें कि सिर्फ सैन्य ही नहीं, कूटनीतिक स्तर पर भी तनाव तेजी से बढ़ रहा है। सऊदी अरब (Saudi Arabia) ने ईरान के सैन्य अटैची और चार दूतावास कर्मचारियों को देश छोड़ने का आदेश दे दिया है। सऊदी अरब का आरोप है कि ईरान उसकी क्षेत्रीय संप्रभुता का उल्लंघन कर रहा है।

दूसरी ओर, संयुक्त अरब अमीरात ने भी संकेत दिए हैं कि उसकी हवाई रक्षा प्रणाली ईरान की ओर से हो रहे हमलों को रोकने में लगी हुई है। इन घटनाओं से साफ है कि क्षेत्र में टकराव का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। हालांकि, अभी तक सऊदी अरब और यूएई की ओर से सीधे युद्ध में शामिल होने की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन उनके कदम इस दिशा में इशारा जरूर कर रहे हैं।

ट्रंप का बदला रुख, क्या निकल सकता है समाधान?

इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने रुख में थोड़ा बदलाव दिखाया है। उन्होंने ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने के लिए दी गई समयसीमा बढ़ा दी है और कहा है कि अमेरिका अगले पांच दिनों तक ईरानी बिजली संयंत्रों पर हमले नहीं करेगा।

ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि इस युद्ध का समाधान बातचीत से निकाला जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी प्रतिनिधि एक सम्मानित ईरानी नेता के साथ बातचीत कर रहे हैं।

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हालांकि, ईरान की ओर से इस तरह की किसी भी बातचीत से इनकार किया गया है। ऐसे में यह साफ नहीं है कि कूटनीतिक प्रयास कितने सफल होंगे। गौरतलब है कि यह युद्ध अब अपने चौथे सप्ताह में पहुंच चुका है और इसमें 2000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है।

इसके अलावा, तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है और दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर खतरा मंडरा रहा है। अगर यह जलमार्ग बंद होता है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

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