ईरान पर अमेरिका का बड़ा पलटवार, ट्रंप की कार्रवाई से मिडिल ईस्ट में फिर भड़का तनाव

US launches strikes on Iran: ईरान पर अमेरिका का बड़ा हमला, ट्रंप का जवाब
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मध्य पूर्व में हालात एक बार फिर तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। ईरान के मिसाइल हमले के सिर्फ एक दिन बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान से जुड़े कई ठिकानों पर हवाई हमले कर दिए। इस घटनाक्रम के बाद पूरे क्षेत्र में बड़े युद्ध की आशंका और गहरी हो गई है।

हालात सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं हैं। इराक, जॉर्डन, सऊदी अरब और मिस्र में भी तनाव बढ़ गया है, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने दुनिया की अर्थव्यवस्था को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।

ईरान के हमले के बाद अमेरिका का बड़ा जवाब

अमेरिकी सेना ने बुधवार को पुष्टि की कि उसने ईरान से जुड़े कई सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की (US launches strikes on Iran) है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक यह कार्रवाई ईरान की ओर से अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाकर किए गए मिसाइल हमले के जवाब में की गई।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही साफ कर चुके थे कि यदि अमेरिकी सेना पर हमला हुआ तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। एयरस्ट्राइक के बाद ट्रंप ने कहा कि अब जवाब देने की बारी अमेरिका की थी और जरूरत पड़ने पर आगे भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।

इससे पहले अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के कई ठिकानों को भी निशाना बनाया था। इन हमलों में कम से कम 20 लड़ाकों और छह ईरानी सलाहकारों के मारे जाने की जानकारी सामने आई है।

जॉर्डन से इराक तक बढ़ा सैन्य तनाव

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि उसने जॉर्डन के मुवाफ्फाक सल्ती एयर बेस पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। यह एयर बेस अमेरिका के लिए मध्य पूर्व का एक अहम सैन्य केंद्र माना जाता है। जॉर्डन की सेना ने कहा कि,

सभी पांच मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया गया और किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली।

उधर सऊदी अरब ने आरोप लगाया कि इराक की ईरान समर्थित मिलिशिया ने उसके तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। दूसरी तरफ यमन के हूती विद्रोहियों ने भी सऊदी ऊर्जा सुविधाओं पर हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया।

अमेरिका और सऊदी अरब की संयुक्त कार्रवाई पर इराक सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। बगदाद ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए विरोध दर्ज कराया है।

दुनिया क्यों बढ़ी चिंता में?

लगातार बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक बाजारों पर भी दिखने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 7.3 प्रतिशत बढ़कर 88.093 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। विशेषज्ञों का कहना है कि,

यदि अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसकी सबसे बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल गुजरता है।

इसी बीच मिस्र के दमिएटा बंदरगाह पर प्राकृतिक गैस से जुड़े दो जहाजों में ड्रोन हमलों के बाद आग लगने की खबर भी सामने आई है। हालांकि इन हमलों की जिम्मेदारी अब तक किसी ने नहीं ली है।

तनाव कम कराने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन लगातार हो रहे हमलों ने युद्धविराम की उम्मीदों को कमजोर कर दिया है। ऐसे में पूरी दुनिया की नजर अब मध्य पूर्व के अगले घटनाक्रम पर टिकी हुई है।

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Veer Rai

Founder & Editor, जय जगदम्बा न्यूज

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