L&T को मिला ₹10,000 करोड़ तक का ऑर्डर, जानिए मिडिल ईस्ट में कंपनी क्या बनाने जा रही है

L&T Middle East BESS Order: लार्सन एंड टुब्रो (L&T) को मिडिल ईस्ट से एक और बड़ा ऑर्डर मिला है। कंपनी की रिन्यूएबल एनर्जी यूनिट को तीन बड़े BESS प्रोजेक्ट विकसित करने का काम मिला है। इन प्रोजेक्ट्स की कुल स्टोरेज क्षमता 6 गीगावॉट-घंटे होगी और ऑर्डर की वैल्यू ₹10,000 करोड़ तक बताई गई है।
L&T को मिला 6 GWh क्षमता वाले तीन BESS प्रोजेक्ट का ऑर्डर
लार्सन एंड टुब्रो ने एक्सचेंज फाइलिंग के जरिए बताया कि उसकी रिन्यूएबल एनर्जी से जुड़ी इकाई को मिडिल ईस्ट में तीन बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) प्रोजेक्ट्स का बड़ा ऑर्डर मिला है। कंपनी ने इसे एक प्रमुख ऑर्डर बताया है, जिसकी कीमत ₹10,000 करोड़ तक हो सकती है।
इन तीनों प्रोजेक्ट्स की संयुक्त बैटरी स्टोरेज क्षमता 6 गीगावॉट-घंटे होगी। प्रत्येक प्रोजेक्ट में चार घंटे की BESS प्रणाली लगाई जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य रिन्यूएबल एनर्जी से पैदा होने वाली अतिरिक्त बिजली को स्टोर करना और जरूरत के समय, खासकर पीक डिमांड के दौरान, उसे ग्रिड में वापस भेजना है।
इस तरह की व्यवस्था बिजली की मांग और सप्लाई के बीच संतुलन बनाने में मदद करती है। साथ ही इससे पावर ग्रिड की स्थिरता को मजबूत करने में भी मदद मिल सकती है। L&T के अनुसार,
इन सिस्टम में लिक्विड कूलिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे ज्यादा पावर डेंसिटी हासिल करने के साथ सुरक्षा बेहतर करने और बैटरी सिस्टम की ऑपरेटिंग लाइफ बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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प्रोजेक्ट में सुरक्षा और समय पर काम पूरा करने पर जोर
L&T ने कहा कि,
इस तरह के बड़े प्रोजेक्ट्स में प्लांट के प्रदर्शन, कर्मचारियों की तैनाती, सुरक्षा, गुणवत्ता और तय समय के भीतर काम पूरा करने जैसी कई महत्वपूर्ण जरूरतें होती हैं।
कंपनी के मुताबिक यह ऑर्डर मिडिल ईस्ट के ग्राहकों के बीच L&T की इंजीनियरिंग क्षमता और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट पर भरोसे को भी दिखाता है। कंपनी पहले से ही इस क्षेत्र में कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है।
BESS (Battery Energy Storage System) का इस्तेमाल रिन्यूएबल एनर्जी के बढ़ते उपयोग के साथ तेजी से महत्वपूर्ण हो रहा है। सोलर और दूसरी रिन्यूएबल ऊर्जा से उत्पादन हर समय एक जैसा नहीं रहता। ऐसे में अतिरिक्त बिजली को बैटरी में स्टोर करके बाद में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे बिजली की उपलब्धता को अधिक बेहतर तरीके से मैनेज करने में मदद मिलती है।
इससे पहले भी मिडिल ईस्ट से मिला था बड़ा प्रोजेक्ट
L&T को हाल ही में मिडिल ईस्ट से एक और बड़ा प्रोजेक्ट मिला था। कंपनी की EPC इकाई L&T Energy Hydrocarbon Onshore को एक प्रमुख ग्राहक से गैस कंप्रेशन फैसिलिटीज प्रोजेक्ट का ऑर्डर मिला। एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, इस प्रोजेक्ट में गैस कंप्रेशन प्लांट्स के लिए इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन यानी EPC का काम शामिल है।
इसमें गैस इनलेट फैसिलिटीज, गैस कंप्रेशन सिस्टम, कंडेनसेट और प्रोड्यूस्ड वॉटर हैंडलिंग सिस्टम, प्रोपेन रेफ्रिजरेशन सिस्टम और दूसरी जरूरी सुविधाएं शामिल होंगी। ये सुविधाएं नई ऑनशोर इंस्टॉलेशन के लिए विकसित की जाएंगी। इनका इस्तेमाल लागू ग्राहक मानकों, कोड और प्रोजेक्ट जरूरतों के अनुसार सल्फर युक्त प्राकृतिक गैस (Sour Gas) को प्रोसेस करने के लिए किया जाएगा।
गैस कंप्रेशन प्लांट्स की बिजली जरूरत को पूरा करने के लिए L&T का विद्युत पारेषण एवं वितरण कारोबार दो 230 kV के बेहद उच्च वोल्टेज वाले सबस्टेशन भी तैयार करेगा।
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L&T शेयर का हाल
25 अगस्त को उपलब्ध जानकारी के अनुसार L&T का शेयर करीब ₹4,108.35 पर कारोबार कर रहा था। यह पिछले बंद भाव ₹4,085.30 के मुकाबले ₹23.05 यानी 0.56 प्रतिशत की बढ़त थी। BSE के आंकड़ों के मुताबिक 25 अगस्त को कंपनी का बाजार पूंजीकरण करीब ₹5,65,480.96 करोड़ था। मिडिल ईस्ट से लगातार मिल रहे बड़े एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर ऑर्डर L&T के कारोबार के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

