तुर्की-इराक तेल पाइपलाइन पर हुआ बड़ा समझौता, अब एक साल तक नहीं रुकेगी कच्चे तेल की सप्लाई

Turkey-Iraq Oil Pipeline Agreement
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Turkey-Iraq Oil Pipeline Agreement: दुनिया में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच तुर्की और इराक ने एक अहम फैसला लिया है। दोनों देशों ने इराक-तुर्की कच्चा तेल पाइपलाइन के संचालन को अगले एक साल तक जारी रखने के लिए नया समझौता किया है। इस समझौते से न केवल तेल आपूर्ति बनी रहेगी, बल्कि दोनों देशों को भविष्य के लिए एक बड़ा और दीर्घकालिक ऊर्जा समझौता तैयार करने का भी समय मिलेगा।

तुर्की और इराक के बीच एक साल के लिए नई सहमति

तुर्की के ऊर्जा मंत्री अलपरसलान बायराक्तर ने शनिवार को जानकारी दी कि तुर्की और इराक ने इराक-तुर्की कच्चा तेल पाइपलाइन के संचालन को एक साल तक जारी रखने पर सहमति बना ली है। यह समझौता उस पुराने समझौते की जगह लेगा, जिसकी अवधि इसी सप्ताह समाप्त हो गई थी।

ऊर्जा मंत्री ने बताया कि अंकारा में इराक के तेल मंत्री बासेम मोहम्मद खुदैर और उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक सकारात्मक रही। इसी बैठक के बाद दोनों देशों के बीच नया समझौता हुआ।

यह समझौता तुर्की की सरकारी ऊर्जा कंपनी BOTAS और इराक की सरकारी तेल कंपनियों SOMO तथा NOC के बीच हुआ है। इसके तहत हर दिन 7.5 लाख बैरल कच्चे तेल के ट्रांजिट की क्षमता तय की गई है। तुर्की का कहना है कि इस अवधि में दोनों देश एक व्यापक और लंबे समय के समझौते पर भी बातचीत जारी रखेंगे।

इराक-तुर्की पाइपलाइन की क्षमता कितनी है?

इराक-तुर्की कच्चा तेल पाइपलाइन इराक के प्रमुख तेल क्षेत्रों को तुर्की के भूमध्यसागरीय बंदरगाह जेहान (Ceyhan) से जोड़ती है। इस पाइपलाइन की अधिकतम परिवहन क्षमता करीब 15 लाख बैरल प्रतिदिन है। हालांकि, मौजूदा समय में इसका पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है।

तुर्की के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, फिलहाल इस पाइपलाइन के जरिए लगभग 1.7 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल की ढुलाई हो रही है। इसमें अधिकांश तेल इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र के तेल क्षेत्रों से आता है।

तुर्की की योजना भविष्य में इस पाइपलाइन का पूरी क्षमता के साथ इस्तेमाल करने की है। इसके लिए इराक के दक्षिणी तेल क्षेत्रों से निकलने वाले कच्चे तेल को भी इसी मार्ग से निर्यात करने की संभावना पर काम किया जा रहा है। यदि यह योजना सफल होती है, तो दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग मजबूत होगा और आर्थिक लाभ भी बढ़ने की उम्मीद है।

पश्चिम एशिया में तनाव के बीच क्यों बढ़ी इस पाइपलाइन की अहमियत?

हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव ने तेल आपूर्ति पर बड़ा असर डाला है। क्षेत्र के समुद्री मार्गों में बाधाएं आने के कारण इराक को कच्चे तेल के निर्यात के लिए वैकल्पिक रास्तों की जरूरत महसूस हुई।

साल की शुरुआत में होर्मुज जलडमरूमध्य में आई रुकावटों के बाद इराक को अपने तेल निर्यात के लिए दूसरे विकल्प तलाशने पड़े। फरवरी के अंत में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद खाड़ी क्षेत्र से होने वाला तेल निर्यात भी प्रभावित हुआ, जिससे इराक की तेल आय में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

रिपोर्टों के अनुसार, इराक की मासिक तेल आय लगभग 6 अरब डॉलर से घटकर 2 अरब डॉलर से भी नीचे पहुंच गई थी। इससे यह स्पष्ट हो गया कि वैकल्पिक पाइपलाइन और निर्यात मार्ग किसी भी देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं।

इसी दौरान इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र के कई तेल क्षेत्रों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों की घटनाएं भी सामने आईं, जिससे तेल उत्पादन और आपूर्ति पर भी असर पड़ा।

तुर्की-इराक की दीर्घकालिक ऊर्जा साझेदारी को मिलेगा बढ़ावा

इन परिस्थितियों के बीच इराक-तुर्की पाइपलाइन का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने इस समझौते का स्वागत करते हुए इसे दोनों देशों के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक उपलब्धि बताया।

उन्होंने कहा कि भविष्य में दोनों देश केवल तेल ही नहीं, बल्कि बिजली, जल संसाधन और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे।

एक साल के लिए हुआ यह नया समझौता दोनों देशों को दीर्घकालिक ऊर्जा साझेदारी पर व्यापक सहमति बनाने का समय देगा। यदि भविष्य में बड़ा समझौता होता है और पाइपलाइन का पूरा उपयोग शुरू हो जाता है, तो इससे तुर्की और इराक के बीच आर्थिक सहयोग के साथ-साथ क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत हो सकती है।

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