टाटा का बड़ा दांव! अब भारत में कंपनी खुद बनाएगी LFP बैटरी सेल, चीन पर निर्भरता होगी कम

Tata Battery Cell Manufacturing: टाटा अब भारत में खुद बनाएगी बैटरी सेल, चीन पर निर्भरता होगी कम
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Tata Battery Cell Manufacturing: भारत में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और बैटरी इंडस्ट्री के लिए बड़ा बदलाव होने की तैयारी है। टाटा समूह की बैटरी कंपनी एग्राटास पहली बार अपनी तकनीक से LFP (Lithium Iron Phosphate) Battery Cell विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब चीन ने बैटरी निर्माण से जुड़ी तकनीकों के निर्यात पर सख्ती बढ़ा दी है। अगर कंपनी अपनी योजना में सफल रहती है, तो भारत की विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम हो सकती है और देश में घरेलू बैटरी निर्माण को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

चीन की सख्ती के बीच टाटा ने क्यों उठाया यह कदम?

रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा समूह की बैटरी कंपनी एग्राटास एनर्जी स्टोरेज सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड गुजरात के साणंद में बन रहे अपने बैटरी प्लांट में LFP (Lithium Iron Phosphate) बैटरी सेल के लिए एक पायलट प्रोडक्शन लाइन स्थापित कर रही है। इसका मकसद बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू करने से पहले बैटरी सेल की गुणवत्ता, प्रदर्शन और निर्माण प्रक्रिया का परीक्षण करना है।

इस परियोजना में भारतीय, दक्षिण कोरियाई और चीनी इंजीनियरों की टीम मिलकर काम करेगी। शुरुआती चरण में तैयार होने वाले बैटरी सेल की जांच की जाएगी और निर्माण प्रक्रिया को बेहतर बनाया जाएगा। इसके बाद ही कंपनी व्यावसायिक उत्पादन शुरू करेगी।

टाटा का यह कदम ऐसे समय पर सामने आया है, जब चीन ने बैटरी निर्माण से जुड़ी महत्वपूर्ण तकनीकों के निर्यात पर पहले से अधिक सख्त नियंत्रण लागू कर दिए हैं। इसके कारण भारतीय कंपनियों के लिए चीनी कंपनियों से तकनीकी लाइसेंस हासिल करना पहले की तुलना में काफी मुश्किल हो गया है।

ऐसे हालात में एग्राटास ने बाहरी तकनीक पर निर्भर रहने के बजाय अपनी तकनीक विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला किया है। अगर कंपनी इस प्रयास में सफल रहती है, तो भविष्य में भारत में बैटरी निर्माण के लिए विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम हो सकती है और देश का घरेलू बैटरी मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम भी मजबूत हो सकता है।

अपनी तकनीक विकसित करना क्यों है टाटा के लिए चुनौती?

अपनी तकनीक विकसित करना किसी भी कंपनी के लिए आसान नहीं होता। इसमें अधिक निवेश, लंबा रिसर्च और परीक्षण की जरूरत पड़ती है। रिपोर्ट के अनुसार, एग्राटास के अधिकारियों ने माना कि चीन से तकनीकी लाइसेंस मिलना अब मुश्किल है। इसलिए कंपनी ने इन-हाउस तकनीक विकसित करने का रास्ता चुना है।

हालांकि इससे लागत और उत्पादन शुरू होने में अधिक समय लग सकता है, लेकिन लंबे समय में इससे कंपनी तकनीकी रूप से अधिक आत्मनिर्भर बन सकती है। यही वजह है कि अपनी तकनीक विकसित करने का यह फैसला टाटा के लिए चुनौती भी है और लंबे समय में एक बड़ा रणनीतिक निवेश भी माना जा रहा है।

LFP Battery क्या होती है?

LFP यानी Lithium Iron Phosphate Battery एक ऐसी बैटरी तकनीक है, जिसे कम लागत, बेहतर सुरक्षा और लंबी लाइफ के लिए जाना जाता है। यह अन्य कई बैटरी तकनीकों की तुलना में अधिक स्थिर मानी जाती है। इसी वजह से इसका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के साथ-साथ Energy Storage सिस्टम में भी तेजी से बढ़ रहा है।

LFP और NMC बैटरी में क्या है अंतर?

फीचरLFP BatteryNMC Battery
कीमतकमअधिक
सुरक्षाबेहतरअच्छी
ड्राइविंग रेंजकमज्यादा
उपयोगEnergy Storage, EVPremium EV

दोनों बैटरी तकनीकों के अपने अलग-अलग फायदे हैं और इन्हें अलग जरूरतों के हिसाब से इस्तेमाल किया जाता है। LFP बैटरी आमतौर पर NMC बैटरी की तुलना में कम कीमत वाली होती है। हालांकि, इनकी ड्राइविंग रेंज अपेक्षाकृत कम होती है। यही कारण है कि इनका उपयोग केवल इलेक्ट्रिक वाहनों तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा भंडारण प्रणालियों में भी बड़े पैमाने पर किया जाता है।

भारत तेजी से नवीकरणीय ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में ग्रिड स्तर पर बिजली भंडारण की जरूरत भी बढ़ रही है। LFP बैटरी इस क्षेत्र के लिए उपयुक्त मानी जाती है और इससे एग्राटास को भारत के बढ़ते बैटरी एनर्जी स्टोरेज बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का अवसर मिल सकता है।

दूसरी ओर, NMC बैटरी सेल के निर्माण में एग्राटास को पहले से तकनीकी सहयोग मिल चुका है। कंपनी ने जापान की ऑटोमोटिव एनर्जी सप्लाई कॉर्प के साथ तकनीकी लाइसेंस समझौता किया है, जो हांगकांग स्थित एनविजन एनर्जी इंटरनेशनल की इकाई है। इस सहयोग की वजह से NMC तकनीक के शुरुआती विकास का समय बचा।

रिपोर्ट के अनुसार, साणंद स्थित फैक्ट्री में NMC बैटरी सेल का व्यावसायिक उत्पादन 2027 की शुरुआत तक शुरू होने की उम्मीद है। वहीं LFP तकनीक को कंपनी अपनी क्षमता के आधार पर विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

अगर Agratas अपनी योजना के मुताबिक LFP बैटरी सेल का सफल उत्पादन शुरू करती है, तो यह सिर्फ टाटा समूह के लिए ही नहीं बल्कि भारत के EV और Energy Storage सेक्टर के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हो सकती है। इससे देश में बैटरी निर्माण की क्षमता बढ़ने और विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है।

नोट: यह जानकारी Bloomberg की रिपोर्ट पर आधारित है। Agratas ने LFP तकनीक और पायलट प्रोडक्शन लाइन को लेकर आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार किया है।

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