रोहतास के करवंदिया में फिर गूंजेगी हथौड़े की आवाज? 1300 एकड़ वन भूमि पर खनन की तैयारी, कैमूर में जमीन चिन्हित

1 min read

रोहतास के करवंदिया में बंद पड़े पत्थर खनन को दोबारा शुरू करने की उम्मीद अब बढ़ गई है। सरकार ने वन भूमि से जुड़ी अड़चन दूर करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके लिए कैमूर में गैर वन भूमि चिन्हित कर हस्तांतरण का प्रस्ताव आगे बढ़ाया गया है।

करवंदिया की 1300 एकड़ वन भूमि पर शुरू हो सकती है खनन गतिविधि

रोहतास जिले के करवंदिया में पत्थर खनन फिर शुरू कराने की दिशा में सरकारी स्तर पर काम आगे बढ़ रहा है। खनन विभाग ने यहां करीब 1300 एकड़ जमीन को पत्थर उत्खनन के लिए चिन्हित किया है। यह जमीन वन विभाग के अधीन है, इसलिए सीधे खनन शुरू करना संभव नहीं है।

नियमों के अनुसार वन भूमि का इस्तेमाल किसी दूसरे काम के लिए करने पर उसके बदले गैर वन भूमि उपलब्ध करानी होती है। इसी व्यवस्था के तहत कैमूर जिले में जमीन तलाशने और उसे वन विभाग को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

करवंदिया में खनन शुरू होने से बिहार में निर्माण कार्यों के लिए पत्थर की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, खनन शुरू होने से पहले जमीन हस्तांतरण समेत जरूरी प्रक्रियाओं को पूरा करना होगा।

कैमूर के अधौरा में 17 मौजा की जमीन चिन्हित

करवंदिया की वन भूमि के बदले कैमूर जिले के अधौरा अंचल में गैर वन भूमि चिन्हित की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यहां कुल 2364 एकड़ जमीन चिन्हित की गई है। यह जमीन अधौरा क्षेत्र की 17 मौजा में बताई गई है।

वन विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में जमीन की मापी कराई गई। इसके साथ ही रकबा, खाता और प्लॉट से जुड़े जरूरी विवरण भी तैयार किए गए। इसके बाद जमीन हस्तांतरण से संबंधित प्रस्ताव खनन विभाग को भेज दिया गया है।

चिन्हित जमीन कैमूर के पहाड़ी क्षेत्र में स्थित बताई गई है और इसे गैर वन भूमि की श्रेणी में रखा गया है। अब जमीन के हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके बाद करवंदिया में पत्थर खनन शुरू करने की दिशा में आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है।

खनन विभाग के सचिव भी इस प्रक्रिया को लेकर कैमूर पहुंचे थे। उन्होंने जिलाधिकारी और संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की थी। अधिकारियों को जमीन की मापी कराने और जरूरी दस्तावेज तैयार करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने वन विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में मापी कराकर प्रस्ताव तैयार किया।

कभी दूसरे राज्यों में भी जाता था करवंदिया का पत्थर

करवंदिया में करीब दो दशक पहले बड़े स्तर पर पत्थर खनन किया जाता था। उस समय यहां मिलने वाले पत्थर को बिहार के साथ-साथ दूसरे राज्यों में भी उच्च गुणवत्ता का माना जाता था। रोहतास से बिहार के अलग-अलग हिस्सों में पत्थर की आपूर्ति होती थी।

खनन बंद होने के बाद निर्माण कार्यों के लिए बिहार को उत्तर प्रदेश और झारखंड से पत्थर मंगाना पड़ता है। इससे पत्थर की कीमत और उपलब्धता पर असर पड़ा है। करवंदिया में स्थानीय स्तर पर फिर खनन शुरू होने पर निर्माण क्षेत्र को राहत मिलने की उम्मीद है।

दरअसल, वन क्षेत्र की जमीन ही करवंदिया में खनन दोबारा शुरू करने की सबसे बड़ी अड़चन रही है। जिन पहाड़ी इलाकों में खनन की योजना है, उनका बड़ा हिस्सा वन क्षेत्र में आता है। ऐसे में गैर वन भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है।

एडीएम अनिल कुमार के अनुसार,

रोहतास में पत्थर खनन के लिए चिन्हित जमीन के बदले कैमूर जिले में जमीन वन विभाग को हस्तांतरित करने के लिए चिन्हित की गई है। इसका प्रस्ताव बनाकर खनन विभाग के सचिव को भेज दिया गया है।

हालांकि, एडीएम ने अपने बयान में हस्तांतरित की जाने वाली जमीन का रकबा 1364 एकड़ बताया है, जबकि प्रक्रिया से जुड़े अन्य विवरण में 2364 एकड़ जमीन का उल्लेख है। इसलिए जमीन के रकबे को लेकर दोनों आंकड़ों में अंतर सामने आया है।

Jai Jagdamba News Whatsapp

About the Author

Veer Rai

Founder & Editor, जय जगदम्बा न्यूज

Veer Rai जय जगदम्बा न्यूज के Founder और Editor हैं। उन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है। वे बिहार और देश-दुनिया से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों के साथ करियर, शिक्षा, नौकरी, राजनीति, धर्म, बिजनेस, टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जैसे विषयों पर गहन और शोध-आधारित लेख प्रकाशित करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सरल, स्पष्ट और विश्वसनीय भाषा में उपयोगी, तथ्यपरक और प्रमाणित जानकारी पहुंचाना है, जिससे लोग सही और जागरूक निर्णय ले सकें।

View all articles by Veer Rai →