नेपाल में तबाही के बीच सुरंगों में फंसे सैकड़ों मजदूर! 750 मौतों के बाद भी जारी है जिंदगी की तलाश

Nepal Disaster Rescue Operation: नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के पांच दिन बाद भी राहत और बचाव अभियान खत्म नहीं हुआ है। बाढ़ के मलबे और मिट्टी से भरी हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में कई मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। खराब मौसम और उफनती नदियां बचाव दल के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
इस आपदा में अब तक 750 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि नेपाल और तिब्बत में 3,000 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल सरकार का कहना है कि कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में 100 से अधिक मजदूर अभी भी जीवित हो सकते हैं।
पांच दिन बाद भी सुरंगों में जारी है रेस्क्यू ऑपरेशन
बुधवार को अचानक आई भारी मात्रा में मिट्टी और मलबे की बाढ़ ने पूरे इलाके में भारी तबाही मचा दी थी। इसके बाद से नेपाली सेना और अन्य बचाव दल लगातार सुरंगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। बचाव अभियान का मुख्य ध्यान त्रिशूली 3A और 3B हाइड्रोपावर परियोजनाओं पर है।
त्रिशूली 3A परियोजना में शनिवार देर रात सेना के जवानों ने ड्रिलिंग मशीनों की मदद से मलबे को पार करते हुए मिट्टी से भरी सुरंग के ऊपरी हिस्से तक पहुंच बनाई। इसके बाद सुरंग के अंदर हवा पहुंचाने के लिए पंप लगाए गए। बचाव दल ने विशेष कैमरे भी अंदर भेजे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि सुरंग में कोई व्यक्ति जीवित है या नहीं।
Nepal flood update –
यह वीडियो त्रिशूली हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट का है, जहां नेपाली सेना के जवान टनल के अंदर फंसे मजदूरों को सुरक्षित निकाल रहे हैं। नेपाल सरकार ने विदेशी रेस्क्यू टीमों की हेल्प ठुकरा दी है। नेपाल सरकार का कहना है कि वह खुद रेस्क्यू अभियान संभालने में सक्षम हैं। https://t.co/JzabLiQgxL pic.twitter.com/fgJh8w38vi
— Sachin Gupta (@Sachingupta) August 28, 2026
हालांकि, यह अभियान आसान नहीं है। बाढ़ अपने साथ भारी मात्रा में कीचड़ और बड़े-बड़े पत्थर लेकर आई है। इन्हीं के बीच सुरंग का रास्ता खोजने के लिए सेना और राहतकर्मी लगातार काम कर रहे हैं।
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बारिश और बढ़ते नदी के पानी ने बढ़ाई मुश्किल
बचाव अभियान के दौरान मौसम ने भी परेशानी बढ़ा दी। रात में हुई तेज बारिश के कारण नदियों का जलस्तर फिर बढ़ गया और खुदाई वाले इलाके में पानी भर गया। इससे कुछ समय के लिए बचाव कार्य प्रभावित हुआ। बाद में जब बाढ़ का पानी कम हुआ तो टीमों ने फिर से सुरंग के प्रवेश द्वार को खोजने का काम शुरू कर दिया।
इसके लिए ड्रिलिंग मशीन, एक्सकेवेटर, हाइड्रोलिक कटर और दूसरे भारी उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। नेपाल की सेना के अनुसार,
पानी कम होने के बाद सुरंग के रास्ते का पता लगाने के प्रयास दोबारा शुरू कर दिए गए हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी मौजूदा हालात को बेहद कठिन बताया है। इसके बावजूद बचाव दल लगातार उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, जिनके मलबे के नीचे फंसे होने की आशंका है।
इस अभियान में आधुनिक खोजी कैमरों और विशेष निगरानी उपकरणों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। सुरंग में बचाव कार्य का अनुभव रखने वाले विशेषज्ञ भारत और चीन से भी नेपाल पहुंचे हैं और अभियान में मदद कर रहे हैं।
933 हाइड्रोपावर कर्मचारी लापता
नेपाल की NDRRMA (National Disaster Risk Reduction and Management Authority) के मुताबिक, 933 हाइड्रोपावर कर्मचारी लापता हैं। इनमें से कई लोगों के सुरंगों में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। इस प्राकृतिक आपदा का असर नेपाल की बिजली व्यवस्था पर भी पड़ा है। नेपाल विद्युत प्राधिकरण के अनुसार, 11 हाइड्रोपावर स्टेशन और एक सोलर पावर प्लांट ने काम करना बंद कर दिया है
इन संयंत्रों के बंद होने से 431.1 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है। यह नेपाल की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता का करीब 10 प्रतिशत है। इसके अलावा निर्माणाधीन 15 अन्य बिजली परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है। इससे साफ है कि आपदा का असर केवल जनजीवन तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के महत्वपूर्ण बिजली ढांचे को भी बड़ा नुकसान हुआ है।
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अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (US Geological Survey) ने चीन-नेपाल सीमा के पास हुई इस प्राकृतिक आपदा को ग्लेशियर के ढहने से जोड़कर देखा है। फिलहाल नेपाल में सबसे बड़ी प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को ढूंढना और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना है। खराब मौसम और मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद बचाव दल लगातार सुरंगों की तलाश में जुटे हुए हैं।

