1000 अंक से ज्यादा टूटा Sensex, Nifty भी 22,850 के नीचे; जानिए शेयर बाजार में आज क्यों मचा हड़कंप?

Stock Market Crash September 2026
1 min read

Stock Market Crash September 2026: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार की सुबह भारी बिकवाली देखने को मिली। BSE Sensex में 1,000 अंकों के करीब गिरावट आई, जबकि Nifty 50 भी 22,850 के स्तर से नीचे चला गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और ईरान-अमेरिका तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।

Sensex 1,000 अंक के करीब टूटा, Nifty भी 22,850 के नीचे

सोमवार सुबह भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट दर्ज की गई। सुबह 10:40 बजे Nifty 50 करीब 305 अंक यानी 1.32 प्रतिशत गिरकर 22,835.15 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इसी समय BSE Sensex 986 अंक यानी 1.33 प्रतिशत की गिरावट के साथ 72,909.34 पर था।

बाजार में हुई इस बिकवाली का असर कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण पर भी पड़ा। BSE में सूचीबद्ध कंपनियों के संयुक्त मार्केट कैप से करीब 6 लाख करोड़ रुपये कम हो गए और यह लगभग 476 लाख करोड़ रुपये पर आ गया।

Sensex में शामिल सभी 30 शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। Bajaj Finance, Kotak Mahindra Bank और HDFC Bank में कमजोरी ने प्रमुख सूचकांक पर दबाव बढ़ाया। बड़ी कंपनियों के अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली दिखाई दी। Nifty Midcap 100 और Nifty Smallcap 100 दोनों में 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट रही।

किन कारणों से शेयर बाजार में आई गिरावट?

सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में अचानक तेज बिकवाली देखने को मिली। इसके पीछे घरेलू बाजार से ज्यादा वैश्विक घटनाक्रमों का असर दिखाई दिया। ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, रुपये में कमजोरी और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार पर एक साथ दबाव बनाया।

ईरान-अमेरिका तनाव से बढ़ी बाजार की चिंता

बाजार में गिरावट की प्रमुख वजहों में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव शामिल है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर से दिए गए सात दिन के युद्धविराम प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने को लेकर भी स्थिति साफ नहीं हुई है।

मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर बाजार की चिंता बढ़ गई। सोमवार को कच्चे तेल की कीमत करीब 2 प्रतिशत बढ़ी और यह 107 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई। बाजार में इस बात की चिंता है कि अगर तनाव और बढ़ता है तो तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल की कीमत लंबे समय तक ऊंची रहने पर देश के आयात खर्च पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर रुपये और महंगाई से जुड़े संकेतकों पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि कच्चे तेल में तेजी को भारतीय शेयर बाजार के लिए भी चिंता का कारण माना जा रहा है।

US Bond Yield बढ़ने से शेयर बाजार पर दबाव

बाजार में कमजोरी की एक और बड़ी वजह अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी रही। अमेरिकी 10 साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 5.2 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई, जो 2004 के बाद के ऊंचे स्तरों में है। इसी तरह 30 साल के अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड 5.5 प्रतिशत के पार चली गई, जबकि दो साल के ट्रेजरी नोट की यील्ड 4.9 प्रतिशत से ऊपर रही।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से निवेशकों के लिए बॉन्ड जैसे डेट इंस्ट्रूमेंट अधिक आकर्षक हो सकते हैं। ऐसे माहौल में शेयर बाजार जैसी जोखिम वाली संपत्तियों पर दबाव देखने को मिल सकता है। वैश्विक बाजारों में निवेशकों की धारणा पर भी इसका असर पड़ता है।

रुपये में कमजोरी ने बढ़ाई परेशानी

भारतीय रुपया भी सोमवार के शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ। रुपया 14 पैसे गिरकर 95.89 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। कच्चे तेल की महंगी कीमत, मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी से रुपये पर दबाव बना हुआ है।

रुपये में कमजोरी खास तौर पर उस समय बाजार के लिए चिंता बढ़ाती है, जब कच्चे तेल की कीमत भी तेजी से बढ़ रही हो। तेल महंगा होने और डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने से भारत के आयात खर्च पर दबाव बढ़ सकता है।

FII Selling ने भी बढ़ाया बिकवाली का दबाव

विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी सोमवार की गिरावट को बढ़ाने में भूमिका निभाई। शुक्रवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 3,694 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की थी।

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इस महीने अब तक एक्सचेंजों के जरिए विदेशी निवेशकों की इक्विटी बिकवाली 25,682 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। ऐसे समय में जब वैश्विक बाजारों में भी अनिश्चितता बनी हुई है, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भारतीय शेयरों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है।

एशियाई बाजारों पर भी दिखा असर

भारतीय बाजार की कमजोरी का असर एशिया के दूसरे बाजारों में भी देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का Kospi 2 प्रतिशत से ज्यादा गिरा, जबकि चीन का Shanghai Composite 1.7 प्रतिशत से अधिक नीचे रहा। हालांकि, जापान के Nikkei में हल्की बढ़त दर्ज की गई।

सोमवार की गिरावट से साफ है कि बाजार पर सिर्फ घरेलू कारणों का असर नहीं था। ईरान-अमेरिका तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी, रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने मिलकर बाजार पर दबाव बढ़ाया। अब निवेशकों की नजर आगे कच्चे तेल की कीमत और वैश्विक घटनाक्रम पर रहेगी।

Jai Jagdamba News Whatsapp

About the Author

Veer Rai

Founder & Editor, जय जगदम्बा न्यूज

Veer Rai जय जगदम्बा न्यूज के Founder और Editor हैं। उन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है। वे बिहार और देश-दुनिया से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों के साथ करियर, शिक्षा, नौकरी, राजनीति, धर्म, बिजनेस, टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जैसे विषयों पर गहन और शोध-आधारित लेख प्रकाशित करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सरल, स्पष्ट और विश्वसनीय भाषा में उपयोगी, तथ्यपरक और प्रमाणित जानकारी पहुंचाना है, जिससे लोग सही और जागरूक निर्णय ले सकें।

View all articles by Veer Rai →