वीकेंड पर जंगल सफारी का प्लान? इन 5 जगहों पर मिल सकता है बाघों और वन्यजीवों का रोमांच

Wildlife Safari Near Delhi
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Wildlife Safari Near Delhi: दिल्ली-एनसीआर की भीड़, ट्रैफिक और लगातार भागदौड़ से ब्रेक लेना चाहते हैं तो जंगल सफारी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। अक्टूबर से उत्तर भारत के कई प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व पर्यटकों के लिए खुलने लगते हैं। सर्द मौसम में खुली जिप्सी से जंगल घूमना और बाघ, तेंदुआ, हिरण व हाथियों को उनके प्राकृतिक घर में देखना एक अलग ही अनुभव देता है।

वीकेंड पर घूमने के लिए 5 बेहतरीन जंगल (Wildlife Safari Near Delhi)

पीलीभीत टाइगर रिजर्व

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में स्थित पीलीभीत टाइगर रिजर्व दिल्ली से वीकेंड ट्रिप के लिए एक अच्छा विकल्प है। भारत-नेपाल सीमा के पास फैले इस जंगल में रॉयल बंगाल टाइगर, भारतीय तेंदुआ, बारहसिंगा और कई दुर्लभ पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं। यहां ऊंचे साल के पेड़ और तराई के दलदली इलाके जंगल की खूबसूरती बढ़ाते हैं।

पीलीभीत की खास पहचान शारदा सागर बांध के किनारे स्थित चूका बीच भी है। घने जंगल के बीच मौजूद यह जगह पर्यटकों को अलग अनुभव देती है। अक्टूबर से फरवरी के बीच यहां मौसम काफी सुहावना रहता है। इस दौरान सफारी में वन्यजीवों की गतिविधियां देखने का मौका मिल सकता है। दिल्ली से सड़क मार्ग के जरिए पीलीभीत पहुंचने में करीब 6 से 7 घंटे लगते हैं।

रणथंभौर नेशनल पार्क

राजस्थान के सवाई माधोपुर में स्थित रणथंभौर नेशनल पार्क देश के प्रमुख टाइगर रिजर्व में शामिल है। दिल्ली से इसकी दूरी करीब 360 किलोमीटर है। अरावली और विंध्य पर्वत श्रृंखलाओं के बीच फैले इस जंगल की खासियत वन्यजीवों के साथ इसका ऐतिहासिक वातावरण भी है। यहां रणथंभौर किला और कई खूबसूरत झीलें सफारी के अनुभव को और खास बनाती हैं।

रणथंभौर में जीप और कैंटर सफारी के दौरान पदम तालाब, मलिक तालाब और राजबाग के आसपास वन्यजीवों को देखा जा सकता है। यहां बाघ के अलावा सांभर, चीतल, मगरमच्छ और तेंदुए भी पाए जाते हैं। अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यहां घूमने के लिए अच्छा माना जाता है।

जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क

उत्तराखंड में स्थित जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क दिल्ली से करीब 240 से 260 किलोमीटर की दूरी पर है। नैनीताल और पौड़ी गढ़वाल जिलों में फैला यह देश का सबसे पुराना राष्ट्रीय उद्यान है। रामगंगा नदी के आसपास फैले जंगल में रॉयल बंगाल टाइगर, एशियाई हाथी, तेंदुआ और घड़ियाल जैसे वन्यजीव पाए जाते हैं।

कॉर्बेट पक्षी प्रेमियों के लिए भी खास जगह है। यहां 600 से अधिक देशी और प्रवासी पक्षियों की प्रजातियां मिलती हैं। ढिकाला, बिजरानी और झिरना इसके प्रमुख पर्यटन जोन हैं। सर्दियों की सुबह जंगल में छाई धुंध और पक्षियों की आवाज सफारी के अनुभव को और यादगार बना सकती है।

पन्ना टाइगर रिजर्व

मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में स्थित पन्ना टाइगर रिजर्व केन नदी और आसपास के प्राकृतिक चट्टानी इलाकों के लिए जाना जाता है। बाघ पुनर्वास परियोजना के बाद यहां बाघों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। सफारी के दौरान बाघ और तेंदुए के अलावा भालू, चिंकारा, चौसिंगा और गिद्धों की कई प्रजातियां देखने का मौका मिल सकता है।

केन नदी के किनारे का प्राकृतिक वातावरण और चट्टानी परिदृश्य पन्ना की सफारी को दूसरे टाइगर रिजर्व से अलग बनाते हैं। अगर आप जंगल के साथ प्राकृतिक नजारों का आनंद लेना चाहते हैं, तो पन्ना आपके लिए एक विकल्प हो सकता है।

सरिस्का टाइगर रिजर्व

अगर दिल्ली से ज्यादा दूर नहीं जाना चाहते हैं, तो राजस्थान का सरिस्का टाइगर रिजर्व वीकेंड सफारी के लिए सुविधाजनक विकल्प है। दिल्ली से करीब 200 किलोमीटर दूर स्थित यह रिजर्व अरावली की पहाड़ियों और ऐतिहासिक खंडहरों के बीच फैला हुआ है। कम समय में जंगल की सैर करने के लिए इसे चुना जा सकता है।

सरिस्का में बाघों के अलावा लकड़बग्घे, नीलगाय और कई तरह के हिरण पाए जाते हैं। इसकी दूरी कम होने के कारण यहां एक या दो दिन की छोटी ट्रिप की योजना बनाई जा सकती है।

जंगल सफारी पर जाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

सफारी के दौरान यह याद रखना जरूरी है कि जंगल वन्यजीवों का प्राकृतिक घर है। जिप्सी से नीचे उतरना, शोर करना, तेज संगीत बजाना या जानवरों को खाना खिलाना नियमों के खिलाफ है। गाइड और वन विभाग के निर्देशों का पालन करना चाहिए। हल्के हरे, खाकी या भूरे रंग के कपड़े पहनना बेहतर माना जाता है। सफारी परमिट कई जगह पहले से बुक हो जाते हैं, इसलिए यात्रा से पहले संबंधित राज्य वन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर परमिट, गेट और मौसम से जुड़ी ताजा जानकारी जरूर जांच लें।

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Founder & Editor, जय जगदम्बा न्यूज
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