Desi Thali Nutrition: महंगे सुपरफूड्स की जरूरत नहीं, रोज की देसी थाली में छिपा है पूरा पोषण का राज

Desi Thali Nutrition: आज फिटनेस के दौर में लोग महंगे सुपरफूड्स, प्रोटीन पाउडर और मुश्किल डाइट प्लान को सेहत का रास्ता मानने लगे हैं। लेकिन हमारी पारंपरिक भारतीय थाली में मौजूद दाल, अनाज, सब्जियां, फलियां, दूध-दही और मसाले ही संतुलित पोषण का मजबूत आधार बन सकते हैं।
दाल और फलियां शरीर को देती हैं जरूरी पोषण
भारतीय खाने में अरहर, मूंग, मसूर, चना और उड़द जैसी दालों की खास जगह है। इनमें प्लांट-बेस्ड प्रोटीन के साथ डायट्री फाइबर, आयरन, पोटैशियम और फोलेट जैसे जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। राजमा, छोले, लोबिया और सफेद चना जैसी फलियां भी शरीर के लिए उपयोगी पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत हैं।
एक ही दाल को लगातार खाने के बजाय अलग-अलग दालों और फलियों को भोजन में बदल-बदलकर शामिल करना बेहतर माना जाता है। इससे शरीर को अलग-अलग माइक्रोन्यूट्रिएंट्स मिलते हैं। दालों में मौजूद फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करता है। इससे बार-बार भूख लगने और जरूरत से ज्यादा खाने को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
दाल-चावल और दाल-रोटी का मेल क्यों है खास?
शाकाहारी भोजन को लेकर अक्सर यह सवाल उठता है कि इससे पर्याप्त और अच्छी गुणवत्ता वाला प्रोटीन मिलता है या नहीं। दरअसल, अनाज और दालों में अलग-अलग आवश्यक अमीनो एसिड पाए जाते हैं। गेहूं, चावल और बाजरा जैसे अनाजों में लाइसिन अपेक्षाकृत कम होता है, जबकि दालों में मेथियोनीन की मात्रा कम होती है।
ऐसे में जब दाल और अनाज को एक साथ खाया जाता है, तो दोनों एक-दूसरे के पोषण की कमी को पूरा करने में मदद करते हैं। दाल-चावल, दाल-रोटी और खिचड़ी इसके आसान उदाहरण हैं। इस पारंपरिक संयोजन से शरीर को जरूरी अमीनो एसिड का बेहतर संतुलन मिल सकता है।
यही वजह है कि भारतीय भोजन में सदियों से दाल और अनाज को साथ खाने की परंपरा रही है। संतुलित मात्रा में इनका सेवन मांसपेशियों के विकास और शरीर की सामान्य जरूरतों के लिए प्रोटीन उपलब्ध कराने में मदद करता है।
मौसमी सब्जियां और देसी मसाले बढ़ाते हैं थाली की पौष्टिकता
एक अच्छी भारतीय थाली में अलग-अलग रंगों की मौसमी सब्जियों को शामिल करना भी जरूरी है। पालक, मेथी, बथुआ, चौलाई और सरसों जैसी हरी पत्तेदार सब्जियों से कई जरूरी विटामिन और खनिज मिलते हैं। वहीं गाजर, कद्दू, चुकंदर, टमाटर, शिमला मिर्च, भिंडी और लौकी जैसी सब्जियां भोजन में कई तरह के पोषक तत्व और एंटीऑक्सीडेंट जोड़ती हैं।
ICMR-NIN की ‘माय प्लेट फॉर द डे’ अवधारणा में भी रोज के भोजन में सब्जियों और फलों को पर्याप्त जगह देने पर जोर दिया गया है। मौसमी और स्थानीय चीजों को भोजन में शामिल करना पाचन और सामान्य स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकता है।
वहीं हल्दी, जीरा, धनिया, हींग, मेथी, अदरक, लहसुन और काली मिर्च जैसे मसाले भारतीय भोजन की खास पहचान हैं। इनमें मौजूद प्राकृतिक यौगिक भोजन को स्वाद देने के साथ पाचन प्रक्रिया में भी मदद कर सकते हैं। हालांकि, मसालों को किसी बीमारी का इलाज या दवा का विकल्प नहीं समझना चाहिए। इनका फायदा संतुलित भोजन का हिस्सा बनने पर ही बेहतर तरीके से मिल सकता है।
शाकाहारी थाली में इन चीजों से पूरा करें प्रोटीन
अगर कोई व्यक्ति पूरी तरह शाकाहारी है, तो उसे सिर्फ रोटी, चावल और आलू पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। अंकुरित मूंग या चना, टोफू, पनीर, सोयाबीन, दही, छाछ, भुना चना और अलसी, तिल या कद्दू के बीज जैसे खाद्य पदार्थ भोजन में शामिल किए जा सकते हैं।
इस तरह रोजमर्रा की देसी थाली से ही प्रोटीन और दूसरे जरूरी पोषक तत्व हासिल किए जा सकते हैं, बिना हर बार महंगे सप्लीमेंट्स पर निर्भर हुए।
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